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यूपी में किसे नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, वेरिफिकेशन में FIR को लेकर क्या नियम? जानें हर सवाल का जवाब

UP Government Job Character Verification Rules: अगर आप यूपी में रहते हैं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. यूपी में भर्ती के लिए कैरेक्टर वेरिफिकेशन के नियमों में बदलाव हुआ है.

यूपी में किसे नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, वेरिफिकेशन में FIR को लेकर क्या नियम? जानें हर सवाल का जवाब
यूपी में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए जरूरी खबर

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं में हलचल मच गई है. सरकार की तरफ से तमाम सरकारी नौकरियों में कैरेक्टर वेरिफिकेशन के नियमों को सख्त कर दिया गया है. इसमें बताया गया है कि किसी भी तरह के हिंसक प्रदर्शन में शामिल होने या फिर किसी ऐसे संगठन के साथ, जो मौजूदा व्यवस्था को बदलने की मंशा रखते हों, जुड़ने पर सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी. इसके लिए एक ऑर्डर जारी हुआ है, जिसमें तमाम तरह की चीजें साफ की गई हैं. फिलहाल यूपी के लाखों अभ्यर्थी ये जानना चाहते हैं कि किस वजह से उन्हें नौकरी की रेस से ही बाहर कर दिया जाएगा. हम आपको इससे जुड़े हर सवाल का जवाब देंगे. 

क्या है कैरेक्टर वेरिफिकेशन का नियम?

सबसे पहले ये जान लेते हैं कि ये वेरिफिकेशन का नया नियम क्या है और पहले क्या होता था. दरअसल कैरेक्टर वेरिफिकेशन का नियम पहले से ही तमाम भर्तियों के लिए है, इसमें देखा जाता है कि आवेदन करने वाला उम्मीदवार किसी आपराधिक पृष्ठभूमि से तो नहीं है. इसके अलावा ये भी देखा जाता है कि उसके खिलाफ कितने गंभीर मामले दर्ज हैं. अब इन नियमों को थोड़ा और सख्त किया गया है. इसमें प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने या फिर सत्ता बदलने की सोच रखने वाले संगठन के साथ जुड़ने जैसे क्लॉज जोड़े गए हैं. 

किसी राजनीतिक दल से जुड़े युवाओं को नहीं मिलेगी नौकरी?

नए आदेश में साफ किया गया है कि राजनीतिक दल या फिर उसकी विचारधारा के लिए किसी को भी नौकरी से अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा. यानी युवाओं की अपनी राजनीतिक विचारधारा हो सकती है और ये उनके कैरेक्टर को परिभाषित नहीं करता है. 

FIR होने पर क्या है नियम?

अगर किसी अभ्यर्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है तो उसे तुरंत अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा, क्योंकि एफआईआर होने का मतलब दोषी होना नहीं है. ऐसे में पुलिस को एक महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा जाएगा, जिसके बाद ही आखिरी फैसला लिया जाएगा. हालांकि ऐसे मामलों में पुलिस के पास अधिकार होगा कि वो किस तरह का कैरेक्टर सर्टिफिकेट जारी करती है. 

अभ्यर्थियों के लिए फायदा या नुकसान?

अब बात करते हैं कि इस नए बदलाव का अभ्यर्थियों पर क्या असर होगा. इसके दो पहलू हैं, पहला ये है कि अगर किसी अभ्यर्थी ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया और उसमें किसी तरह की हिंसा भड़क गई तो उसे सीधे बाहर किया जा सकता है, जबकि वो उस मंशा से प्रदर्शन में शामिल नहीं हुआ था. वहीं संगठन से जुड़े होने की बात भी थोड़ी क्लियर नहीं है, इसमें कौन से संगठनों को शामिल किया जाएगा, कौन इसे तय करेगा...ये सब बातें भी थोड़ा कंफ्यूजिंग हैं. 

इसका दूसरा पहलू ये है कि उन अभ्यर्थियों को कहीं न कहीं राहत मिलेगी, जिनका नाम किसी आंदोलन या फिर दूसरी वजह से एफआईआर में दर्ज हो गया. कई बार देखा जाता है कि झूठी शिकायत के आधार पर ही मामला दर्ज कर लिया जाता है, जिसका असर सीधे अभ्यर्थी के करियर पर पड़ता था. हालांकि अब ऐसा नहीं होगा. पुलिस जांच की पूरी रिपोर्ट पेश होने के बाद ही अभ्यर्थी को अयोग्य या योग्य घोषित करने का फैसला लिया जाएगा. 

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