AI Impact on Jobs : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने दुनिया भर के नौकरीपेशा लोगों प्रभावित करना शुरू कर दिया है, लेकिन चीन में इसका असर खास रूप से दिखाई दे रहा है. यहां के लोगों में यह चिंता बढ़ रही है कि कहीं नई टेक्नोलॉजी उनकी जगह न ले ले. बीजिंग में रहने वाले 40 साल के कंप्यूटर प्रोग्रामर फेई झाओजुन की कहानी इस बदलाव को बयां करती है.
AI जल्द ही ले लेगा इंसानों की जगह
फेई बताते हैं कि उनके बॉस ने उनसे पूछा था कि क्या AI जल्द ही कोडिंग के काम में इंसानों की जगह ले सकता है. इसके लगभग दो हफ्ते बाद उन्हें और उनके करीब 160 कूलीग को नौकरी से हाथ धोना पड़ा.
फेई का कहना है कि नौकरी जाने के बाद से उन्होंने नई नौकरी की तलाश भी नहीं की, क्योंकि उन्हें लगता है कि 40 साल के प्रोग्रामर में कोई कंपनी दिलचस्पी नहीं दिखाएगी.
AI सीखना जरूरी
हालांकि फेई AI को पूरी तरह नकारते नहीं हैं. उनका मानना है कि अगर बाकी लोग AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो कंपीटीशन में बने रहने के लिए इसे सीखना जरूरी है. बता दें इन दिनों फेई करियर ब्रेक के दौरान छोटी वीडियो बनाकर नई ऑपर्चुनिटी की तलाश कर रहे हैं.
क्रिएटिविटी में भी बढ़ रहा AI का दखल
AI का प्रभाव केवल प्रोग्रामिंग तक सीमित नहीं है. 32 साल के स्क्रिप्ट राइटर और इलस्ट्रेटर वांग झीचेंग का कहना है कि अब कंपनियां नौकरी के लिए ऐसे उम्मीदवार चाहती हैं जो AI की मदद से ज्यादा स्क्रिप्ट तैयार कर सकें, फोटो और वीडियो बना सकें और AI टूल्स को भी अच्छे से ड्राइव कर सकें.
वांग पहले बच्चों के लिए 3D एनिमेटेड एकेडेमिक वीडियो और इंटरैक्टिव कंटेंट बनाने वाली कंपनी में काम करते थे. जब उनकी कंपनी ने लगभग आधे स्क्रिप्ट राइटर्स को हटा दिया, तो उन्होंने नौकरी छोड़कर बच्चों की पिक्चर बुक्स बनाने की फ्रीलांसिंग शुरू कर दी. उनका कहना है कि AI समय तो बचाता है, लेकिन उसके बनाए कंटेंट में अक्सर दोहराव और क्रिएटिवीटी की कमी दिखाई देती है.
रोबोट कर रहे हैं इंसानों वाले काम
चीन में अब इंसानों वाले काम रोबोट कर रहे हैं. डाक सेंटर में पार्सल छांटने से लेकर फूड डिलीवरी करने तक में रोबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे लाखों डिलीवरी कर्मचारियों के नौकरी पर खतरे की तलवार लटकने की आशंका जताई जा रही है.
वहीं, शॉर्ट वीडियो और डिजिटल एंटरटेनमेंट सेंक्टर में भी जेनरेटिव AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. प्लेनम रिसर्च की सीनियर एनालिस्ट शुजिंग हे के अनुसार, ऐसे कई काम जिनके लिए पहले स्पेशल ट्रेनिंग की जरूरत पड़ती थी, अब AI टूल्स की मदद से कोई भी कर सकता है. खासकर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट बनाने जैसे कां में AI का इंपैक्ट सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है.
सरकार भी कर रही है एनालिसिस
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की "AI Plus" पहल और 2030 तक की विकास योजना के तहत AI को विभिन्न उद्योगों में लागू किया जा रहा है. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार अभी भी रोजगार बाजार पर इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन कर रही है.
चीन की शहरी बेरोजगारी दर लगभग 5 प्रतिशत के आसपास है, जबकि 16 से 24 वर्ष की आयु के यंगस्टर्स में बेरोजगारी इससे कहीं अधिक है. ऐसे में AI को लेकर उम्मीद और चिंता दोनों साथ-साथ बढ़ रही हैं.
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