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'JPSC-JSSC पर सरकार ने दिया धोखा', झारखंड हाईकोर्ट के फैसले पर दोनों तरफ से आए रिएक्शन

Jharkhand High Court Stay JPSC JSSC: झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार के उस फैसले पर रोक लगाई है, जिसमें तमाम परीक्षाओं को रद्द करने की बात कही गई थी. अब आंदोलनकारी छात्र सरकार की मंशा पर ही सवाल उठा रहे हैं.

हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार पर आरोप लगा रहे प्रदर्शनकारी छात्र

झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले पर हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है. सरकार ने अदालत में कहा कि पूरे मामले की CID जांच चल रही है और जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है, इसलिए फिलहाल सरकार के फैसले पर कोई आदेश न दिया जाए. लेकिन अदालत ने मामले को विस्तार से सुनने के बाद सरकार के फैसले पर रोक लगा दी. कोर्ट के इस आदेश से प्रभावित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जबकि आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं.

सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?

झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सरकार की ओर से सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल अच्युत केशव ने सरकार का पक्ष रखा. सरकार की तरफ से अदालत को बताया गया कि पूरे मामले की CID जांच चल रही है और जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है. सरकार ने अदालत से अनुरोध किया कि फिलहाल उसके फैसले पर कोई आदेश पारित नहीं किया जाए और जांच पूरी होने का इंतजार किया जाए. 

सरकार का कहना था कि जब मामले की जांच चल रही है और जांच एजेंसी अपने स्तर पर कार्रवाई कर रही है, तो जांच पूरी होने तक सरकार के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि, अदालत ने याचिका और सरकार की ओर से JPSC-JSSC की परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले को विस्तार से देखने के बाद सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी.

पास हुए उम्मीदवारों को राहत

इस आदेश के बाद उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी नियुक्तियां सरकार के इस फैसले से प्रभावित होने वाली थीं. याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ताओं के वकील के मुताबिक, कोर्ट ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना और सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाई है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी.

अनिरुद्ध रॉय नाम के अभ्यर्थी ने बताया कि हमें बड़ी राहत मिली है. फूड सेफ्टी ऑफिसर के पद पर मेरा रिक्रूटमेंट हुआ था, जिसे रद्द किया जा रहा था. हमारे हिसा से ये गलत है, आप बिना जांच के सभी को कैसे निकाल सकते हैं. हम हाईकोर्ट को धन्यवाद देना चाहते हैं. अनिरुद्ध ने बताया कि सरकार के फैसले के बाद हम हताश हो गए थे और डिप्रेशन में थे. घर पर कई लोग मुझ पर ही निर्भर है, उन्हें मैं क्या समझाऊंगा कि रातोंरात मेरी नौकरी चली गई. 

प्रदर्शनकारी छात्र नाराज

लेकिन हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों में नाराजगी है. इन्हीं छात्रों के आंदोलन और परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बीच सरकार ने परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था. छात्र जीत का जश्न मना ही रहे थे कि हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर रोक लगाने का आदेश दे दिया. आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि सरकार ने उनके साथ धोखा किया है. छात्रों के मुताबिक, अगर सरकार अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखती और जांच में सामने आए तथ्यों को सही तरीके से अदालत के सामने रखती, तो शायद सरकार के फैसले पर रोक की स्थिति नहीं बनती.

सरकार की मंशा पर उठे सवाल

आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि सरकार ने हमारे साथ धोखा किया है, हमें पहले ही पता था कि इनकी मंशा गलत है. हाईकोर्ट में जब सुनवाई हुई और इतनी जरूरी सुनवाई थी, इसमें सरकार के एडवोकेट जनरल नहीं पहुंचे और एक जूनियर वकील को यहां भेज दिया. इन लोगों ने कोर्ट के बहाने ये खेल खेला है. अगर सरकार सोच रही है कि धोखा करके छात्रों को बेवकूफ बना देगी तो वो गलतफहमी में है. झारखंड के छात्र इस बार आर या पार की लड़ाई में हैं. 

फिलहाल एक तरफ कोर्ट के आदेश से प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत मिली है, तो दूसरी तरफ परीक्षा रद्द कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है. अब सबकी नजर 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर है.

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