उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती का फाइनल रिजल्ट जारी हो चुका है. इस रिजल्ट के बाद से ही तमाम जिलों में खुशियां मनाई जा रही हैं, भले ही अभी मेडिकल और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन बाकी है, लेकिन पास होने वाले उम्मीदवारों के गांव में जश्न का माहौल है. यूपी के बस्ती जिले के हर्रैया क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नांदेकुआं गांव में भी कुछ ऐसा ही नजारा दिख रहा है. यहां रहने वाले पांच दोस्तों ने एक साथ यूपी पुलिस सिपाही भर्ती नकाली है, जिसके बाद उनकी खूब चर्चा हो रही है. सबसे खास बात ये है कि पांचों जिगरी दोस्त हैं और उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी साथ में की थी.
माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं
इस बड़ी और गौरवशाली सफलता के बाद से ना केवल उन पांचों युवाओं के घरों में उत्सव का माहौल है, बल्कि पूरा गांव इस उपलब्धि पर जश्न मना रहा है. इन सभी के माता-पिता की खुशी का इस समय कोई ठिकाना नहीं है क्योंकि उनके वर्षों का संघर्ष और विश्वास आज रंग लाया है. नांदेकुआं गांव के रहने वाले इन पांचों दोस्तों के नाम अंकेश सत्यम दुबे पुत्र कृष्ण कुमार, आदर्श द्विवेदी पुत्र कृष्ण कुमार, दीपक दुबे पुत्र शिक्कांत, आदित्यनाथ दुबे पुत्र महात्मा प्रसाद और रोहित प्रजापति पुत्र शिव प्रसाद हैं. ये पांचों युवा बचपन के गहरे दोस्त हैं और इनका आपसी रिश्ता समय के साथ और अधिक मजबूत होता चला गया है.
आर्थिक तंगी और संघर्ष
इन युवाओं का यह सफर जरा भी आसान नहीं था क्योंकि इन्हें अपने घर की आर्थिक परिस्थितियों से भी रोजाना दो-चार होना पड़ता था. अंकेश ने अपनी तैयारी के खर्चे को उठाने के लिए गांव के ही पास स्थित एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक की नौकरी संभाली और वेतन के पैसों से अपनी पढ़ाई जारी रखी. दूसरी तरफ, आदर्श ने अपने घर पर रहकर ही पूरी ईमानदारी से तैयारी की और शाम के समय छोटे-छोटे बच्चों को कोचिंग पढ़ाकर अपने अध्ययन का खर्च निकाला. इन दोनों के साथ-साथ बाकी दोस्तों ने भी विपरीत परिस्थितियों के आगे कभी घुटने नहीं टेके और लगातार आगे बढ़ने का रास्ता खोज निकाला.
एक साथ करते थे पढ़ाई
इन सभी दोस्तों की सबसे बड़ी ताकत इनका आपसी मेल-जोल और एक-दूसरे के प्रति अटूट सहयोग की भावना थी. ये सभी दोस्त हर रोज शाम को एक साथ बैठते थे, मोबाइल के सहारे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई करते थे और एक-दूसरे की कमजोरियों को दूर करने में पूरी मदद करते थे. इनकी मेहनत का दायरा सिर्फ उत्तर प्रदेश पुलिस तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इन होनहारों ने कई अन्य परीक्षाओं में भी अपनी सफलता का परचम लहराया है. आदर्श का चयन इससे पहले राजस्व लेखपाल के पद पर भी हो चुका है, जबकि आदित्यनाथ का चयन एसएससी जीडी की परीक्षा में भी हुआ था.
अपनी इस ऐतिहासिक और प्रेरणादायक सफलता का पूरा श्रेय इन पांचों मित्रों ने अपने माता-पिता के आशीर्वाद और उनके दिए गए संस्कारों को दिया है. इन पांचों दोस्तों की ये कहानी आज के दौर के तमाम युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी है, जो यह सिखाती है कि सीमित संसाधनों और कठिनाइयों के बावजूद सच्ची लगन से बड़ा मुकाम पाया जा सकता है.
(रिपोर्ट: सतीश श्रीवास्तव)
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