- 1998 में जोधपुर में फिल्म की शूटिंग के दौरान सलमान खान पर काले हिरण और चिंकारा के शिकार के गंभीर आरोप लगे थे
- बिश्नोई समुदाय सलमान खान के शिकार के आरोपों को अपनी आस्था के खिलाफ मानता है
- लॉरेंस बिश्नोई ने इस विवाद को अपने गैंगस्टर दबदबे के लिए इस्तेमाल करते हुए सलमान खान को धमकी दी थी
“सलमान खान को माफ़ी मांगनी चाहिए,” एक धुंधली और अस्पष्ट आवाज़ कहती है. यह गैंगस्टर अनिल पंडित का कथित ऑडियो है, जिसमें वह मुंबई में 18 अक्टूबर 2036 को बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हुई गोलीबारी की ज़िम्मेदारी लेता है. मुंबई के जुहू इलाके में पुष्पा नर्सरी पार्क के बाहर टाइगर श्रॉफ के घर के निकट हुई फायरिंग ने राष्ट्रीय सुर्खियाँ बटोरी हैं और एक बार फिर अभिनेता सलमान खान और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. इस विवाद की जड़ साल 1998 में राजस्थान के जोधपुर में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग के दौरान काले हिरण और चिंकारा के कथित शिकार से जुड़ी है.
1998 में जोधपुर में शुरू हुआ विवाद
फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग के सिलसिले में 1998 में अभिनेता सलमान खान करीब तीन सप्ताह तक जोधपुर में थे. सितंबर के आखिरी दिनों से लेकर अक्टूबर 1998 तक उन पर जोधपुर के ग्रामीण इलाकों में शिकार करने का आरोप लगा. आरोप है कि 26 और 27 सितंबर की दरमियानी रात उन्होंने भावड़ गांव में दो चिंकारों का शिकार किया. यह मामला निचली अदालत में चला, लेकिन बाद में राजस्थान हाई कोर्ट ने सलमान खान को बरी कर दिया.
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बिश्नोई समुदाय क्यों हुआ नाराज़?
राजस्थान में बिश्नोई समुदाय जोधपुर के ग्रामीण इलाकों में अपने गांवों के आसपास रहने वाले वन्यजीवों और पर्यावरण की रक्षा के लिए जाना जाता है. समुदाय के लोगों ने एक और दो अक्टूबर की दरमियानी रात सलमान खान की गतिविधियों पर नज़र रखी थी. बताया जाता है कि कांकाणी गांव के बिश्नोई समुदाय के लोगों ने गोली चलने की आवाज़ सुनी और घरों से बाहर निकल आए. उन्होंने कथित तौर पर उस गाड़ी का पीछा भी किया, जिसमें अभिनेता के सवार होने की बात कही गई थी.
इसके बाद उन्होंने वन विभाग के साथ मिलकर इस मामले को आगे बढ़ाया और कानूनी लड़ाई में गवाह बने. यह कानूनी लड़ाई करीब 20 साल तक चली. बिश्नोई समुदाय की नाराज़गी की वजह यह थी कि उनके मुताबिक एक अभिनेता ने उनके पवित्र सिद्धांतों में से एक का उल्लंघन किया था.
बिश्नोई समुदाय के 29 नियम और वन्यजीव संरक्षण
बिश्नोई समुदाय की पहचान उसके 29 नियमों से जुड़ी है. मारवाड़ी में इसे “बीस नै नौ नियम” कहा जाता है. इन्हीं 29 नियमों के आधार पर समुदाय का नाम बिश्नोई पड़ा. इन नियमों में अहिंसा, जीव-जंतुओं की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है. काले हिरण और चिंकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध बिश्नोई समुदाय कथित शिकार की घटना से बेहद नाराज़ था. समुदाय के लोगों को लगा कि उनके क्षेत्र में खुलेआम वन्यजीवों का शिकार किया गया है.
