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हर पैरेंट्स को अपने बच्चे को सिखाने चाहिए ये 7 'स्मार्ट झूठ', Child Psychologist ने बताया कब और कैसे आते हैं काम

मशहूर चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट श्वेता गांधी कहती हैं, बच्चे का ईमानदार होना बहुत अच्छी बात है. लेकिन कुछ कंडीशन ऐसी भी होती हैं जहां झूठ का सहारा लेना जरूरी हो जाता है. आइए जानते हैं इनके बारे में-

हर पैरेंट्स को अपने बच्चे को सिखाने चाहिए ये 7 'स्मार्ट झूठ', Child Psychologist ने बताया कब और कैसे आते हैं काम
अपने बच्चे को जरूर सिखाएं ये चीजें
(Photo Credit: Freepik)

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा ईमानदार बने और हमेशा सच बोले. लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां भी होती हैं, जहां पूरी सच्चाई बताना बच्चे की सेफ्टी के लिए ठीक नहीं होता. ऐसे समय में बच्चे को खुद को सुरक्षित रखना सबसे जरूरी होता है. इसे लेकर मशहूर चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट श्वेता गांधी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है. अपनी इस पोस्ट में साइकोलॉजिस्ट ने 7 ऐसे 'स्मार्ट झूठ' बताए हैं, जो हर पैरेंट्स को अपने बच्चों को जरूर सिखाने चाहिए. साइकोलॉजिस्ट इन्हें बच्चों की सेफ्टी के लिए जरूरी बताती हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में- 

नंबर 1- अजनबी को घर की सही जानकारी न दें

अपने बच्चे को सिखाएं कि अगर कोई अनजान व्यक्ति उससे पूछे 'क्या मम्मी-पापा घर पर हैं?', तो सही जानकारी देने की जरूरत नहीं है. बच्चे को सिखाएं कि वह कहे, 'मम्मी अभी बिजी हैं' या 'मैं पापा को बुलाकर लाता हूं.' इससे सामने वाले को परिवार की स्थिति का पता नहीं चलता.

नंबर 2- अपनी निजी जानकारी किसी को न बताएं

बच्चों को समझाएं कि हर किसी को यह बताने की जरूरत नहीं है कि वे कहां रहते हैं, किस स्कूल में पढ़ते हैं या उनके परिवार में कौन-कौन हैं. अगर कोई ऐसी जानकारी पूछे तो उन्हें इसका सही जवाब न दें. या कहें कि 'यह मेरी निजी जानकारी है.'

नंबर 3- ऑनलाइन भी रहें सतर्क

आजकल बच्चे इंटरनेट का खूब इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में उन्हें सिखाएं कि अगर कोई ऑनलाइन उनका नाम, उम्र, स्कूल या पता पूछे तो जवाब न दें. जरूरत पड़े तो उस व्यक्ति को ब्लॉक करें और चैट छोड़ दें. इंटरनेट पर हर व्यक्ति भरोसे के लायक नहीं होता.

नंबर 4- असहज महसूस होने पर तुरंत वहां से हट जाएं

अगर किसी व्यक्ति के साथ बच्चा असहज महसूस करे, तो उसे सिर्फ शिष्टाचार निभाने की जरूरत नहीं है. अपने बच्चे के सिखाएं कि इस कंडीशन में वह कह सकता है, 'मेरे पापा मेरा इंतजार कर रहे हैं' या 'मुझे लेने कोई आने वाला है.' साइकोलॉजिस्ट कहती हैं, इस स्थिति में सच बोलने से ज्यादा बच्चे की सेफ्टी जरूरी होती है. 

नंबर 5- अकेले जाने से हमेशा मना करें

बच्चे को सिखाएं कि अगर कोई कहे कि 'तुम्हारी मम्मी ने मुझे भेजा है' या 'मेरे साथ चलो', तो बिना पुष्टि किए कभी भी उनके साथ नहीं जाना चाहिए. बच्चे को जवाब देना सिखाएं- 'पहले मैं अपनी मम्मी या पापा से पूछूंगा.'

नंबर 6- ऐसे सीक्रेट कभी न छिपाएं

अगर कोई कहे, 'यह बात मम्मी-पापा को मत बताना', तो बच्चे को समझाएं कि ऐसी बात तुरंत अपने भरोसेमंद बड़े को बतानी चाहिए.

नंबर 7- सबसे पहले सेफ्टी चुनें

इन सब से अलग साइकोलॉजिस्ट कहती हैं, अगर कोई बच्चे को डराकर या धमकाकर जानकारी मांग रहा है, तो उसका काम सच साबित करना नहीं, बल्कि खुद को सुरक्षित रखना है. बच्चे को सिखाएं कि इस कंडीशन में तुरंत किसी भरोसेमंद बड़े से मदद लेनी चाहिए.

श्वेता गांधी बताती हैं, यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो की एक रिसर्च के अनुसार, अगर माता-पिता घर पर छोटे बच्चों को पर्सनल सेफ्टी स्किल्स सिखाते हैं, तो साढ़े तीन साल की उम्र के बच्चे भी इन्हें अच्छी तरह सीख सकते हैं और कई महीनों तक याद रखते हैं. ऐसे में ध्यान रखें कि बच्चों को सिर्फ ईमानदार बनाना ही काफी नहीं है. उन्हें हर कंडीशन में अपनी सेफ्टी को चुनना भी आना चाहिए. 

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