यूपी के बागपत में 59 साल की उम्र में विजय कुमार शर्मा का सरकारी शिक्षक बनने का सपना पूरा हुआ है. 27 साल के लंबे संघर्ष के बाद विजय कुमार शर्मा का चयन टीजीटी संस्कृत शिक्षक के पद पर हुआ है. लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा. खास बात यह है कि विजय कुमार दर्जनों बार शिक्षक भर्ती के लिए क्वालीफाई कर चुके थे, लेकिन साक्षात्कार में बाहर हो जाते थे. इस बार चयन प्रक्रिया में इंटरव्यू नहीं होने के कारण उनका चयन हो गया.
1999 में देखा था सरकारी नौकरी का सपना
बागपत के बदहवाद गांव निवासी विजय कुमार शर्मा की सरकारी नौकरी पाने की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है. विजय कुमार ने वर्ष 1999 में सरकारी नौकरी के लिए प्रयास शुरू किया था और करीब 27 साल बाद साल 2026 में उनका सपना पूरा हुआ. विजय कुमार शर्मा बताते हैं कि उन्होंने कई बार शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन किया और लिखित परीक्षा में क्वालीफाई भी किया, लेकिन इंटरव्यू की प्रक्रिया में उनका चयन नहीं हो पाता था.
इस बार भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू नहीं होने का फायदा उन्हें मिला और उनका चयन टीजीटी संस्कृत शिक्षक के पद पर हो गया. लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें नियुक्ति पत्र दिया, जिसके बाद विजय कुमार ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया. विजय कुमार पिछले करीब 26 साल से बड़ौत के पास स्थित दून पब्लिक स्कूल में प्राइवेट शिक्षक के तौर पर बच्चों को पढ़ा रहे हैं. उनके पिता लक्ष्मण सिंह भी सरकारी अध्यापक थे.
बेटे पुलिस में कर रहे हैं नौकरी
विजय कुमार के पांच बच्चे हैं, जिनमें दो बेटे यूपी पुलिस में सेवा दे रहे हैं और तीन बेटियां हैं. एक बेटी का चयन भी टीचिंग में हुआ है, हालांकि वह अभी प्रतीक्षा सूची में है. विजय कुमार की सफलता पर स्कूल परिवार और उनके गांव में खुशी का माहौल है. स्कूल प्रबंधक प्रशांत का कहना है कि विजय कुमार ने नौकरी करते हुए भी पढ़ाई और सरकारी नौकरी की तैयारी नहीं छोड़ी. विजय कुमार का कहना है कि उम्र चाहे कितनी भी हो, अगर इंसान लगातार मेहनत और संघर्ष करता रहे तो सफलता जरूर मिलती है. उनकी 27 साल की मेहनत का फल उस वक्त मिला, जब उनकी उम्र 59 साल हो चुकी है.
खुद बताया अपना संघर्ष
नौकरी मिलने के बाद विजय कुमार ने कहा, देखिए मुझे मुख्यमंत्री जी ने जो पत्र दिया है, नियुक्ति पत्र...मुझे बड़ी खुशी हुई उस समय और मेरे जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि मैं इसको मानता हूं. और मैं ये चाहता हूं कि सभी नौजवान पूरी मेहनत से अगर अपने लक्ष्य को प्राप्त करें, तो ये लक्ष्य प्राप्त हो सकता है, मेहनत जरूरी है. मैंने अपने जीवन में आयोग में 1999 से मैंने पेपर देने शुरू किए थे. कई बार मेरे पास में... आठ बार मैं साक्षात्कार पत्र मेरे पास में है. मैंने प्राप्त किया, इंटरव्यू में मैं बाहर हो जाता था बार-बार...अब मुझे बड़ी खुशी हुई कि मेरा चयन हो गया.
विजय कुमार ने बताया कि, "मैंने चार बार पीजीटी और छह बार टीजीटी निकाला है और हर बार मैंने अपने आपको सुधारने का प्रयास किया. जो गलतियां थीं, वो दूर करने का प्रयास किया. मैं खाना भी नहीं खाता था जब तक मुझे प्रश्नों का उत्तर ना मिल जाए.सबसे बड़ा योगदान मुझे मेरे विद्यालयों से मिला कि मैंने जो मुझे परिस्थिति थी, उनके अनुसार मैंने पढ़ाया और बड़ी अच्छे ढंग से पढ़ाया. कोई दबाव मेरे ऊपर नहीं था और बच्चों का भी बहुत बड़ा योगदान क्योंकि वे मेरा कहना मानते थे, याद करते थे. बच्चों के साथ मैं भी पढ़ा."
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