लगभग 3,000 सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) ग्रुप A कैडर के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में लागू CAPFs (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट की कुछ धाराओं को चुनौती दी है. उनका कहना है कि यह कानून उनके करियर में आगे बढ़ने के मौकों को सीमित करता रहेगा. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिका दाखिल करने वाले कैडर अफसरों में शौर्य चक्र विजेताओं के अलावा महिला अधिकारी भी शामिल हैं. इस याचिका में सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी के कैडर अधिकारी शामिल हैं.
संसद में कुछ समय पहले पारित हुए सीएपीएफ (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) अधिनियम, 2026 के तहत आईजी (IG) के 50%, एडीजी (ADG) के 67%, और डीजी/विशेष डीजी के 100% पद आईपीएस (IPS) अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं. इससे सीआरपीएफ (CRPF), बीएसएफ (BSF), सीआईएसएफ (CISF), आईटीबीपी (ITBP) और एसएसबी (SSB) के अपने अधिकारियों की प्रमोशन में देरी और रुकावट आ रही है. अधिकारियों के प्रमोशन पर असर पड़ रहा है. पहला प्रमोशन मिलने में 15-16 साल तक की देरी हो जाती है, जबकि इसी समय में एक IPS अधिकारी को चार प्रमोशन मिल जाते हैं.
करियर में आ रही भारी रुकावट
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए 'मजबूर' होना पड़ा. नए कानून से उन्हें न्याय नहीं मिला है और सुप्रीम कोर्ट के मई 2025 के फैसले के निर्देशों को लागू नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि नया कानून CAPF कैडर के अधिकारियों के करियर में आ रही भारी रुकावट और उनके करियर में आगे बढ़ने की समस्या को हल नहीं करेगा.
ये याचिकाएं संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई हैं. जो नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों को लागू करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है. (PTI इनपुट के साथ)
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