बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले की जांच में मुंबई पुलिस के हाथ कई चौंकाने वाले सुराग लगे हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों में से आठ आरोपी सीधे तौर पर मुख्य साजिशकर्ता अनिल पंडित के संपर्क में थे. इनमें गिरफ्तार की गई दो महिला आरोपी राधा वर्मा और बबीता राव भी शामिल हैं, जिनके मोबाइल फोन की जांच से पता चला है कि उन्होंने मुंबई के कई अहम इलाकों का दौरा किया था. पुलिस को शक है कि हरियाणा की रहने वाली इन दोनों महिलाओं को इस पूरी साजिश की पहले से जानकारी थी और उन्होंने शहर के नामचीन अभिनेताओं और बड़े कारोबारियों के ठिकानों की रेकी कर इसकी जानकारी अनिल पंडित तक पहुंचाई थी. अब मुंबई पुलिस स्थानीय मददगारों की तलाश और इस साजिश की तह तक जाने के लिए दोनों महिलाओं की रिमांड मांगने की तैयारी कर रही है.
जांच के केंद्र में आईं राधा और बबीता
मुंबई पुलिस की तफ्तीश में यह बात साफ हो चुकी है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था. पुलिस सूत्रों का कहना है कि पकड़े गए कुल 11 आरोपियों में से आठ लोग सीधे मुख्य आरोपी अनिल पंडित से जुड़े हुए थे और उसी के इशारों पर काम कर रहे थे. जांच अधिकारियों को पूरा संदेह है कि राधा वर्मा और बबीता राव अनजाने में इस गिरोह का हिस्सा नहीं बनी थीं, बल्कि उन्हें इस खतरनाक साजिश और अपने काम के बारे में पूरी जानकारी थी.
पुलिस का मानना है कि उपलब्ध डिजिटल डेटा इस सवाल का जवाब देने में मदद कर सकता है कि दोनों महिलाएं किन-किन स्थानों पर गईं और वहां जाने का उनका उद्देश्य क्या था.
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मोबाइल डेटा खोल सकता है कई राज
पुलिस अधिकारियों को उम्मीद है कि जब्त किए गए मोबाइल फोन इस पूरे नेटवर्क के काम करने के तरीके को समझने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. जांचकर्ताओं का मानना है कि मोबाइल डेटा, लोकेशन डिटेल, संपर्कों और अन्य डिजिटल जानकारियों से यह पता चल सकता है कि आरोपियों के बीच किस स्तर का तालमेल था. जांच में सामने आया है कि अब तक गिरफ्तार 11 आरोपियों में से 8 सीधे मुख्य आरोपी अनिल पंडित के संपर्क में थे. पुलिस इसी कनेक्शन को खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित साजिश की योजना कैसे बनाई गई और उसमें किसकी क्या भूमिका थी? इस कड़ी में कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल कम्युनिकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है. जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपियों के बीच संपर्क का पैटर्न पूरे मामले की बड़ी तस्वीर सामने ला सकता है.
स्थानीय मदद के एंगल की भी जांच
राधा वर्मा और बबीता राव मूल रूप से हरियाणा की रहने वाली हैं. ऐसे में पुलिस यह भी जांच रही है कि मुंबई पहुंचने के बाद क्या उन्हें किसी स्थानीय व्यक्ति से मदद मिली थी. सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों को शक है कि गिरोह को शहर में मूवमेंट, ठहरने या अन्य व्यवस्थाओं में किसी स्थानीय सहयोगी ने सहायता पहुंचाई हो सकती है. इसी एंगल को लेकर भी पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण जारी है. पुलिस अब राधा वर्मा और बबीता राव की रिमांड लेने की तैयारी कर रही है ताकि सामने आए नए सुरागों के आधार पर उनसे विस्तृत पूछताछ की जा सके. अधिकारियों का मानना है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ के बाद साजिश की प्रकृति, संभावित रेकी और अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं.
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