Mobile Addiction: सोशल मीडिया का इस्तेमाल आज के समय बच्चों और युवाओं के लिए खतरनाक बनता जा रहा है. हाल ही में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ऐसा ही मामला है आया था. जहां ऑनलाइन गेम की लत में तीन बहनों ने खुदकुशी कर ली. उसके बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मोबाइल गेम की लत ने एक मासूम की जिंदगी छीन ली. इस घटना से हर कोई सोच में पड़ गया है कि मोबाइल गेम की लत ने कैसे छात्र को खुदकुशी करने के लिए मजबूर कर दिया. ऐसे एक दो नहीं बल्कि, अनगिनत केस हैं, जो आपकी रूह को हिला कर रख देंगे. लेकिन क्या सच में इसमें बच्चों की गलती है या फिर गेम और सोशल मीडिया को ऐसे डिजाइन ही क्या जाता है कि बच्चों और युवा इसमें ज्यादा से ज्यादा समय दें.
क्या इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे ऐप्स को जानबूझकर ऐसा बनाया गया है कि बच्चों और युवाओं को इनकी लत लग जाए?
हाल ही में कैलिफोर्निया कोर्ट में यह कानूनी लड़ाई एक हाई-प्रोफाइल मुकदमे का हिस्सा है. आरोप है कि मेटा (जो इंस्टाग्राम और फेसबुक की मालिक है) और यूट्यूब ने अपने ऐप्स को 'लत' की तरह डिजाइन किया है ताकि बच्चे इन पर घंटों चिपके रहें. इससे कंपनियों को तो मुनाफा होता है, लेकिन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.
इस केस की शुरुआत कैली जीएम नाम की एक 20 साल की लड़की की याचिका से हुई है. कैली का कहना है कि उन्होंने 6 साल की उम्र में यूट्यूब और 11 साल की उम्र में इंस्टाग्राम चलाना शुरू किया था. उनका दावा है कि इन प्लेटफॉर्म्स की वजह से उन्हें गंभीर मानसिक परेशानियां झेलनी पड़ीं. क्या यह मामला अमेरिका में चल रहे ऐसे सैकड़ों मुकदमों के लिए मिसाल बनेगा.

बच्चों को कैसे गेम और सोशल मीडिया से रखें दूर- (How to keep children away from games and social media)
1. स्क्रीन टाइम सेट-
हर दिन के लिए बच्चों का एक तय स्क्रीन टाइम रखें. जैसे- पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए 1 घंटे. खाने के समय और परिवार के साथ बैठते वक्त मोबाइल बिल्कुल बंद रखें. सोने से पहले स्क्रीन बंद कर दें. ताकि अच्छी नींद आए. सेहतमंद रहने के लिए नींद का लेना बहुत जरूरी है.
2. एक्टिविटीज-
बच्चों को खेलकूद, डांस, म्यूजिक, आर्ट या किसी हॉबी में शामिल करें. किताबें पढ़ने, पजल हल करने या डायरी लिखने जैसी आदतें अपनाकर गेम और सोशल मीडिया के इस्तेमाल से बच सकते हैं.
3. डांट नहीं, प्यार से-
जब बच्चे ज्यादा फोन इस्तेमाल करें, तो गुस्सा करने की बजाय प्यार से बात करें. पूछें कि उन्हें ऑनलाइन क्या पसंद है और वे वहां क्या ढूंढते हैं. समझने की कोशिश करें.
4. मोबाइल को चेक करें-
अगर आपके बच्चे बड़े हैं, तो आप टाइम-टाइम पर उनकी मोबाइल की हिस्टरी चेक करते रहें, ताकि आपको पता चल सके कि बच्चे मोबाइल में क्या देख रहे हैं.
5. फोन न छीनें-
कभी भी बच्चों पर चिल्लाकर अचानकर से उनका फोन न छीनें. इससे बच्चे छिपकर फोन चलाने लगते हैं. प्यार और भरोसे से ही बदलाव करने की कोशश करें.
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