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क्या मोबाइल बच्चों का फोकस छीन रहा है? श्री श्री रविशंकर ने बताया कैसे करें बच्चों की परवरिश

डिजिटल और टेक्नोलॉजी के दौर में बच्चों की पढ़ाई भी फोन पर होने लगी है, जिसके चलते बच्चे ज्यादा स्क्रीन देखने लगे हैं. ऐसे में श्री श्री रविशंकर ने बताया कि आज के डिजिटल दौर में बच्चों की परवरिश कैसे करें.

क्या मोबाइल बच्चों का फोकस छीन रहा है? श्री श्री रविशंकर ने बताया कैसे करें बच्चों की परवरिश
बच्चों की परवरिश कैसे करें?

आज के समय में बच्चों की लाइफ मोबाइल, इंटरनेट और गेम्स के आसपास ही घूम रही है. डिजिटल और टेक्नोलॉजी के दौर में बच्चों की पढ़ाई भी फोन पर होने लगी है, जिसके चलते बच्चे ज्यादा स्क्रीन देखने लगे हैं. इससे बच्चों की नींद, फिजिकल एक्टिविटी और मेंटल हेल्थ पर भी असर पड़ रहा है. आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक और धर्म गुरु श्री श्री रविशंकर ने अपने यूट्यूब पर एक वीडियो शेयर की है, जिसमें उन्होंने बताया कि आज के डिजिटल दौर में बच्चों की परवरिश कैसे करें.

श्री श्री रविशंकर के मुताबिक, आज के समय में माता-पिता बच्चों को सही तरह से टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिखाएं. उन्होंने बताया कि अच्छी परवरिश का मतलब सिर्फ बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखना नहीं, बल्कि उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना भी है.

बच्चों को प्यार से समझाएं

श्री श्री रविशंकर के मुताबिक, अगर कोई बच्चा पढ़ाई, खेलकूद, कला या मेडिटेशन में इंटरेस्ट नहीं दिखा रहा है, तो उसे छोड़ देना समाधान नहीं है. ऐसे में बच्चों की सही दिशा दिखाना जरूरी है. बच्चों का मार्गदर्शन करना जरूरी है. उन्होंने अपनी वीडियो में बताया कि बच्चों को प्यार से समझाएं. अगर, लगाम बहुत कस दी जाए तो परेशानी होगी और बहुत ढीली छोड़ दी जाए तो भी नुकसान होगा.

डांट लगाना भी चाहिए

अगर, बच्चा बार-बार चीजें गलत करता है या फिर बात नहीं मानता तो डांटना चाहिए. उनके अनुसार बच्चों को डांटना गलत नहीं है, लेकिन डांट का कोई पॉजिटिव रिजल्ट निकलना चाहिए. अगर, किसी व्यवहार को सुधारने के लिए डांटा जा रहा है, तो उसका उद्देश्य बच्चे को सही दिशा देना होना चाहिए, न कि केवल गुस्सा निकालना.

बच्चे का स्क्रीन टाइम तय करें

अगर, बच्चा दिनभर मोबाइल या टीवी देख रहा है तो ऐसे में बच्चों के मोबाइल और टीवी देखने का समय तय करें. पढ़ाई और मनोरंजन के बीच संतुलन रखें. बच्चों को बाहर खेलने और परिवार के साथ समय बिताने के लिए भी प्रेरित करें. अगर, आप शुरू से बच्चे को साफ करते हैं कि उसे मोबाइल देखने के लिए एक समय मिलेगा, तो वो कभी ज्यादा मोबाइल देखने के लिए जिद्द नहीं करेगा.

बच्चे को जिम्मेदारी समझाएं

अगर बच्चा घर के अंदर दौड़ रहा है तो सिर्फ भागो मत कहने के बजाय बच्चे को समझाएं कि घर के अंदर धीरे चलो, ताकि चोट न लगे. ऐसे में बच्चे को ऐसा भी नहीं लगेगा कि उस पर रोक-टोंक लगाई जा रही है.

सोने और जागने की आदत

माता-पिता को अपने सोने और जागने की आदत का ध्यान रखना चाहिए. बच्चे देखेंगे कि उनके मम्मी-पापा हर दिन एक ही समय पर सोते हैं और सुबह उठते हैं, तो वे भी इस आदत को सीखेंगे. आगे चलकर बच्चा भी समय पर सोएगा और सुबह समय पर उठेगा.

बच्चे को परेशानी का हल खुद न निकालें

बच्चों को छोटी-मोटी मुश्किलों का सामना खुद करने दें. जब बच्चा खुद किसी समस्या का समाधान निकालता है, तो उसका खुद पर भरोसा मजबूत होता है. इससे वे समस्याओं को समझना, फैसले लेना और असफलताओं से सीखना सीखते हैं.

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