- जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं
- विरोध के दौरान यूनिवर्सिटी प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों पर छात्रों ने मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए
- 7 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित हुई है जो छात्र संघ के नए संविधान और अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा करेगी
दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स, छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर पिछले 12 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. इसे लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन भी चल रहा है. इसकी शुरुआत हुई 12 अक्टूबर को, जब जामिया के छात्रों ने गेट नंबर-7 के पास विरोध-प्रदर्शन और भूख हड़ताल की शुरुआत की. बवाल बढ़ा भूख हड़ताल के पांचवें दिन 16 अक्टूबर, शनिवार को. सुबह के समय जब छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाया गया. स्टूडेंट्स ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी के सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया.इस दौरान छह छात्रों को मामूली चोटें आने का भी दावा किया गया. हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया.
जामिया यूनिवर्सिटी में क्या हुआ?
छात्रों का आरोप है कि सुबह करीब 5:30 बजे करीब 60 सुरक्षा गार्ड चीफ प्रॉक्टर और सिक्योरिटी एडवाइजर के साथ विरोध वाली जगह पर पहुंचे और उन्होंने छात्रों के बिस्तर और तिरपाल को बिखेरा और उनको जबरन वहां से हटा दिया. शनिवार दोपहर को छात्रों ने गेट नंबर-7 पर फिर से विरोध-प्रदर्शन शुरू किया. शाम को करीब 300 छात्रों ने यूनिवर्सिटी परिसर में घुसकर विरोध-प्रदर्शन की कोशिश की. कुछ छात्र जबरदस्ती गेट के अंदर घुसे और कुलपति और रजिस्ट्रार के पोस्टर लहराए और वीसी गेट तक मार्च भी निकाला. इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने कई छात्रों को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया. इस दौरान पूरे कैंपस की बिजली एहतियातन बंद कर दी गई. यूनिवर्सिटी में तनाव इतना बढ़ गया कि सभी गेट्स पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई. हालांकि ये विरोध-प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा.
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सुरक्षाकर्मियों पर बदसलूकी का आरोप
छात्रों ने आरोप लगाया कि करीब 100 सुरक्षाकर्मी मस्जिद वाले गेट के पीछे से वहां पहुंचकर उनको घसीटते हुए गेट नंबर-7 तक ले गए. फिर उनको एंबुलेंस से अस्पताल भेजा. उन्होंने सुरक्षाकर्मियों पर पेट पर मारने और बाल खींचने के भी आरोप लगाए हैं. इस दौरान भूख हड़ताल पर बैठे मोहम्मद जासिम और एविन की तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी. हालांकि उन्होंने अपनी भूख हड़ताल जारी रखी.
क्या हैं जामिया के छात्रों की मांगें?
जामिया के प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि साल 2006 से बंद पड़े छात्र संघ को फिर से बहाल किया जाए. इसके चुनाव की तारीखों का तुरंत ऐलान हो. वहीं वे चीफ प्रॉक्टर असद मलिक के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.साथ ही उनका कहना है कि
छात्रों पर जो भी एक्शन हुए हैं, उन्हें रद्द किया जाए.
जामिया यूनिवर्सिटी का कदम?
छात्रों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 18 अक्टूबर को एक बैठक के दौरान छात्र संघ का नया संविधान बनाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा के लिए 7 सदस्यीय हाईलेवल कमेटी का गठन कर दिया. ये कमेटी प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत कर उनकी शिकायतों व मांगों पर विचार करेगी. प्रशासन का कहना है कि कमेटी बनाए जाने का मकसद कैंपस में शांति बहाल करना और सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां फिर से शुरू करने के लिए जरूरी कदम उठाना है. हालांकि प्रदर्शनकारी छात्र चुनाव की तारीखों का ऐलान होने तक अपना प्रदर्शन खत्म करने को तैयार नहीं हैं.
