- बिहार कैडर के वरिष्ठ IAS रहे दीपक कुमार को CMO से हटाकर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया है
- दीपक कुमार 1984 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उन्होंने IIT दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में शिक्षा प्राप्त की है
- उन्होंने बक्सर, नालंदा, हजारीबाग और मोतिहारी जैसे करीब तेरह जिलों में जिलाधिकारी के रूप में कार्य किया है
बिहार कैडर में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीपक कुमार की मुख्यमंत्री कार्यालय से विदाई हो गई है. बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने वरिष्ठ आईएएस दीपक कुमार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के पद से हटाकर बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है. 30 सितंबर 2026 को जारी आदेश के बाद वे मुख्यमंत्री कार्यालय से बाहर हो गए हैं. हालांकि, नई जिम्मेदारी के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी मिलेगा.
कौन हैं आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक कुमार?
दीपक कुमार 1984 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. बिहार सरकार के आईएएस रिकॉर्ड के मुताबिक, 3 फरवरी 1960 को जन्मे दीपक कुमार मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले हैं. उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में बीई/बीटेक तथा सिस्टम एनालिसिस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई IIT दिल्ली से की थी और बाद में मैनेजमेंट एवं सिस्टम्स में एमटेक किया.
इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले दीपक कुमार की प्रशासनिक सेवा में आने के बाद की यात्रा केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रही. उनका करियर स्वास्थ्य, नगर विकास, पर्यटन, शिक्षा, सामान्य प्रशासन तथा सूचना एवं जनसंपर्क जैसे विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरा है.

इन जिलों की कमान संभाली
दीपक कुमार करीब 13 जिलों में जिलाधिकारी के तौर पर कार्य कर चुके हैं. बक्सर, नालंदा, हजारीबाग और मोतिहारी जैसे जिलों में उनकी तैनाती रही है. जिलाधिकारी के रूप में मिला यह अनुभव उनके बाद के प्रशासनिक करियर में भी अहम साबित हुआ. सचिवालय में विभागों की जिम्मेदारी संभालने से पहले वे जिला स्तर पर शासन और प्रशासन की चुनौतियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर चुके थे.
दिल्ली में भी संभाली बड़ी जिम्मेदारियां
राज्य सरकार के साथ काम करने के अलावा दीपक कुमार केंद्र सरकार में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे. वे कर्मचारी राज्य बीमा निगम के महानिदेशक रहे. ESIC में उनकी भूमिका स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यों से संबंधित रही. यही नहीं, जून 2017 में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का चेयरमैन भी बनाया गया. उस दौरान उनका कार्य देश के सड़क और राजमार्ग ढांचे से संबंधित बड़ी परियोजनाओं की निगरानी और संचालन से जुड़ा था.

2018 में बने बिहार के मुख्य सचिव
केंद्र से बिहार लौटने के बाद दीपक कुमार को विकास आयुक्त बनाया गया. इसके बाद मई 2018 में उन्हें बिहार का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया. मुख्य सचिव के रूप में उनका कार्यकाल फरवरी 2021 तक रहा. उन्हें दो बार छह-छह महीने का सेवा विस्तार भी मिला था. 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद भी उनका कार्यकाल जारी रहा. अंततः 28 फरवरी 2021 को वे मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए.
रिटायरमेंट के अगले दिन फिर पहुंचे CMO
दीपक कुमार को इसलिए भी नीतीश कुमार का विश्वासपात्र माना जाता है क्योंकि उनकी सेवानिवृत्ति के अगले ही दिन उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे दी गई थी. वे 28 फरवरी 2021 को मुख्य सचिव पद से रिटायर हुए थे. इसके अगले दिन, यानी 1 मार्च 2021 को उन्हें मुख्यमंत्री का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया.
इसके बाद से वे लगातार मुख्यमंत्री कार्यालय में बने रहे. यही वह दौर था, जब उनकी पहचान नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में होने लगी. लंबे समय तक मुख्यमंत्री कार्यालय में उनकी मौजूदगी के कारण उन्हें बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में गिना जाता रहा.
सरकार बदली, लेकिन CMO में बने रहे
हालांकि, 2026 में बिहार की सत्ता में बदलाव के बाद भी दीपक कुमार मुख्यमंत्री कार्यालय में बने रहे. सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने प्रधान सचिव की जिम्मेदारी संभाली. वे करीब 66 महीने तक मुख्यमंत्री कार्यालय में इस भूमिका में रहे.
यही वजह है कि अब उनका CMO से बाहर जाना चर्चा का विषय बना हुआ है. वे उस दौर के अंतिम प्रमुख अधिकारियों में थे, जिन्होंने नीतीश कुमार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री कार्यालय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और नई सरकार के गठन के बाद भी उसी पद पर बने रहे.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं