हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़े-लिखे और खूब समझदार बने. इसके लिए वे अच्छे से अच्छा स्कूल ढूंढते हैं. लेकिन ज्यादातर पेरेंट्स इस सवाल को लेकर कंफ्यूज रहते हैं कि बच्चे को किस उम्र से स्कूल भेजना चाहिए. क्या 2 साल की उम्र में स्कूल भेज देना चाहिए या 3-4 साल तक इंतजार करना बेहतर है? अगर आपके मन में भी ये सवाल है, तो आइए एक्सपर्ट से जानते हैं इसका जवाब-
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
इसे लेकर फेमस पीडियाट्रिशियन सैयद मुजाहिद हुसैन ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में बच्चों के डॉक्टर कहते हैं, सबसे पहले माता-पिता को प्री-स्कूल और क्लास 1 के बीच का अंतर समझना चाहिए. दोनों एक ही चीज नहीं हैं. National Education Policy यानी NEP 2020 के अनुसार, बच्चे की फाउंडेशनल स्टेज 3 साल से 8 साल की उम्र तक होती है. इसमें बच्चे के 3 साल प्री-स्कूल के होते हैं. इसके बाद क्लास 1 और क्लास 2 आते हैं.
डॉक्टर के मुताबिक, बच्चे को करीब 3 साल की उम्र में प्ले-बेस्ड प्री-स्कूल भेजा जा सकता है. यहां बच्चा पढ़ाई से नहीं, बल्कि खेल-खेल में और अलग-अलग एक्टविटीज के चीजें सीखता है.
2 साल के बच्चे पर पढ़ाई का दबाव न डालेंडॉक्टर कहते हैं, कई पेरेंट्स बच्चे के 2 साल का होते ही उसे स्कूल भेजने का प्लान करने लगते हैं. ऐसा करने से बचें. 2 साल के बच्चे को फॉर्मल पढ़ाई के लिए जल्दी स्कूल भेजने की जरूरत नहीं है. इस उम्र में बच्चा खेलकर, परिवार के साथ रहकर और आसपास की चीजों को देखकर बहुत कुछ सीखता है. खासकर सिर्फ इसलिए बच्चे को जल्दी स्कूल न भेजें कि दूसरे बच्चों ने स्कूल जाना शुरू कर दिया है.
किस उम्र से शुरू करें स्कूली पढ़ाई?पीडियाट्रिशियन कहते हैं, क्लास 1 के लिए राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था में करीब 6 साल की उम्र को ध्यान में रखा गया है. यानी बच्चे के 3 साल के प्री-स्कूल या फाउंडेशनल सीखने के बाद वह लगभग 6 साल की उम्र में क्लास 1 में जा सकता है.
स्कूल जाने के लिए बच्चे का तैयार होना भी जरूरीडॉक्टर कहते हैं कि सिर्फ बच्चे की उम्र देखकर स्कूल भेजना सही नहीं है. यह देखना भी जरूरी है कि वो स्कूल जाने के लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार है या नहीं. अगर बच्चा-
- माता-पिता से अलग रह सके.
- अपनी जरूरत खुद बता सके.
- दूसरे बच्चों के साथ खेल सके, बातचीत कर सके.
- खाना खाने और टॉयलेट जैसी छोटी-छोटी चीजें खुद करने की कोशिश कर सके, तब आप उसे स्कूल भेजने के बारे में सोच सकते हैं.
इन सब से अलग डॉक्टर माता-पिता को सलाह देते हैं कि कभी भी अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से बिल्कुल न करें. अगर पड़ोस का बच्चा 2 या 3 साल की उम्र में स्कूल जाने लगा है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपका बच्चा भी उसी उम्र में स्कूल जाए. जल्दी स्कूल शुरू करने का यह मतलब नहीं है कि बच्चा जल्दी समझदार होगा. बच्चे को अपनी उम्र और विकास के हिसाब से सीखने का समय देना ज्यादा जरूरी है. बच्चे की जिंदगी के पहले 2 से 3 साल में घर ही उसका सबसे अच्छा स्कूल होता है. इस दौरान माता-पिता और दादा-दादी मिलकर उसे चीजें सिखाएं. जब बच्चा उम्र के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक रूप से भी तैयार हो, तभी स्कूल भेजना उसके लिए सबसे अच्छा होता है.
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