- महाराष्ट्र MLC के 5 सीटों के चुनाव में महायुति गठबंधन को तीन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा.
- भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने हार का संज्ञान लिया है और प्रदेश अध्यक्ष सहित नेताओं से जवाब मांगा जाएगा.
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार की बैठक में हार के कारणों पर चर्चा होगी.
महाराष्ट्र में विधान परिषद की 5 सीटों पर हुए चुनाव के बाद सत्तारुढ़ महायुति गठबंधन में गजब की खलबली मची है. पांच सीटों पर हुए इस चुनाव में भाजपा, शिवसेना शिंदे गुट और सुनेत्रा पवार वाली एनसीपी एक साथ मिलकर चुनाव लड़ी. लेकिन तीनों दलों के साथ के बाद भी गठबंधन को तीन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. भाजपा प्रत्याशी को RSS के गढ़ नागपुर में भी हार झेलनी पड़ी. नागपुर सहित तीन सीटों पर महायुति गठबंधन को मिली हार के बाद एक-दूसरे से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने का आरोप-प्रत्यारोप लगाया जा रहा है. दूसरी ओर
बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी इस हार पर संज्ञान लिया है.
बीजेपी नेतृत्व ने हार का लिया संज्ञान
बीजेपी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विधान परिषद चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार की हार का केंद्रीय नेतृत्व ने संज्ञान लिया है. हार के पीछे महायुति का अंदरुनी विवाद जिम्मेदार है या पार्टी की गुटबाजी, इसके असली कारण तलाशे जाएंगे. इस लिए प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और चुनाव की जिम्मेदारी संभालने वाले अन्य नेताओं से हार का जवाब मांगा जाएगा.
सीएम और दोनों डिप्टी सीएम करेंगे बैठक
यह जानकारी भी सामने आई कि महायुति में बढ़ते तनाव और खींचतान के बीच जल्द ही 3 प्रमुख नेताओं की अहम बैठक होगी. बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार शामिल होंगी. महायुति में शामिल तीनों घटक दलों के नेताओं की बैठक में इस हार के कारणों को तलाशा जाएगा.
सूत्रों की माने तो इस बैठक में एमएलसी चुनाव में मिली हार के बाद महायुति में मचे घमासान और एक-दूसरे पर दोष मढ़ने के मुद्दे पर बातचीत होगी. गठबंधन के अंदर बढ़ते विवाद को सुलझाने और डैमेज कंट्रोल को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है.
अब जानिए महाराष्ट्र MLC चुनाव परिणाम पर महायुति में किसने क्या कहा?
बटेंगे तो कटेंगे... MLC चुनाव परिणाम पर बोले BJP मंत्री नितेश राणे
एमएलसी चुनाव परिणाम पर BJP के मंत्री नितेश राणे ने कहा, "अगर महायुति एक साथ मिलकर लड़ती तो चुनाव की तस्वीर अधिक स्पष्ट और बेहतर होती. महायुति ने विधानसभा में अपनी ताकत दिखाई थी, यह बात हमारे सहयोगी दलों को भी समझनी चाहिए. “एक हैं तो सेफ हैं... बटेंगे तो कटेंगे” यह बात एक बार फिर से साबित हो गई है. हमें यह जांच करनी होगी कि कहीं कोई “उद्धव प्रेमी” या मातोश्री का करीबी हमारी महायुति के अंदर रहकर तो काम नहीं कर रहा है."
नितेश राणे ने कांग्रेस की जीत का क्रेडिट कराले गुरुजी को दिया
मंत्री नितेश राणे ने कांग्रेस की जीत के लिए कराले गुरुजी के सेकेंड प्रेफरेंस वोटों को जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस कराले गुरुजी के सेकेंड प्रेफरेंस वोट के दम पर जीते हैं. कांग्रेस को कराले गुरुजी के पैर धोकर पानी पीना चाहिए. पूरे देश में कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली, राहुल गांधी बहुत हवा बना रहे थे, लेकिन अब उनकी पोल खुल गई.
बीजेपी को अपने 9000 वोट नहीं मिले, इसलिए हार हुई: उदय सामंत, शिंदे गुट मंत्री
एमएलसी चुनाव में मिली हार के बाद शिंदे गुट के मंत्री उदय सामंत ने कहा कि अगर शिवसेना, बीजेपी और एनसीपी मिलकर लड़ें, तो हमारी जीत पक्की. मैं शिवसेना का सैनिक, मेरा काम पार्टी विरोधी नहीं है. पुणे स्नातक क्षेत्र चुनाव पर उदय सामंत कि शंभूराज देसाई, प्रकाश अंबेडकर और हमने मिलकर स्मिता ताई जाधव का प्रचार किया था. उन्होंने यह भी कहा कि एकनाथ शिंदे की अनुमति मिली तो हम भी गृह मंत्री से मिलकर चर्चा करेंगे.
भाजपा प्रवक्ता ने कहा- सहयोगियों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से मिली हार
इससे पहले BJP महाराष्ट्र के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ कमल ने एक्स पर किए एक पोस्ट में शिवसेना से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की बात कही. नवनाथ कमल ने लिखा- शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में पुणे और नागपुर में सहयोगी दल होने के बावजूद शिवसेना ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया. पुणे में ऐन मौके पर सचिन सानप को समर्थन देकर शिवसेना ने महायुति की एकजुटता को ही झटका दिया.
उन्होंने आगे लिखा कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में शिवसेना को मिले वोट भाजपा को नहीं मिले. वहीं, छत्रपति संभाजीनगर में अब्दुल सत्तार ने तो सीधे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के खिलाफ प्रचार किया. इसका भी महायुति को नुकसान उठाना पड़ा.
'अगर गठबंधन धर्म का पालन होता तो पांचों सीटें जीतते'
भाजपा प्रक्ता ने आगे लिखा कि अगर शिवसेना ने महायुति के गठबंधन धर्म का पालन करते हुए भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का सहयोग किया होता, तो महायुति सभी पांचों सीटों पर जीत हासिल कर सकती थी. लेकिन पुणे की एक सीट हासिल करने की महत्वाकांक्षा में शिवसेना ने अपने सहयोगी दलों को मुश्किल में डाल दिया और तीन सीटों पर जीत का मौका गंवा दिया. एक सीट के लिए सहयोगी दलों को नुकसान पहुंचाने की रणनीति महायुति के हित में नहीं है.
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