क्या कह रहे प्रदर्शनकारी छात्र
12 अक्टूबर से अनशन और प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि जब तक छात्र संघ की बहाली नहीं होती, वे नहीं उठेंगे. वह अपनी सभी मांगों पर अड़े हुए हैं. प्रशासन के भरोसे के बाद भी वह अपनी हड़ताल खत्म करने को तैयार नहीं हैं.
जामिया में ‘फ्री कश्मीर, ‘डेथ टू ABVP' जैसे नारों पर बवाल
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच ‘फ्री कश्मीर, ‘डेथ टू ABVP' और ‘फ्री शरजील इमाम' और कथित देश विरोधी भी देखने को मिले हैं.22 अक्टूबर को सामने आई तस्वीरों में कैंपस की दीवारों पर नीले और लाल रंग से 'फ्री कश्मीर' और 'फ्री शरजील इमाम' जैसे नारे लिखे देखे गए. कुछ जगहों पर RSS के खिलाफ भी आपत्तिजनक बातें लिखी गई थीं.
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बाद में इन नारों को हटा दिया था. ये नारे किसने लिखे ये पता नहीं चल सका. हालांकि इस घटना के बाद कैंपस का माहौल काफी संवेदनशील हो गया और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई.

जामिया पहुंचे इमरान मसूद, हिरासत में लिए गए
इस सब बवाल के बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद छात्रों से मिलने जामिया मिल्लिया पहुंचे. उन्होंने विवादित नारों की निंदा करते हुए छात्रों की मांगों का समर्थन किया. हालांकि जब वह कैंपस से बाहर निकले तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और बाद में छोड़ दिया.

जामिया कैंपस में दीवारों पर नारेबाजी पर ABVP की चिंता
जामिया कैंपस में दीवारों पर नारे लिखे जाने जैसी घटनाओं पर ABVP जामिया इकाई ने गंभीर चिंता जताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और विश्वविद्यालय ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देता है.
निष्पक्ष जांच और FIR की मांग
ABVP जामिया इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करने और उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की मांग की है. ABVP ने इस घटना को वहां चल रहे छात्रसंघ की बहाली आंदोलन से जोड़ दिया. उन्होंने कहा है कि छात्रहित से जुड़े लोकतांत्रिक आंदोलनों में ऐसे नारों और गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए, जो राष्ट्रीय एकता या किसी छात्र संगठन के प्रति घृणा और शत्रुता को बढ़ावा दें.
छात्रसंघ बहाली के लिए समिति गठित करने वाले फैसले का स्वागत
ABVP ने छात्रसंघ की बहाली की मांग पर समिति गठित करने के विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णय का स्वागत किया. उनके अनुसार, छात्रसंघ विद्यार्थियों की समस्याओं को उठाने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और विश्वविद्यालय की व्यवस्था में रचनात्मक भागीदारी सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक माध्यम है.
लोकतांत्रिक असहमति के नाम पर नफरत स्वीकार्य नहीं
ABVP के दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक ने कहा, ‘जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान में छात्रसंघ की बहाली विद्यार्थियों का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आंदोलन के बीच ‘डेथ टू ABVP' और ‘फ्री कश्मीर' जैसे नारे गंभीर चिंता का विषय हैं. लोकतांत्रिक असहमति के नाम पर किसी संगठन के प्रति घृणा और शत्रुता को बढ़ावा देना उचित नहीं है. विश्वविद्यालय प्रशासन को निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए.”
विद्यार्थी की सुरक्षा, सम्मान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो
ABVP ने कहा है कि विश्वविद्यालय परिसर में प्रत्येक विद्यार्थी की सुरक्षा, सम्मान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित होनी चाहिए. हिंदू अल्पसंख्यक विद्यार्थियों सहित सभी समुदायों के छात्रों को बिना भय या भेदभाव के शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए.वहीं जो विद्यार्थी ‘छात्रसंघ की बहाली' को लेकर आंदोलन कर रहे है उनका कहना है कि आंदोलन को बदनाम करने की साजिश हो रही है, और उनका इस घटना से कोई लेना देना नहीं है.
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