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Success Story: पिता को कैंसर में खोने के बाद IAS सोनल गोयल का मिशन, एवरेस्ट बेस कैंप से दी बड़ी सीख

त्रिपुरा कैडर की IAS अधिकारी सोनल गोयल ने एवरेस्ट बेस कैंप पर तिरंगा फहराकर युवाओं को ‘Drugs नहीं, Dreams चुनो’ का संदेश दिया. 14 दिन की कठिन यात्रा के दौरान उन्होंने कैंसर जागरूकता, स्वस्थ जीवनशैली और नशामुक्त भारत अभियान को भी बढ़ावा दिया.

Success Story: पिता को कैंसर में खोने के बाद IAS सोनल गोयल का मिशन, एवरेस्ट बेस कैंप से दी बड़ी सीख
पिता को कैंसर में खोने के बाद शुरू किया मिशन, अब एवरेस्ट बेस कैंप से IAS सोनल ने जगाई जागरूकता

IAS Sonal Goel Success Story: त्रिपुरा कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सोनल गोयल ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के एवरेस्ट बेस कैंप पर तिरंगा फहराकर देश के युवाओं को ड्रग्स नहीं, ड्रीम्स चुनने की अपील की. इसके साथ ही उन्होंने कैंसर जागरुकता, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नशा-मुक्त भारत का संदेश भी दिया.  सोनल का कहना है कि युवाओं की ऊर्जा अगर सही दिशा मिल जाए तो वे न केवल अपने सपनों को साकार कर सकते हैं, बल्कि देश के भविष्य को भी नई दिशा दे सकते हैं.

सोनल गोयल की 14 दिनों की यह कठिन यात्रा केवल एक एडवेंचर नहीं थी, बल्कि एक सामाजिक मिशन भी थी. एवरेस्ट बेस कैंप पर उन्होंने तिरंगे के साथ कैंसर जागरूकता का प्रतीक रिबन और "ड्रग्स नहीं, ड्रीम्स चुनो" का नारा देकर युवाओं से नशे से दूर रहने और अपने सपनों को जीवन का लक्ष्य बनाने की अपील की. 

आईएएस सोनल गोयल (IAS Sonal Goel)  ने बताया कि साल 2023 में कैंसर के कारण अपने पिता को खोने के बाद उन्होंने संकल्प लिया कि वे समाज में कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर प्रयास करेंगी. उन्होंने शुरुआत सोशल मीडिया से की, जहां उन्हें लगभग 30 लाख लोग फॉलो करते हैं. और अब जब उन्होंने एवरेस्ट बेस कैंप पर पहुंचने का कीर्तिमान हासिल किया है तो इस मंच का इस्तेमाल भी उन्होंने अपने इस मिशन के लिए किया है. उनका मानना है कि उनके यह प्रयास किसी एक परिवार को भी इस पीड़ा से बचाने में योगदान दे सके, तो वही उनके पिता के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. 

2 साल की तैयारी के बाद पहुंची एवरेस्ट

सोनल गोयल (Sonal Goel) IAS की माने तो एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचना कोई एक दिन का फैसला नहीं था. पिछले लगभग दो सालों में उन्होंने खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करने के लिए कई हाई ऐल्टिट्यूड ट्रेक, मैराथन और धार्मिक यात्राएं कीं. उत्तराखंड की रुपिन-सुपिन घाटी, हिमाचल प्रदेश का हातू पीक, तुंगनाथ ट्रेक, कैलाश मानसरोवर यात्रा, लद्दाख हाफ मैराथन, मसूरी मैराथन सहित कई अभियानों ने उन्हें इस चुनौती के लिए तैयार किया.

करीब 14 दिनों तक चली इस यात्रा में उन्होंने शून्य से नीचे तापमान, कम ऑक्सीजन, कठिन चढ़ाइयों और सीमित संसाधनों के बीच लगभग 140 किलोमीटर का ट्रेक पूरा किया. सोनल के अनुसार पहाड़ों ने उन्हें अनुशासन, धैर्य, टीमवर्क और स्ट्रॉंग माइंडसेट के साथ काम करना सिखाया. उनका कहना है कि किसी भी बड़े लक्ष्य तक पहुंचने के लिए केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर प्रयास और परिवार का सहयोग भी उतना ही ज़रूरी होता है.

'नशामुक्त भारत अभियान'

सोनल का मानना है कि भारत सरकार के 'नशामुक्त भारत अभियान' जैसे प्रयास तभी सफल होंगे, जब समाज और विशेष रूप से युवा वर्ग इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएगा. नशामुक्त भारत, 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत की मंज़िल का एक बहुत ही महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.  

सोनल गोयल फिलहाल त्रिपुरा सरकार में सचिव के पद पर तैनात हैं. प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ वह अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारियों को लेकर भी बहुत एक्टिव हैं. 5364 मीटर की ऊँचाई पर तिरंगा लहराकर, कैंसर को लेकर जागरूकता और नशा-मुक्त भारत का संदेश देना इसकी एक जीती-जागती मिसाल है.

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