जैसे आज लोग खूबसूरत दिखने के लिए मेकअप, स्किनकेयर और फैशन का सहारा लेते हैं, वैसे ही प्राचीन जापान में भी लोग अपने रूप-रंग को निखारने के लिए कई तरीके अपनाते थे. यामातो शासन के दौर में महिलाएं और पुरुष बालों को खास अंदाज में सजाते थे, सुंदर कपड़े पहनते थे, आभूषणों का इस्तेमाल करते थे और शरीर को सजाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते थे. हालांकि, उस समय कोई तय ब्यूटी रूटीन नहीं हुआ करता था. लोग अपनी उपलब्ध चीजों और परंपराओं के अनुसार खुद को संवारते थे. यही वजह है कि आज इतिहासकारों के लिए यह जानना आसान नहीं है कि उस दौर की महिलाओं का सौंदर्य निखारने का तरीका बिल्कुल कैसा था. फिर भी, यह साफ है कि हजारों साल पहले भी खूबसूरती और ग्रूमिंग लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा थी.
क्या था यामातो काल?
यामातो जापान के उस सांस्कृतिक और राजनीतिक दौर को कहा जाता है, जिसकी शुरुआत आज के नारा प्रीफेक्चर के यामातो क्षेत्र से हुई थी. इसी क्षेत्र में यामातो राज्य ने धीरे-धीरे अपनी सत्ता और पहचान स्थापित करनी शुरू की. जापान के प्राचीन फैशन, सुंदरता और लाइफस्टाइल को समझने के लिए इतिहासकार मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण कालखंडों का अध्ययन कर रहे हैं.
- कोफुन काल- लगभग तीसरी-चौथी शताब्दी से लेकर सातवीं शताब्दी तक का समय
- असुका काल- वर्ष 538 से 710 ईस्वी तक का दौर
चेहरे पर लाल रंग लगाना
पुराने समय में जापानी लोग सुंदरता बढ़ाने के लिए कई तरीके अपनाते थे, जिनमें से एक सबसे खास तरीका था चेहरे पर लाल रंग लगाना. कुछ म्यूजियम में ऐसी कई चीजें हैं जो इस बात की पुष्टि करती हैं कि युवा लड़कियों के चेहरे अक्सर लाल रंग से रंगे जाते थे. कुछ म्यूजियम इसे पांचवीं सदी का मानते हैं और कहते हैं कि हो सकता है कि वह लड़की कोई ओझा या कलाकार रही हो. यह बात दिलचस्प है, क्योंकि इससे पता चलता है कि चेहरे पर लाल रंग लगाना सिर्फ महिलाओं का मेकअप या ब्लश नहीं था, बल्कि एक प्रतीकात्मक और सामाजिक रस्म थी.
बालों की सजावट का था खास महत्व
प्राचीन जापान में बालों को संवारना सिर्फ खूबसूरती बढ़ाने का तरीका नहीं था, बल्कि यह व्यक्ति की पहचान का भी हिस्सा माना जाता था. हानिवा मूर्तियों में महिलाओं के कई तरह के हेयरस्टाइल देखने को मिलते हैं. कुछ मूर्तियों में बालों को आकर्षक तरीके से बांधा गया है. पांचवीं शताब्दी की एक महिला आकृति में बालों को गोल लूप्स के रूप में सजाया गया है और उसके गले में मोतियों का हार भी दिखाई देता है. इतिहासकारों का मानना है कि ऐसे हेयरस्टाइल और गहने किसी व्यक्ति की सामाजिक पहचान, पेशे या धार्मिक भूमिका को भी दर्शा सकते थे यानी उस समय बालों की सजावट केवल फैशन नहीं, बल्कि खुद को व्यक्त करने का एक तरीका भी थी.
पारंपरिक फेशियल मसाज
जापान में त्वचा की बनावट को सही रखने के लिए केवल उत्पाद लगाना काफी नहीं माना जाता, बल्कि मसाज को सबसे जरूरी हिस्सा माना जाता है. चेहरे पर तेल या लोशन लगाते समय उंगलियों से ऊपर की ओर खास तकनीकों से मालिश की जाती थी. इससे चेहरे का रक्त संचार बढ़ता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और ढीली त्वचा में कसाव आता है.
अजुकी बीन्स
प्राकृतिक रूप से डेड स्किन हटाने के लिए जापानी महिलाएं सदियों से अजुकी बीन्स का इस्तेमाल कर रही हैं. अजुकी बीन्स को सुखाकर बारीक पीस लिया जाता था. फिर इस पाउडर में थोड़ा पानी मिलाकर चेहरे को हल्के हाथों से स्क्रब किया जाता था. इसमें मौजूद प्राकृतिक एंजाइम बिना त्वचा को नुकसान पहुंचाए ब्लैकहेड्स साफ करते हैं और रोमछिद्रों को गहराई से साफ करते हैं.
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