- यूपी विधानसभा चुनाव के लिए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पश्चिमी यूपी की मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस कर रहे
- AIMIM का उद्देश्य भारत गठबंधन में अपनी पार्टी को शामिल कराने के लिए दबाव बनाना और प्रेशर पॉलिटिक्स करना है
- सपा और कांग्रेस AIMIM को वोट काटने वाली पार्टी मानते हैं जो बीजेपी विरोधी वोटों को विभाजित कर सकती है
अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा चुनावों को लेकर तमाम राजनीतिक पार्टियों ने तैयारी शुरू कर दी है. सत्ताधारी बीजेपी और मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के साथ-साथ इस बार AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी. ओवैसी खासतौर सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा और मुजफ्फरनगर जैसी पश्चिमी यूपी की मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस कर रहे हैं. इन जिलों की करीब 36 विधानसभा सीटों को AIMIM के लिए अहम माना जा रहा है. इनमें कई सीटें ऐसी हैं जहां समाजवादी पार्टी के मुस्लिम विधायक हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का इन सीटों पर फोकस करने का फैसला एक तरह की प्रेशर पॉलिटिक्स है, जिसका मकसद INDIA गठबंधन पर अपनी पार्टी को उनके बड़े गठबंधन में शामिल करने के लिए दबाव डालना है. लखनऊ के एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा,'ओवैसी जानते हैं कि मुस्लिम वोटों का बंटवारा होने से इस बड़े गठबंधन की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचेगा.'
हालांकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस दावे को खारिज कर दिया है कि ओवैसी राज्य में उनकी चुनावी संभावनाओं को 'नुकसान' पहुंचा सकते हैं. सपा के एक नेता ने कहा कि AIMIM असल में बीजेपी की 'B-टीम' है और मुसलमान इस बात को अच्छी तरह जानते हैं.
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल AIMIM को एक 'वोट काटने वाली' पार्टी के रूप में देखते हैं, जो BJP-विरोधी या अल्पसंख्यक वोट बैंक को बांट सकती है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिमी यूपी की कुछ सीटों पर अगर 2% से 5% वोट भी किसी एक तरफ चले जाएं, तो त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबलों के नतीजे पूरी तरह बदल सकते हैं.
AIMIM की मौजूदगी से बीजेपी विरोधी वोट बंट सकते हैं, जबकि गठबंधन होने की स्थिति में BJP को काउंटर-पोलराइजेशन का नैरेटिव आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है.
2022 के चुनाव में क्या हुआ था?
2022 विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर AIMIM को मिले वोट जीत के अंतर से ज्यादा थे. इसी आधार पर राजनीतिक विश्लेषक दावा करते हैं कि पार्टी ने कई सीटों पर मुकाबले को प्रभावित किया.
पश्चिम यूपी
- नकुर (सहारनपुर): AIMIM को 3593 वोट मिले, जबकि जीत का अंतर सिर्फ 315 वोट था.
- फॉक्सी: AIMIM को 2290 वोट मिले, जीत का अंतर 1445 वोट रहा.
- तितावी नगर: AIMIM को 2261 वोट मिले, जबकि जीत का अंतर 782 वोट था.
पूर्वांचल
- सुल्तानपुर: AIMIM को 5251 वोट मिले, जीत का अंतर 1009 वोट रहा.
- औराई: AIMIM को 2190 वोट मिले, जबकि जीत का अंतर 1647 वोट था.
- शाहगंज: AIMIM को 8128 वोट मिले, जबकि जीत का अंतर महज 719 वोट रहा.
यह भी पढ़ें | भतीजे आकाश आनंद को मायावती ने सौंपी नई जिम्मेदारी, संभालेंगे चुनावी अभियान, अशोक सिद्धार्थ पर फिर बरसीं
यह भी पढ़ें | 'चुनाव लड़कर दिखाएं, जमानत जब्त न हो तो बताना', संभल से ओवैसी के चुनाव लड़ने की चुनौती पर मुस्लिम समाज का बयान
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं