फिल्म '3 इडियट्स' तो लगभग सभी ने देखी होगी. '3 इडियट्स' फिल्म के आखिर में सभी ने लद्दाख में आमिर खान यानी रैंचो के अनोखे स्कूल को देखा, तो कई लोगों को लगा कि शायद ऐसा स्कूल सिर्फ फिल्म की कहानी का हिस्सा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह स्कूल असल में मौजूद है और यहां जाया भी जा सकता है. फिल्म रिलीज होने के कई साल बाद भी लेह-लद्दाख घूमने आने वाले पर्यटक इस जगह को देखने जरूर पहुंचते हैं. लोग इसे आमतौर पर "रैंचो स्कूल" या "3 इडियट्स स्कूल" के नाम से जानते हैं. हालांकि, फिल्म ने इस स्कूल को पहचान दिलाई, लेकिन इसकी अपनी एक प्रेरणादायक कहानी है, जो बॉलीवुड की चमक-दमक से कहीं आगे बढ़कर है.
रैंचो स्कूल की असली कहानी
जिस जगह को लोग "रैंचो स्कूल" के नाम से जानते हैं, उसका असली नाम ड्रुक व्हाइट लोटस स्कूल (Druk White Lotus School) है, जिसे आधिकारिक तौर पर ड्रुक पद्मा कारपो स्कूल कहा जाता है. यह स्कूल लेह से करीब 15 किलोमीटर दूर शेय गांव में स्थित है. फिल्म 3 इडियट्स के क्लाइमेक्स में यही स्कूल दिखाया गया था, जिसके बाद यह देश-विदेश में बहुत प्रसिद्ध हो गया है. इस स्कूल की स्थापना लद्दाख के बच्चों को अच्छी और आधुनिक शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी. इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि बच्चे अपनी स्थानीय संस्कृति और तिब्बती बौद्ध परंपराओं से जुड़े रहें. स्कूल का मकसद केवल पढ़ाई कराना नहीं था, बल्कि ऐसी शिक्षा देना था जो 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप हो और साथ ही लद्दाख की सांस्कृतिक पहचान को भी बनाए रखे.
क्या है स्कूल की खासियत
ड्रुक व्हाइट लोटस स्कूल अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपनी खास वास्तुकला यानी आर्किटेक्चर के लिए भी जाना जाता है. लद्दाख में सर्दियों के दौरान बेहद ठंड पड़ती है और मौसम काफी चुनौतीपूर्ण रहता है. इसे ध्यान में रखते हुए स्कूल की इमारतों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे स्थानीय मौसम के अनुकूल रहें. स्कूल में सोलर हीटिंग, प्राकृतिक इन्सुलेशन और जलवायु के अनुसार बनाई गई इमारतों जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किया गया है. यही कारण है कि इसके पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल चुकी है.
दिलचस्प बात यह है कि साल 2010 में लेह में बादल फटने के बाद अभिनेता आमिर खान भी इस स्कूल पहुंचे थे. उस आपदा से इलाके में काफी नुकसान हुआ था और आमिर खान ने स्कूल का दौरा कर वहां के लोगों का हौसला बढ़ाया था. यह स्कूल लेह-मनाली हाईवे पर स्थित है, इसलिए लेह घूमने आने वाले पर्यटक इसे आसानी से अपनी साइटसीइंग लिस्ट में शामिल कर सकते हैं. खूबसूरत पहाड़ों के बीच स्थित यह स्कूल आज सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि 3 इडियट्स के प्रशंसकों और यात्रियों के लिए भी एक खास बन चुका है.
रैंचो स्कूल घूमने जाएं तो क्या-क्या देखें?
रैंचो स्कूल की सैर में आमतौर पर करीब एक घंटा लगता है. यहां पहुंचकर सबसे पहले लोग उस मशहूर दीवार को देखने जाते हैं, जिस पर फिल्म 3 इडियट्स के चर्चित "चतुर और इलेक्ट्रिक शॉक" वाले सीन की पेंटिंग बनी हुई है. इसे आज "रैंचो वॉल" के नाम से जाना जाता है. यहां लोग फिल्म के पसंदीदा सीन दोहराते हैं और ढेर सारी तस्वीरें खिंचवाते हैं. हालांकि, ज्यादातर लोग फिल्म से जुड़ी जगह देखने आते हैं, लेकिन स्कूल के पूरे परिसर में घूमना भी एक शानदार अनुभव हो सकता है. यहां की खूबसूरत इमारतें, खुले मैदान और चारों ओर दिखाई देने वाले पहाड़ों के नजारे ध्यान खींच लेते हैं.
स्कूल की बाउंड्री वॉल पर भी 3 इडियट्स के कई किरदारों और सीन से जुड़ी दिलचस्प ग्रैफिटी बनी हुई है, जो पर्यटकों को खूब पसंद आती है. परिसर के अंदर "रैंचोज कैफे" भी है, जहां आप थोड़ा आराम कर सकते हैं और मैगी, मोमोज जैसे हल्के स्नैक्स का स्वाद ले सकते हैं. अगर आपके पास समय हो तो रैंचो स्कूल के साथ-साथ आसपास मौजूद शेय पैलेस, थिकसे मॉनेस्ट्री और स्टोक जैसी प्रसिद्ध जगहों की सैर भी कर सकते हैं.
रैंचो स्कूल कैसे पहुंचें?
ड्रुक व्हाइट लोटस स्कूल, लद्दाख के शेय गांव में स्थित है और यह लेह शहर से लगभग 20 से 30 मिनट की दूरी पर है. यहां पहुंचने के लिए आप टैक्सी किराए पर ले सकते हैं, स्कूटर रेंट कर सकते हैं या इसे अपने लोकल साइटसीइंग प्लान में शामिल कर सकते हैं. यहां घूमने का सबसे अच्छा समय मई से सितंबर के बीच माना जाता है. इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और सड़कें भी खुली रहती हैं. स्कूल आमतौर पर सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है और यहां प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं लगता.
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