उसेन बोल्ट और माइकल फेल्प्स (फाइल फोटो)
- आईओसी प्रमुख बाक ने दोनों को बताया‘महानायक’
- 30 साल के बोल्ट ने चार ओलिंपिक में 9 गोल्ड जीते
- 31 वर्षीय फेल्पस ने पांच ओलिंपिक में जीत डाले 23 गोल्ड
रियो डि जेनेरो:
फर्राटा किंग उसेन बोल्ट और महान तैराक माइकल फेल्प्स के ढेरों गोल्ड मेडल्स ने ओलिंपिक का पूरा परिदृश्य बदलकर रख दिया है. खेलों के महाकुंभ में उनकी आखिरी भागीदारी के बाद ओलिंपिक खेलों में एक बड़ा सूनापन आ जाएगा. यह देखना दिलचस्प होगा कि टोक्यो में वर्ष 2020 में होने वाले ओलिंपिक में 'नया नायक' बनकर कौन आएगा उभरेगा जो अपने खेल कौशल से दुनिया भर को चौंकाएगा.
अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के प्रमुख थॉमस बाक ने दोनों खिलाड़ियों को ‘महानायक’ बताया है लेकिन 31वें ओलिंपिक खेल खत्म होने के बाद वह सोचेंगे कि इस सूनेपन को कैसा भरा जाए. 30 साल के बोल्ट ने 9 जबकि 31 साल के फेल्प्स ने 23 गोल्ड जीते हैं. अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाक ने कल कहा, ‘हमने ऐसे खिलाड़ी देखे हैं जो यहां आने से पहले ही महानायक बन गए थे, जिन्होंने महानायकों के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत की जैसे कि माइकल फेल्प्स और उसेन बोल्ट.’ दोनों ने ओलंपिक में पहली बार हिस्सा लेने के बाद से लगातार अपना प्रदर्शन बेहतर किया. 15 साल के फेल्प्स ने पहली बार 2000 के सिडनी ओलिंपिक में 200 मीटर में हिस्सा लिया था जबकि 17 साल के बोल्ट 2004 के एथेंस ओलंपिक में 200 मीटर की अपनी हीट में पांचवें स्थान पर रहे थे.
लेकिन एथेंस ओलंपिक में फेल्प्स ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए छह गोल्ड एवं दो ब्रॉन्ज मेडल जीतकर मार्क स्पिट्ज के सात खिताबों के रिकॉर्ड को चुनौती दी थी. 2008 के बीजिंग ओलिंपिक में उन्होंने तैराकी की अपनी सभी आठ प्रतिस्पर्धाओं में आठ गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया जबकि बोल्ट ने वहां 100 मीटर, 200 मीटर और चार गुणा 100 मीटर दौड़ स्पर्धाओं में गोल्ड जीतकर बर्डस नेस्ट स्टेडियम में दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया. 2012 के लंदन ओलिंपिक में बोल्ट ने फिर से तीनों स्पर्धाओं में गोल्ड जीता जबकि फेल्प्स ने अपने खाते में चार और गोल्ड जोड़े.
रियो में पांच गोल्ड जीतकर अमेरिकी तैराक ने 23 स्वर्ण सहित अपने पदकों की कुल संख्या 28 कर ली जबकि बोल्ट ने फिर से तीन स्पर्धाओं का गोल्ड जीत लिया. बोल्ट के नाम नौ ओलंपिक गोल्ड हैं. तमाम उपलब्धियों की वजह से ही बोल्ट ने अब कहा है, ‘मैंने दुनिया को साबित कर दिया कि मैं महानतम हूं.’ वहीं फेल्प्स ने कहा, ‘एक बच्चे के तौर पर मैंने अपने लिए एक ऐसा लक्ष्य तय किया था जिसे पहले कोई हासिल नहीं कर पाया. अब मैं अपने करियर पर नजर जमाऊं तो कह सकता हूं कि मैंने ऐसा कर दिखाया.’
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के प्रमुख थॉमस बाक ने दोनों खिलाड़ियों को ‘महानायक’ बताया है लेकिन 31वें ओलिंपिक खेल खत्म होने के बाद वह सोचेंगे कि इस सूनेपन को कैसा भरा जाए. 30 साल के बोल्ट ने 9 जबकि 31 साल के फेल्प्स ने 23 गोल्ड जीते हैं. अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाक ने कल कहा, ‘हमने ऐसे खिलाड़ी देखे हैं जो यहां आने से पहले ही महानायक बन गए थे, जिन्होंने महानायकों के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत की जैसे कि माइकल फेल्प्स और उसेन बोल्ट.’ दोनों ने ओलंपिक में पहली बार हिस्सा लेने के बाद से लगातार अपना प्रदर्शन बेहतर किया. 15 साल के फेल्प्स ने पहली बार 2000 के सिडनी ओलिंपिक में 200 मीटर में हिस्सा लिया था जबकि 17 साल के बोल्ट 2004 के एथेंस ओलंपिक में 200 मीटर की अपनी हीट में पांचवें स्थान पर रहे थे.
लेकिन एथेंस ओलंपिक में फेल्प्स ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए छह गोल्ड एवं दो ब्रॉन्ज मेडल जीतकर मार्क स्पिट्ज के सात खिताबों के रिकॉर्ड को चुनौती दी थी. 2008 के बीजिंग ओलिंपिक में उन्होंने तैराकी की अपनी सभी आठ प्रतिस्पर्धाओं में आठ गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया जबकि बोल्ट ने वहां 100 मीटर, 200 मीटर और चार गुणा 100 मीटर दौड़ स्पर्धाओं में गोल्ड जीतकर बर्डस नेस्ट स्टेडियम में दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया. 2012 के लंदन ओलिंपिक में बोल्ट ने फिर से तीनों स्पर्धाओं में गोल्ड जीता जबकि फेल्प्स ने अपने खाते में चार और गोल्ड जोड़े.
रियो में पांच गोल्ड जीतकर अमेरिकी तैराक ने 23 स्वर्ण सहित अपने पदकों की कुल संख्या 28 कर ली जबकि बोल्ट ने फिर से तीन स्पर्धाओं का गोल्ड जीत लिया. बोल्ट के नाम नौ ओलंपिक गोल्ड हैं. तमाम उपलब्धियों की वजह से ही बोल्ट ने अब कहा है, ‘मैंने दुनिया को साबित कर दिया कि मैं महानतम हूं.’ वहीं फेल्प्स ने कहा, ‘एक बच्चे के तौर पर मैंने अपने लिए एक ऐसा लक्ष्य तय किया था जिसे पहले कोई हासिल नहीं कर पाया. अब मैं अपने करियर पर नजर जमाऊं तो कह सकता हूं कि मैंने ऐसा कर दिखाया.’
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