मानसून का मौसम चल रहा है और दिल्ली-NCR समेत देश के कई इलाकों में लगातार बारिश नहीं हो रही है. बीच-बीच में बारिश का दौर देखने को मिल रहा है, जिसके बाद तेज धूप निकल आती है. ऐसे बदलते मौसम में उमस बढ़ जाती है, जिससे लोगों को गर्मी और चिपचिपाहट का सामना करना पड़ रहा है. पसीना, ह्यूमिडिटी, एक्सेस ऑयल और यूवी एक्सपोजर पहले से मौजूद स्किन कंसर्न्स को बढ़ा सकते हैं. वहीं गलत स्किनकेयर हैबिट्स उन्हें और बढ़ा सकती हैं. ऐसे में सही स्किनकेयर टिप्स को अपनाना बहुत ज्यादा जरूरी होता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि मानसून में बीच-बीच में हो रही गर्मी से स्किनकेयर से जुड़ी कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए, जिससे त्वचा हेल्दी बनी रहे. इसकी जानकारी डॉक्टर अजय राणा, डर्मेटोलॉजिस्ट, एस्थेटिक फिजिशियन ने दी है.
1. बार-बार चेहरा धोना
गर्मी में ऑयलीनेस और स्वेटिंग के कारण लोग दिन में कई बार फेस वॉश करने लगते हैं. इससे स्किन बैरियर पर नेगेटिव असर पड़ता है और इरिटेशन बढ़ सकती है. ऐसे में डॉक्टर अजय के अनुसार जेंटल क्लेंजिंग करनी चाहिए. अगर एक्सेसिव ऑयलीनेस और एक्ने लगातार बना हुआ है, तो केवल क्लेंजर बदलने की जगह डर्मेटोलॉजिस्ट से इवैल्यूएशन कराना बेहतर है.
2. पिंपल्स को दबाना
डॉक्टर अजय के अनुसार पिंपल्स को दबाने से इन्फ्लेमेशन बढ़ सकता है और पोस्ट-एक्ने मार्क्स, दाग-धब्बों का रिस्क बढ़ता है. एक्टिव एक्ने का जल्द से जल्द ट्रीटमेंट इसलिए जरूरी होता है. एक्ने की सीवेरिटी को देखते हुए टॉपिकल मेडिसिन्स, ओरल ट्रीटमेंट्स और कुछ मामलों में में केमिकल पील्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.

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3. सनस्क्रीन को नजरअंदाज करना
एक्सपर्ट के अनुसार गर्मियों में यूवी एक्सपोजर पिगमेंटेशन और प्रीमैच्योर स्किन एजिंग को बढ़ा सकता है. ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन डेली स्किनकेयर का जरूरी हिस्सा है. लेकिन पर्सिस्टेंट पिगमेंटेशन को सिर्फ टैनिंग मानकर घर पर स्ट्रॉन्ग ब्लीचिंग प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करना सही नहीं है.
4. एग्रेसिव स्क्रबिंग और एक्सफोलिएशन
ब्लैकहेड्स और डलनेस के लिए बार-बार स्क्रबिंग करना स्किन की इरिटेशन को बढ़ा सकता है. जरूरत से ज्यादा एक्सफोलिएशन की जगह क्लिनिकली अप्रूवड इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल बेहतर माना जाता है.
5. एक्ने स्कार्स को नजरअंदाज करना
एक्ने खत्म होने के बाद स्कार्स को केवल क्रीम्स से ट्रीट करना हमेशा काफी नहीं होता. दाग-धब्बों के प्रकार और डेप्थ के अनुसार माइक्रोनीडलिंग, फ्रैक्शनल लेजर रिसर्फेसिंग, सब्सिशन या अन्य प्रोसीजर्स चुने जा सकते हैं. डॉक्टर के अनुसार हर स्कार के लिए एक ही प्रोसेस प्रभावी नहीं होता है.
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