रिश्तों में कभी-कभी बहस और लड़ाई-झगड़ा होना आम बात है, लेकिन कई बार झगड़ा सिर्फ उस बात को लेकर नहीं होता जिस पर बहस हुई थी, बल्कि उसके बाद रिश्ते में पैदा हुई दूरी और शक ज्यादा परेशान करने लगते हैं. कई बार ऐसा हो सकता है कि बहस के दौरान आपसे कुछ ऐसी बातें निकल गई हों, जिनका आपको बाद में पछतावा हुआ हो. शायद आपने गुस्से में बात करना बंद कर दिया हो या स्थिति को सही तरीके से संभाल नहीं पाए हों. झगड़ा खत्म होने के बाद भी उसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है. आप सोचते हैं कि कहीं आपका पार्टनर अब भी नाराज तो नहीं और हो सकता है वह भी आपके बारे में यही सोच रहा हो, लेकिन रिश्तों को दोबारा मजबूत बनाने के लिए सिर्फ सॉरी कह देना या जो हुआ उसे भूल जाओ कहना काफी नहीं होता. अगर आप लड़ाई के बाद रिश्ते में भरोसा फिर से बनाना चाहते हैं, तो ये 5 आसान तरीके आपकी मदद कर सकते हैं.
अपनी गलती की जिम्मेदारी लें और दिल से माफी मांगें
मुझे दुख है कि तुम्हें बुरा लगा और मुझे माफ करना, मुझे तुमसे इस तरह बात नहीं करनी चाहिए थी में बड़ा फर्क होता है. पहला वाक्य ऐसा लग सकता है जैसे आप सिर्फ सामने वाले की भावनाओं पर बात कर रहे हैं, जबकि दूसरा यह दिखाता है कि आप अपनी गलती स्वीकार कर रहे हैं. सच्ची माफी के लिए लंबे-चौड़े भाषण की जरूरत नहीं होती. कई बार एक नॉर्मल और ईमानदारी से माफी भी बहुत होती है. जैसे- मैं गुस्से में था, लेकिन मुझे तुमसे इस तरह बात नहीं करनी चाहिए थी.
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पार्टनर को थोड़ा समय और स्पेस दें
झगड़े के बाद अक्सर मन करता है कि सब कुछ तुरंत ठीक हो जाए. ऐसे में लोग बार-बार मैसेज, कॉल या सफाई देने लगते हैं और बार-बार पूछते रहते हैं, लेकिन कई बार सामने वाले को अपनी भावनाओं को शांत करने और सोचने के लिए थोड़ा समय चाहिए होता है. स्पेस देने का मतलब यह नहीं है कि आप उन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं या कोई खेल खेल रहे हैं. इसका मतलब सिर्फ इतना है कि आप स्थिति को समझदारी से संभाल रहे हैं और भावनाओं को शांत होने का मौका दे रहे हैं.
झगड़े की असली वजह को समझें
सिर्फ यह कह देना अब दोबारा ऐसा नहीं करेंगे काफी नहीं होता. जरूरी यह है कि आप समझें कि बहस की जड़ क्या थी. क्या आपके पार्टनर को लग रहा था कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही. क्या किसी पुरानी बात ने उन्हें परेशान कर दिया या फिर एक छोटी सी समस्या इसलिए बड़ी बन गई क्योंकि दोनों में से किसी ने भी दूसरे की भावनाओं को नहीं समझा. ऐसी बातचीत का मकसद यह तय करना नहीं होना चाहिए कि सही कौन था और गलत कौन, बल्कि यह समझना चाहिए कि अगली बार ऐसी स्थिति आने पर दोनों क्या बेहतर कर सकते हैं.
सिर्फ बातें नहीं, अपने व्यवहार से भी भरोसा दिखाएं
भरोसा एक बातचीत या एक माफी से वापस नहीं आता. यह धीरे-धीरे आपके डेली के व्यवहार से दोबारा बनता है. अगर आपने कहा है कि आगे से किसी बात को अलग तरीके से संभालेंगे, तो उसे अपने कामों से साबित भी करें. वही गलती बार-बार न दोहराएं, मुश्किल समय में चुप होकर दूर जाने के बजाय खुलकर बात करें और अपने वादों को निभाएं. झगड़े के बाद लोग अक्सर यह देखते हैं कि सामने वाला आगे क्या करता है. वे आपको परखने की कोशिश नहीं कर रहे होते, बल्कि यह समझना चाहते हैं कि आपकी माफी और वादे कितने सच्चे थे. लगातार अच्छे व्यवहार और ईमानदारी से ही भरोसा मजबूत होता है.
हर बार पुराने झगड़े को बीच में न लाएं
जब किसी मुद्दे पर बात हो जाए, माफी मांग ली जाए और आगे बढ़ने का फैसला हो जाए, तो हर नई बहस में उसी पुराने झगड़े को दोहराना सही नहीं होता. इसका मतलब यह नहीं है कि जो हुआ उसे पूरी तरह भूल जाएं. अगर कोई बात अब भी अनसुलझी है, तो उस पर शांत तरीके से बात की जा सकती है, लेकिन अगर दोनों अपनी गलती समझ चुके हैं और आगे बढ़ना चाहते हैं, तो बार-बार पुरानी बातों को उठाने से रिश्ते में घाव भरने के बजाय और गहरे हो सकते हैं.
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