जब हमें किसी अच्छा काम के लिए कहीं जाना होता है, तो उससे कुछ दिन पहले ही चेहरे पर पिंपल्स निकलने लगते हैं या फिर तनाव भरे समय में एक्जिमा जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ज्यादातर लोग इसे महज संयोग मान लेते हैं, लेकिन असल में, हमारी त्वचा और नर्वस सिस्टम एक-दूसरे से काफी जुड़े हुए हैं. जब हम तनाव, चिंता या भावनात्मक दबाव में होते हैं, तो शरीर में कई बदलाव होते हैं, जो त्वचा की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं. यही कारण है कि तनाव के दौरान मुंहासे, एक्जिमा और अन्य सूजन संबंधी त्वचा रोग बढ़ सकते हैं.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जूरी स्किन क्लिनिक की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. हीना कुकरेजा बताती हैं कि मानसिक स्थिति और भावनात्मक तनाव का असर हमारी त्वचा पर साफ दिखाई दे सकता है. इसलिए सिर्फ स्किनकेयर प्रोडक्ट्स ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी चमकदार त्वचा के लिए बेहद जरूरी है. जब हम स्ट्रेस में होते हैं, तो शरीर के कुछ महत्वपूर्ण सिस्टम एक्टिव हो जाते हैं. इसके कारण कॉर्टिसोल और अन्य रसायनों का स्राव बढ़ जाता है. ये बदलाव त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को कमजोर कर सकते हैं, शरीर की इम्यून सिस्टम के काम करने के तरीके को बदल सकते हैं और सूजन बढ़ाने वाली प्रक्रियाओं को तेज कर सकते हैं. यही वजह है कि कई त्वचा संबंधी समस्याएं तनाव के दौरान ज्यादा बढ़ जाती हैं.
एक्सपर्ट के अनुसार, तनाव त्वचा में तेल बनाने वाली ग्रंथियों की सक्रियता बढ़ा सकता है. इससे त्वचा ज्यादा ऑयली हो जाती है और पिंपल्स तथा मुंहासों की समस्या बढ़ सकती है. इसके साथ ही, शरीर में सूजन बढ़ाने वाले तत्व भी ज्यादा बनने लगते हैं, जिससे त्वचा की स्थिति और खराब हो सकती है.
तनाव से बढ़ सकती है मुंहासों की समस्या
महिलाओं में मासिक धर्म यानी पीरियड्स के दौरान मुंहासों की समस्या अक्सर बढ़ जाती है. अगर इसके साथ मानसिक तनाव भी हो, तो पिंपल्स और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं. खासकर PCOS जैसी हार्मोनल समस्याओं से जूझ रही महिलाओं में स्ट्रेस ब्रेकआउट्स को बढ़ा सकता है. तनाव के कारण शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जिससे त्वचा में ऑयल प्रोडक्शन और सूजन बढ़ सकती है. हालांकि, स्ट्रेस मुंहासों की मुख्य वजह नहीं है, लेकिन यह उन्हें ट्रिगर करने वाला बड़ा कारण माना जाता है.
एक्जिमा में बढ़ सकती है खुजली और सूजन
इससे त्वचा जल्दी सूखने लगती है और खुजली व सूजन की समस्या बढ़ सकती है. जब व्यक्ति बार-बार खुजलाता है, तो त्वचा को और नुकसान पहुंचता है. इससे एक खुजली-खुजलाने का चक्र शुरू हो जाता है, जो त्वचा की समस्या को और गंभीर बना सकता है.
सिर्फ त्वचा नहीं, पूरी लाइफस्टाइल को प्रभावित करता है तनाव
एक्सपर्ट के अनुसार, तनाव का असर सिर्फ त्वचा पर ही नहीं पड़ता, बल्कि यह नींद, खानपान और रोजमर्रा की आदतों को भी प्रभावित करता है. तनाव में लोग अक्सर कम सोते हैं, गलत खानपान अपनाते हैं या त्वचा को बार-बार छूने और खुजलाने लगते हैं, जिससे पिंपल्स, एक्जिमा जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं. इसके अलावा, तनाव हार्मोनल और मेटाबॉलिक समस्याओं को भी बढ़ा सकता है, जिसका असर त्वचा पर दिखाई देता है.
कैसे करें कंट्रोल
पिंपल्स या एक्जिमा का इलाज सिर्फ क्रीम और दवाओं से नहीं होता. अच्छी नींद, तनाव को कंट्रोल करना, संतुलित आहार और हेल्दी लाइफस्टाइल भी उतनी ही जरूरी है. जब स्किन ट्रीटमेंट के साथ इन बातों पर ध्यान दिया जाता है, तो लंबे समय तक बेहतर परिणाम मिल सकते हैं.
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