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आपकी 5 आदतें जो बच्चे को आगे बढ़ने से रोक सकती हैं, जानिए लॉनमोवर पेरेंटिंग क्या है?

लॉनमावर पेरेंटिंग नाम उस लॉनमावर मशीन से लिया गया है, जो अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को काटकर रास्ता साफ कर देती है. इसी तरह ऐसे माता-पिता अपने बच्चों के सामने आने वाली हर मुश्किल को पहले ही दूर करने की कोशिश करते हैं.

आपकी 5 आदतें जो बच्चे को आगे बढ़ने से रोक सकती हैं, जानिए लॉनमोवर पेरेंटिंग क्या है?
लॉनमोवर पेरेंटिंग क्या है?
file photo

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा किसी परेशानी में न पड़े. होमवर्क भूल जाए, दोस्त से झगड़ा हो जाए, टीचर से दिक्कत हो या पेपर में कम नंबर आ जाएं, ऐसे समय में माता-पिता का मन करता है कि वे तुरंत आगे बढ़कर समस्या सुलझा दें, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चे की हर परेशानी को खुद हल करना, उसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने से दूर कर सकता है. इसी आदत को लॉनमावर पेरेंटिंग (Lawnmower Parenting) कहलाती है, जिसमें माता-पिता बच्चे के रास्ते में आने वाली हर मुश्किल को पहले ही दूर करने की कोशिश करते हैं. इससे बच्चे को असफलताओं और चुनौतियों से सीखने का मौका नहीं मिल पाता.

लॉनमावर पेरेंटिंग क्या है?

लॉनमावर पेरेंटिंग नाम उस लॉनमावर मशीन से लिया गया है, जो अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को काटकर रास्ता साफ कर देती है. इसी तरह ऐसे माता-पिता अपने बच्चों के सामने आने वाली हर मुश्किल को पहले ही दूर करने की कोशिश करते हैं. पेरेंटिंग में इसका मतलब है कि बच्चे को खुद किसी परेशानी, असफलता, विवाद या उसके रिजल्ट का सामना करने का मौका मिलने से पहले ही माता-पिता बीच में दखल दे देते हैं. जिस तरह एक लॉनमोवर यानी घास काटने वाली मशीन रास्ते में आने वाली जंगली घास और बाधाओं को साफ करते हुए चलती है, ठीक उसी तरह ये माता-पिता भी बच्चे के संघर्ष करने से पहले ही उसके रास्ते को पूरी तरह आसान बना देते हैं. इसे प्रैम पेरेंटिंग या बुलडोजर पेरेंटिंग भी कहा जाता है.

आप बच्चे की समस्या खुद सुलझाने लगें

बच्चे का किसी दोस्त से झगड़ा हो गया. ऐसे में अगर आप तुरंत दूसरे बच्चे के माता-पिता से बात करने लगें या होमवर्क और प्रोजेक्ट में उसकी जगह खुद काम करने लगें, तो यह लॉनमावर पेरेंटिंग का संकेत हो सकता है. बच्चे को पहले खुद समस्या सुलझाने का मौका देना चाहिए.

आप बच्चे को असफल होते नहीं देख पाते

कम नंबर आना, कोई काम समय पर पूरा न कर पाना या कोई जरूरी चीज भूल जाना बच्चों के लिए सीखने का हिस्सा है, लेकिन अगर आप हर बार उन्हें ऐसी परिस्थितियों से बचाने की कोशिश करते हैं, तो वे अपनी गलतियों से सीख नहीं पाते.

हमेशा बच्चे की तरफ से बोलना

बच्चे का साथ देना अच्छी बात है, लेकिन हर छोटी-बड़ी समस्या में उसकी जगह खुद बोलना सही नहीं है. अगर, बच्चा अपनी बात खुद रखने में सक्षम है, तो उसे यह अवसर देना चाहिए. इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह अपनी समस्याओं का सामना करना सीखता है.

बच्चे को हर समय बचाने की कोशिश करना

हर परेशानी में माता-पिता का दखल देना जरूरी नहीं होता. कभी-कभी बच्चा खेल में हार जाता है, दोस्तों से मतभेद हो जाता है, खुद को अकेला महसूस करता है या कोई नई चीज सीखते समय निराश हो जाता है. ये अनुभव भले ही कठिन लगें, लेकिन यही उसे मजबूत और समझदार बनाते हैं.

वह काम भी खुद कर देते हैं जो बच्चा कर सकता है

माता-पिता कोई काम बच्चे से बेहतर या जल्दी कर सकते हैं. असली बात यह है कि क्या बच्चा उस काम को खुद करने के लिए तैयार है. अगर, बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से कोई काम कर सकता है, तो उसे कोशिश करने का मौका देना चाहिए.

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