उनके विरोध के बाद वन विभाग ने सलमान खान और अन्य लोगों के खिलाफ शिकार से जुड़े मामले दर्ज किए. लेकिन बिश्नोई समुदाय यहीं नहीं रुका. उसने इस लंबी कानूनी लड़ाई को जारी रखा और अपने ही समुदाय के एक वकील को नियुक्त किया, ताकि करीब दो दशकों तक मामले पर नज़र रखी जा सके.
विवाद में लॉरेंस बिश्नोई की एंट्री कैसे हुई?
इस पूरे विवाद में लॉरेंस बिश्नोई की एंट्री काफी बाद में हुई. लॉरेंस पंजाब के फिरोजपुर जिले के दुतारांवाली गांव का रहने वाला है.साल 2018 में लॉरेंस बिश्नोई को एक अन्य जबरन वसूली के मामले में जोधपुर की अदालत में पेश किया जा रहा था. अदालत से बाहर निकलते समय उसने टीवी कैमरों के सामने कहा था, “सलमान खान को यहीं जोधपुर में मारेंगे. तब इनको हमारी असली पहचान का पता चलेगा.” यह लॉरेंस बिश्नोई के लिए एक निर्णायक क्षण था. उसने बिश्नोई समुदाय में सलमान खान के खिलाफ मौजूद नाराज़गी को अपने पक्ष में इस्तेमाल किया. एक ऐसे मामले को, जिसमें समुदाय को अब तक त्वरित न्याय नहीं मिला था, उसने अपनी पहचान बनाने के लिए इस्तेमाल किया.

आईपीएस एमएन दिनेश. Photo Credit: Social Media
गैंग की रणनीति पर क्या कहते हैं एजीटीएफ प्रमुख?
राजस्थान में एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स के प्रमुख और राज्य में गैंग्स की गतिविधियों पर नज़र रखने वाले आईपीएस एम.एन. दिनेश कहते हैं, “सलमान खान उनके लिए प्रचार का एक माध्यम हैं. सुर्खियों में आने का यह उनका तरीका है. उनका असली मकसद जबरन वसूली है. एक सनसनीखेज गोलीबारी को अंजाम देकर वे बड़े नामों और हाई-प्रोफाइल घटनाओं के जरिए जबरन वसूली की दुनिया में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं.
उनका काम करने का तरीका आमतौर पर शूटरों को काम पर रखना होता है. कुछ मामलों में, अगर शूटर बहुत कुशल नहीं होता, तो वे उसे छोड़ देते हैं और पुलिस के हाथों पकड़े जाने देते हैं. लेकिन अगर उनके पास कोई ऐसा शार्पशूटर हो, जो उनके गैंग का हिस्सा हो या आगे चलकर उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता हो, तो उसके लिए बाहर निकलने की योजना भी तैयार रखी जाती है.
राजस्थान की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने ऐसे कई सुपारी लेकर हत्या करने वाले अपराधियों को गिरफ्तार किया है. हाल ही में राजस्थान में उनका निशाना कांग्रेस का एक पूर्व विधायक था. लेकिन वे उस तक नहीं पहुंच सके, क्योंकि जोधपुर में ही एजीटीएफ ने शूटरों को गिरफ्तार कर लिया.”
बिश्नोई समुदाय के भीतर अलग-अलग राय
जोधपुर में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई द्वारा 1998 के शिकार मामले को फिर से उठाने और सलमान खान को निशाना बनाने को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं. बिश्नोई टाइगर फोर्स के सदस्य और संगठन के महासचिव राम निवास बिश्नोई कहते हैं, “सलमान खान का शिकार मामला बिश्नोई समाज के लिए भावनात्मक मुद्दा है. हमें अब तक इस मामले में न्याय नहीं मिला है. चिंकारा के शिकार के मामले में हाई कोर्ट ने अभिनेता को बरी कर दिया था, जबकि काले हिरण के मामले में अपील लंबित है.
सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका यानी एसएलपी पर भी राज्य सरकार की ओर से प्रभावी ढंग से बहस नहीं की गई है. इसलिए, इस मामले में न्याय बहुत कम दिखाई देता है. जहाँ तक लॉरेंस बिश्नोई की बात है, उसके लिए सलमान एक सेलिब्रिटी हैं. लेकिन हम सलमान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई चाहते हैं, उनकी मौत नहीं. बिश्नोई समुदाय पेड़ों, जानवरों और पक्षियों की रक्षा करता है. हम अहिंसा में विश्वास रखने वाला समुदाय हैं. ऐसे में हम हिंसा की मांग कैसे कर सकते हैं या उसका समर्थन कैसे कर सकते हैं?”

बिश्नोई समाज का मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले में नोखा तहसील के पास मुकाम में स्थित है. Photo Credit: Social Media
राम निवास बिश्नोई बिश्नोई टाइगर फोर्स के सक्रिय सदस्य हैं. उन्होंने जोधपुर में अदालत में पेशी के दौरान अभिनेता सलमान खान के खिलाफ कई प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था. अब यह मामला ट्रांसफर याचिका के जरिए हाई कोर्ट में पहुंच गया है. इसके चलते सलमान खान को सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने की आवश्यकता नहीं है. इससे इस मामले के इर्द-गिर्द बनने वाले हाई-वोल्टेज मीडिया तमाशे में कुछ कमी आई है.
हालांकि, बिश्नोई समुदाय के कुछ नेता अब भी इस मामले पर अपनी राय रख रहे हैं. जोधपुर जिला बिश्नोई महासभा के अध्यक्ष नारायण राम बिश्नोई कहते हैं, “ये सभी बयान मीडिया की बनाई हुई कहानी हैं. हम वास्तव में यह सत्यापित नहीं कर सकते कि लॉरेंस बिश्नोई ने क्या कहा या क्या दावा किया. हम केवल मीडिया में इसकी खबरें देखते हैं. लेकिन एक समुदाय के तौर पर हम किसी भी आपराधिक या असंवैधानिक कृत्य का समर्थन नहीं कर सकते.”
मुकाम मुक्ति धाम में माफी की मांग
वहीं, समुदाय के कुछ अन्य सदस्य इस मुद्दे पर स्पष्ट राय रखने से बचते दिखाई देते हैं, लेकिन अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के देवेंद्र बुधिया अपनी बात खुलकर रखते हैं. उनका कहना है कि यह विवाद तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक सलमान खान बीकानेर स्थित मुकाम मुक्ति धाम नहीं जाते. यह गुरु जांभेश्वर का समाधि स्थल है, जिन्होंने बिश्नोई समुदाय की स्थापना की थी. देवेंद्र बुधिया के मुताबिक, सलमान खान को वहां जाकर हिरणों की हत्या के अपने कृत्य के लिए माफी मांगनी चाहिए. देवेंद्र बुधिया के बयान लॉरेंस बिश्नोई की बातों से मेल खाते हैं. बुधिया खुद भी एक विवादित व्यक्ति हैं और बिश्नोई संगठन के भीतर पूर्व संरक्षक तथा भाजपा नेता कुलदीप बिश्नोई के साथ गुटीय विवाद में शामिल रहे हैं.
फिर सुर्खियों में आया 1998 का मामला
भले ही बिश्नोई समुदाय के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग विचार हों, लेकिन इतना स्पष्ट है कि टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हुई गोलीबारी के संदर्भ में सलमान खान का नाम सामने आने से 1998 का काला हिरण शिकार मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. लॉरेंस बिश्नोई गैंग एक बार फिर अपराध को अंजाम देकर उसे सांस्कृतिक आस्था और समुदाय की भावनाओं की आड़ में पेश करने की कोशिश करता दिखाई देता है.
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