आज के समय में हर माता-पिता के लिए एक सबसे बड़ी समस्या है बच्चों को पढ़ाई के लिए बैठाना. क्योंकि बच्चे पढ़ने का नाम लेते ही भागने लगते हैं. ऐसे में कई बार कई माता-पिता अपना आपा (patience) खो बैठते हैं? चिल्लाना, गुस्सा करना या कभी-कभी हाथ तक उठा देते हैं.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका बच्चे पर क्या असर पड़ता है? बार-बार की डांट-डपट से बच्चा पढ़ाई से डरने लगता है और किताब देखते ही दूर भागने की कोशिश करता है. अगर आप भी इस रोज़-रोज़ की चिकचिक से परेशान हैं, तो पेरेंटिंग कोच के बताए ये 5 आसान तरीके आपके बेहद काम आ सकते हैं.
बिना डांटे बच्चे को पढ़ाने के 5 टिप्स-
1. डेली शेड्यूल-
बच्चे के मन से पढ़ाई का डर निकालने के लिए सबसे पहला कदम है एक सही टाइम टेबल. बच्चे के लिए रोज़ का एक फिक्स शेड्यूल तैयार करें. इस टाइम टेबल में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि उसके खेलने, टीवी देखने और आराम करने का भी एक साफ़ और क्लियर समय तय हो. जब बच्चे को पता होगा कि इस समय के बाद उसे खेलने को मिलेगा, तो वह बिना नखरे किए पढ़ने बैठेगा.
2. छोटे-छोटे गोल्स सेट करें-
बच्चे को एक साथ बहुत सारा पढ़ाने की जगह, काम को छोटे-छोटे हिस्सों या टास्क में बांट दें. जैसे, अभी हम सिर्फ 5 स्पेलिंग्स याद करेंगे. जब बच्चा उस छोटे से टास्क को पूरा कर ले, तो उसकी जमकर तारीफ करें. यह तारीफ उसे आगे और पढ़ने के लिए अंदर से मोटिवेट करेगी.
3. डिस्ट्रैक्शन वाली चीज़ों से दूर रखें-
जब बच्चा पढ़ाई करने बैठे, तो माहौल शांत होना चाहिए. ध्यान रखें कि उस कमरे में टीवी न चल रहा हो और बच्चे के पास मोबाइल बिल्कुल न हो. सबसे ज़रूरी बात जब बच्चा पढ़ रहा हो, तो आपके हाथ में भी मोबाइल नहीं होना चाहिए. पढ़ाई के लिए घर का ऐसा कोना चुनें जहां शोर-शराबा और ध्यान भटकाने वाली चीज़ें बिल्कुल न हों.
4. रिवॉर्ड्स और छोटे ब्रेक्स रखें-
हर 20 मिनट की पढ़ाई के बाद 5 मिनट का एक छोटा सा ब्रेक ज़रूर दें. इसके अलावा, अगर बच्चा पढ़ाई में कुछ अच्छा करता है, तो उसे छोटा सा रिवॉर्ड (इनाम) दें. यह रिवॉर्ड उसकी पसंद का कोई भी छोटा सा काम हो सकता है, जिसे करने में सिर्फ 5 मिनट लगें, जैसे उसका पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर ड्रा करना या कोई गेम खेलना.
5. पेशेंस रखें-
बच्चे तो गलतियां करेंगे ही, हो सकता है कि वे एक बार में कोई चीज़ न सीखें. लेकिन एक पेरेंट के तौर पर आपको शांत रहना होगा. बच्चा जितनी बार भी सवाल पूछे, आपको बिना गुस्साए, ठंडे दिमाग से उसके डाउट्स क्लियर करने चाहिए. जब आप प्यार से समझाएंगे, तो बच्चा अगली बार भी बिना किसी डर के आपसे अपने सवाल पूछ सकेगा.
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