
- अनिता शर्मा
बीते साल की बात है. मुझे बैंगलोर से दिल्ली लौटना था. दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) की फ्लाइट्स देखीं तो किराया 12 हजार से कम नहीं था. वहीं हिंडन वाली फ्लाइट सिर्फ 6 हजार में मिल रही थी. मैंने भी सीधा सा गणित लगाया कि हिंडन से करोल बाग तक कैब का 600-700 रुपये ही तो लगेगा, फिर भी अच्छे-खासे पैसे बच जाएंगे.
इसे फायदे का सौदा समझकर मैंने खुशी-खुशी फ्लाइट बुक कर ली. पर मुझे क्या पता था कि चंद पैसे बचाने की ये जिद मेरे लिए एक डरावना ख्वाब बन जाएगी.
यह मेरा कितना गलत फैसला था, इसका अहसास मुझे तब हुआ जब भूख से पेट में मरोड़ उठने लगी. मैं भूखे पेट ही निकली थी, फ्लाइट में बस एक कप कॉफी पीकर खुद को तसल्ली दी कि बस उतरते ही कुछ अच्छा सा खा लूंगी. लेकिन हिंडन पर उतरते ही जो आफत शुरू हुई, उसे बयां करने के लिए शब्द कम हैं.

सस्ती फ्लाइट पड़ी भारी! हिंडन एयरपोर्ट का डरावना अनुभव
आसमान में वो एक घंटा... और तोड़ देने वाला इंतजार
हमारा विमान करीब एक घंटे तक आसमान में ही चक्कर काटता रहा, क्योंकि नीचे लैंड करने की जगह ही नहीं थी. इस एयरपोर्ट के नियम ही कुछ ऐसे हैं कि एक समय में सिर्फ कुछ तय संख्या में ही प्लेन वहां लैंड या पार्क हो सकते हैं.
अब चूंकि वहां पहले से ही विमान खड़े थे, तो हमारे प्लेन को आसमान में ही उड़ते रहने को कहा गया. भूख और थकान के बीच आसमान में बीता वो एक घंटा किसी सजा से कम नहीं था.

hindon airport reviews.
जैसे-तैसे लैंड हुए तो फिर 20 मिनट का एक और सब्र तोड़ने वाला इंतजार सामने आ गया.
पता चला कि वहां किसी दूसरे प्लेन की बोर्डिंग चल रही थी. नियम के मुताबिक, वहां एक बार में या तो बोर्डिंग हो सकती है या डी-बोर्डिंग.
अब चूंकि दूसरे प्लेन के यात्री चढ़ रहे थे, इसलिए हमें अंदर ही बंधक बनकर बैठना पड़ा.
सोचा था एकाथ फोटो उठाउंगी, तो वहां फोटो लेना भी मना है क्योंकि वह एक एयरफोर्स बेस है.
सन्नाटा, अंधेरा और वो अकेलापन
थकी-हारी जब बाहर निकली तो भूख से बुरा हाल था. सोचा था कुछ खा लूंगी, लेकिन वहां कोई कैंटीन तक नहीं दिखी. हिम्मत जुटाकर सोचा कि एयरपोर्ट से बाहर निकलकर कुछ खाती हूं और वहीं से कैब कर लूंगी.
लेकिन बाहर कदम रखते ही जो मंजर देखा, उसने अंदर तक डरा दिया. माहौल एकदम अजीब और असुरक्षित सा लग रहा था.
बाहर चाय की एक छोटी सी गुमटी थी, जिस तक पहुंचने के लिए भारी-भरकम सामान के साथ एक गंदे नाले को पार करना था. वहां कुछ स्थानीय लोग बैठकर सिगरेट के धुएं उड़ा रहे थे और चाय पी रहे थे. उस पूरे सन्नाटे में दूर-दूर तक कोई दूसरी महिला नजर नहीं आ रही थी. घबराहट में मैंने कदम पीछे खींच लिए.
न कैब मिली, न फोन ने साथ दिया
तय किया कि अब सीधा घर जाकर ही पानी पिऊंगी, पहले कैब ढूंढती हूं. लेकिन बदकिस्मती ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा. आधे घंटे तक ऐप पर कोई कैब बुक ही नहीं हुई. बाहर खड़े कुछ कैब वाले आए जरूर, पर करोल बाग का नाम सुनकर मुंह फेरकर चले गए. एक अकेली लड़की, रात का वक्त और ऐसा बर्ताव... सचमुच रोना आ रहा था.
काफी मिन्नतें और मशक्कत करने के बाद आखिरकार एक कैब मिली. लेकिन राहत की सांस लेती, उससे पहले ही ड्राइवर ने गाड़ी को न जाने किन अनजान और संकरी गलियों में डाल दिया और हम एक भयंकर जाम में फंस गए. हिलने तक की जगह नहीं थी, हम करीब एक घंटे तक एक ही जगह खड़े रहे. जब रोनी सूरत बनाकर मैंने पूछा, तो ड्राइवर भैया ने बेरुखी से कहा, "इस समय दफ्तर छूटने का टाइम है, यहां ऐसा ही जाम मिलता है."
उसी वक्त रही-सही कसर फोन की बैटरी ने पूरी कर दी. मोबाइल बंद होने ही वाला था. बंद होने से ठीक पहले मैंने कांपते हाथों से घर वालों को बस एक मैसेज और कॉल किया कि "जाम में फंसी हूं, किसी तरह आ रही हूं, चिंता मत करना." फोन ब्लैकआउट हो गया और मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा.

मेरा फोन भी गलत समय में ऑफ हो गया.
रात के 11 बजे, जब मैं पूरी तरह टूट चुकी थी, थक-हारकर, भूखे पेट रोते हुए घर पहुंची. उस वक्त मैंने हाथ जोड़कर खुद से एक कसम खाई, अब भले ही जेब से 2-4 हजार रुपये ज्यादा लग जाएं, लेकिन तौबा है... जिंदगी में कभी भूलकर भी हिंडन एयरपोर्ट का रुख नहीं करूंगी.
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हिंडन एयरपोर्ट जाने से पहले ये बातें ज़रूर जान लें. यहां रात में पहुंचने से बचें और पहले से कैब की उपलब्धता चेक करें. ध्यान रहे कि खाने-पीने का इंतजाम साथ रखें और हां, फोन पूरी तरह चार्ज रखें. अगर आप महिला हैं और अकेले यात्रा कर रही हैं तो ज़्यादा सावधानी रखें.
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