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नीम करोली बाबा कैंची धाम कैसे पहुंचे? नीम करोली बाबा का नाम कैसे पड़ा, जानिए यहां

बाबा नीम करोली को हनुमान जी का भक्त माना जाता है. बाबा नीम करोली ने लोगों को सेवा, प्रेम और भक्ति का संदेश दिया था. यहां जानिए नीम करोली बाबा का नाम कैसे पड़ा और नीम करोली बाबा के कैंची धाम कैसे पहुंचे?

नीम करोली बाबा कैंची धाम कैसे पहुंचे? नीम करोली बाबा का नाम कैसे पड़ा, जानिए यहां
नीम करोली बाबा और कैंची धाम

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले स्थित अकबरपुर में साल 1900 में जन्मे नीम करोली बाबा का असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था. उन्होंने 17 साल की उम्र में ज्ञान प्राप्त कर ली थी, जिसके बाद उन्होंने संन्यास ले लिया. हनुमान जी के अवतार माने जाने वाले नीम करोली बाबा ने 11 सितंबर, 1973 को उत्तर प्रदेश के वृंदावन में समाधि ली थी. बाबा नीम करोली को हनुमान जी का भक्त माना जाता है. नीम करोली बाबा का कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और प्रार्थना के लिए पहुंचते हैं. कैंची धाम पहाड़ों के बीच शांत और सुंदर जगह पर बना है. मान्यता है कि बाबा नीम करोली ने लोगों को सेवा, प्रेम और भक्ति का संदेश दिया था. चलिए आपको बताते हैं नीम करोली बाबा का नाम कैसे पड़ा और नीम करोली बाबा के कैंची धाम कैसे पहुंचे?

नीम करोली बाबा नाम कैसे पड़ा?

बाबा का मूल नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा है. नीम करोली बाबा नाम के पीछे एक प्रसिद्ध कथा जुड़ी है. बताया जाता है कि एक बार बाबा ट्रेन में बिना टिकट यात्रा कर रहे थे. टिकट न होने पर उन्हें ट्रेन से उतार दिया गया. इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी. लोगों के अनुरोध पर बाबा को वापस ट्रेन में बैठाया गया और ट्रेन चल पड़ी. इसी घटना से जुड़ी मान्यता के कारण उन्हें ‘नीम करोली' नाम से जाना जाने लगा. नीम करोली बाबा हमेशा कंबल ओढ़ा करते थे, इसलिए श्रद्धालु उन्हें आज भी कंबल चढ़ाते हैं. रिचर्ड एलपर्ट (रामदास) की किताब ‘मिरेकल ऑफ लव' में नीम करोली बाबा के चमत्कारों का जिक्र है, जिसमें ‘बुलेटप्रूफ कंबल' नाम से एक घटना का भी उल्लेख है.

बाबा नीम करोली सादा जीवन के लिए याद किए जाते थे और उन्होंने हमेशा लोगों को अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित किया. साल 1958 में बाबा ने अपना घरबार त्याग दिया और पूरे उत्तर भारत का भ्रमण किया. वे अलग-अलग नाम लक्ष्मण दास, हांडी वाले बाबा और तिकोनिया वाले बाबा से जाने जाते थे. बाबा ने गुजरात के ववानिया मोरबी में तपस्या की, जहां वे तलईया बाबा के नाम से प्रसिद्ध थे.

कैंची धाम कैसे पहुंचे?

कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है. यहां पहुंचने के लिए सबसे पहले काठगोदाम पहुंच सकते हैं. काठगोदाम रेलवे स्टेशन से सड़क मार्ग के जरिए कैंची धाम जाना आसान रहता है. काठगोदाम से कैंची धाम की दूरी करीब 40-45 किलोमीटर है. इसके अलावा अगर आप हवाई यात्रा से यहां जाना चाहते हैं तो पंतनगर एयरपोर्ट एक ऑप्शन है. एयरपोर्ट से आगे सड़क मार्ग से कैंची धाम पहुंचा जा सकता है. दिल्ली और आसपास के शहरों से लोग आमतौर पर बस, ट्रेन या कार से यहां जाते हैं.

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