तेलंगाना के श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) सुरंग के ढह जानें से 8 लोग उसमें फंसे हुए हैं. बता दें कि यह घटना 22 फरवरी को हुई थी और पिछले पांच दिनों से उन्हें बचाने के लिए बचाव कार्य जारी है. सुरंग में फंसे आठों श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचावकर्मी संघर्ष कर रहे हैं और उनमें से तीन लोग ऐसे हैं जो पहले भी इसी तरह की परिस्थितियों में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम कर चुके हैं. हालांकि, वो एक अलग परिस्थिती थी जो उत्तराखंड के पहाड़ों में हुई थी.
दरअसल, एक साल से भी पहले उत्तरकाशी के सिल्कयारा में इसी तरह की घटना हुई थी जब एक सुरंग ढह गई थी और इसमें कई लोग फंस गए थे. इन लोगों को बाहर निकालने में 17 दिनों का समय लगा था. उस वक्त उत्तरकाशी में लोगों को मौत के मुंह से बाहर लाने वाले ये तीन बचावकर्मी आज तेलंगाना में जुटे हुए हैं और इससे भी अधिक मुश्किल परिस्थितियों में उम्मीद के बल पर 8 श्रमिकों को बचाने में जुटे हुए हैं.
-
परजीवी, बोझ, फेल प्रोडक्ट... NDTV World Summit में PM मोदी ने कांग्रेस को घेरा -
PM Modi in NDTV World Summit : बदलते वर्ल्ड ऑर्डर में भारत की क्या भूमिका? PM मोदी ने बताया -
PM Modi Speech: Rahul Gandhi पर PM मोदी क्या-क्या बोले? | NDTV World Summit 2026 -
फेल प्रोडक्ट लॉन्च कर रही कांग्रेस, इतनी तो लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा से भी नहीं होती; NDTV वर्ल्ड समिट में PM मोदी -
NDTV World Summit के मंच से कौन से नए खेल का जिक्र कर गए मोदी...! -
'मत्स्य न्याय' के उदाहरण से पीएम मोदी ने UN पर क्या कुछ कह दिया? -
तब बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है... PM मोदी का NDTV वर्ल्ड समिट से दुनिया को संदेश -
PM Modi Speech: Covid-19 का जिक्र कर PM मोदी ने बताई भारत की ताकत! कही ये बातें | NDTV India -
'मौजूदा चुनौतियों के सामने संयुक्त राष्ट्र की सीमाएं साफ दिख रही हैं', NDTV World Summit में बोले PM मोदी -
भारत क्या पाकिस्तान से अच्छे संबंध चाहता है? NDTV World Summit में जयशंकर का जवाब
सिल्कयारा में हम आवाज सुन सकते थे... लेकिन यहां सब शांत है
सिल्कयारा सुरंग प्रोजेक्ट के सीनियर सुपरवाइजर शशी भूषण चौहान ने एक अंग्रेजी वेबसाइट को बताया कि वो एसएलबीसी की साइट पर मौजूद हैं और जिंदगी ने उन्हें एक बार फिर ऐसी जगह ला कर खड़ा कर दिया है. इस बार उनके लिए अलग चुनौती है क्योंकि यह सुरंग केवल 33 फीट चौड़ी है और बार-बार इसमें पानी और कीचड़ जमा हो रहा है. वहीं सुरंग में फंसे लोगों से किसी भी तरह का संपर्क नहीं साधा जा रहा है.
उन्होंने बताया कि सुरंग के अंदर से उन्हें किसी तरह की आवाज नहीं आ रही है और पानी और कीचड़ बचाव अभियान को मुश्किल बना रहा है. सुरंग के अंदर फंसे लोग एकदम चुप हैं और ऐसी परिस्थितियों में ये चुप्पी डराने वाली होती है. लेकिन चौहान और उनकी टीम नवयुग समूह के एक मैकेनिक और औद्योगिक फैब्रिकेटर हैं जो उम्मीद पर कायम हैं और फंसे हुए श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए डटे हुए हैं.
उन्होंने कहा, हम वैसे ही टीमवर्क कर रहे हैं जैसे हमने सिल्कयारा में किया था. हम सभी एक ही मकसद से आगे बढ़ रहे हैं. लेकिन यहां एक बहुत बड़ा अंतर है. सिल्कयारा में हम उन्हें सुन सकते थे. हमें पता था कि वो अंदर फंसे हुए हैं और उनके जहन में एक उम्मीद है. यहां किसी तरह की आवाज नहीं है. न कोई आवाज, न शोर, न ही किसी तरह का सिग्नल. इस वजह से चीजें और मुश्किल हो जाती हैं. हमें उनकी कंडीशन का कोई अंदाजा नहीं है और इस वजह से हर बीतता हुआ पल परिस्थितियों को और मुश्किल बना रहा है.
वहीं एक अन्य बचाव कार्यकर्ता ने बताया कि यह मिशन क्यों इतना चुनौतीपूर्ण है. उन्होंने कहा, "जिस मशीन का हमने सिल्कयारा में इस्तेमाल किया था, उसका यहां इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. यहां बहुत ज्यादा पानी और कीचड़ है. जमीन बहुत अनप्रिडिक्टिबल है. हम पानी हटाते हैं और तुरंत ही और पानी आ जाता है. हम कीचड़ साफ करते हैं और फिर दोबारा कीचड़ हो जाता है और हर एक कदम जो हम आगे बढ़ा रहे हैं वो हमें वापस पुरानी जगह पर ही ले जाता है."
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं