AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर टेक इंडस्ट्री में बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं. Google DeepMind के Demis Hassabis से लेकर Anthropic के CEO Dario Amodei तक का मानना है कि AI भविष्य में कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का इलाज खोजने में मदद कर सकता है. अब Palantir के CTO श्याम शंकर ने एक ऐसा दावा किया है, जिसने इस बहस को नया मोड़ दे दिया है. उनके मुताबिक, कई AI रिसर्चर्स तकनीक पर अपने भरोसे को दिखाने के लिए सिगरेट पीने लगे हैं. उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में AI कैंसर का इलाज खोज लेगा.
कैंसर का इलाज खोज लेगा AI?
Palantir के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर श्याम शंकर ने CBS के साथ बातचीत में कहा कि AI रिसर्चर्स के बीच तकनीक को लेकर भरोसा इतना बढ़ गया है कि कुछ लोग सिगरेट पीने लगे हैं. उनके के मुताबिक, रिसर्चर्स दूसरों को ये दिखाना चाहते हैं कि उन्हें AI की कैपिसिटी पर कितना भरोसा है. उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि AI कैंसर का इलाज खोज लेगा और इसी विश्वास को दिखाने के लिए कुछ लोग ऐसे व्यवहार का सहारा ले रहे हैं, जो खुद कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है. हालांकि, उनका दावा है. इससे यह साबित नहीं होता कि AI रिसर्चर्स के बीच सिगरेट पीना कोई जेनरल चलन बन गया है. इसका ये भी मतलब नहीं है कि AI के जरिए कैंसर का इलाज खोजने की संभावना का मतलब यह है कि भविष्य में हर तरह के कैंसर का इलाज निश्चित रूप से मिल जाएगा.
AI की मदद से कैंसर के इलाज पर बढ़ी उम्मीद
AI की मदद से कैंसर समेत कई बीमारियों के इलाज पर रिसर्च की जा रही है. दवा की खोज, मरीजों के डेटा का विश्लेषण और संभावित इलाज के ऑप्शन की पहचान जैसे क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में Moderna और Merck ने AI की मदद से डेवलप किए गए mRNA मेलानोमा वैक्सीन से जुड़े Phase 3 ट्रायल के पॉजिटिव रिजल्ट की जानकारी दी थी. मेलानोमा स्कीन के कैंसर का एक टाइप है. इस तरह की रिसर्च ने कैंसर के इलाज में नई तकनीक के इस्तेमाल को लेकर उम्मीद बढ़ाई है.
हालांकि, किसी वैक्सीन या इलाज के ट्रायल में पॉजिटिव रिजल्ट मिलने का अर्थ ये नहीं है कि AI ने कैंसर का पूरा इलाज खोज लिया है. किसी भी संभावित इलाज की प्रभावशीलता और सुरक्षा को साबित करने के लिए साइंटिस्ट टेस्टिंग करते हैं और और नियामकीय प्रक्रिया जरूरी होती है.
Anthropic के CEO Dario Amodei ने भी कुछ दिन पहले कहा था कि AI अगले 5 से 15 साल में कैंसर समेत ज्यादातर बीमारियों का इलाज खोजने में मदद कर सकता है. Elon Musk ने भी इस तरह की उम्मीदों का समर्थन किया है. Google DeepMind के प्रमुख Demis Hassabis भी पिछले कुछ वर्षों में AI की मदद से साइंस और मेडिकल के एरिया में बड़े बदलाव आने की बात कह चुके हैं.
AGI को 'मशीन भगवान' मानने लगे हैं Silicon Valley के लोग
श्याम शंकर ने AI को लेकर बढ़ते भरोसे के साथ एक और चिंता जताई. उनके मुताबिक, सिलिकॉन वैली में AI डेवलप करने वाले कई लोग AGI यानी Artificial General Intelligence को लगभग भगवान जैसी शक्ति के रूप में देखने लगे हैं. आपको बता दें कि AGI ऐसी संभावित AI टेक्नोलॉजी को कहा जाता है, जो इंसानों की तरह अलग-अलग तरह के कामों को समझने और करने में सक्षम हो सकती है. हालांकि, AGI की परिभाषा और इसे हासिल करने की समयसीमा को लेकर टेक इंडस्ट्री में अलग-अलग विचार हैं.
AI इंसानियत खत्म करेगा या दुनिया को बनाएगा बेहतर?
Sankar ने AI इंडस्ट्री में चल रही दो बड़ी बहसों का भी जिक्र किया. पहली आशंका यह है कि AI भविष्य में इंसानियत के लिए खतरा बन सकता है. दूसरी उम्मीद यह है कि AI दुनिया को बेहतर बनाकर एक तरह की यूटोपिया जैसी स्थिति पैदा कर सकता है, जहां लोगों की जिंदगी ज्यादा आसान हो जाए. उनके मुताबिक, पहली नजर में ये दोनों विचार एक-दूसरे के बिल्कुल उलट लगते हैं, लेकिन इनमें एक समानता है. दोनों ही स्थितियों में ऐसा माना जाता है कि इंसानों के पास अपने भविष्य को तय करने की बहुत कम शक्ति बचेगी.
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