- शशि थरूर ने कहा कि संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति देता है, लेकिन हिंसा की अनुमति नहीं देता
- उन्होंने सरकार और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की और गवर्नमेंट चेंज की बात की है
- थरूर ने विपक्ष की एकता पर जोर दिया और कहा कि विभिन्न विचारधाराओं को मिलकर काम करना होगा
कांग्रेस के सीनियर नेता शशि थरूर ने बीते कुछ समय से चल रहे प्रदर्शनों पर बात की है. इसके अलावा प्रशांत भूषण और नेहा बोरा जैसे लोगों की ओर से रिजीम चेंज की बात करने और फिर कांग्रेस की ओर से भी ऐसा कहने पर जवाब दिया है. उनसे सवाल पूछा गया था कि आप रिजीम चेंज वाली बातों पर क्या कहेंगे. इस पर शशि थरूर ने कहा कि हमारा संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति देता है. हिंसा की परमिशन नहीं देता है. हम ऐसे ही प्रदर्शन के पक्ष में हैं. लेकिन हम यह भी चाहेंगे कि सरकार भी अपनी जवाबदेही तय करे. इसके अलावा चुनाव आयोग को भी गंभीरता दिखानी होगी.
उन्होंने NDTV वर्ल्ड समिट में कहा कि हर भारतीय का संवैधानिक अधिकार है कि वह अपना मत डाल सके. ऐसी व्यवस्था हो जाए और फिर जो चुनाव हो, उसमें गवर्नमेंट चेंज की बात हो. मैं रिजीम चेंज नहीं बल्कि गवर्नमेंट चेंज की बात करूंगा. कांग्रेस सांसद ने कहा कि हर भारतीय का वोट देने का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए. फिर यदि अच्छे से चुनाव हुआ तो फिर देखा जाएगा कि किसकी सरकार बनती है. आखिर कांग्रेस को लेफ्ट की जरूरत क्यों पड़ी है? इसके जवाब में शशि थरूर ने कहा कि ऐसा समय आता है, जब विपक्ष को एक होने की जरूरत पड़ती है.
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तिरुअनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा कि 1977 में आरएसएस और सोशलिस्ट दलों के बीत एकता दिखी थी. अभी विपक्ष को एक होने की जरूरत है. ऐसे में अलग विचारधाराओं के लोग भी साथ दिखते हैं. इस दौरान शशि थरूर ने विदेश नीति पर बात की और चीन को लेकर भी चर्चा की. उन्होंने चीन के साथ जारी भारत के कारोबार को लेकर सवाल उठाया और कहा कि हम चीन से बड़े पैमाने पर आयात कर रहे हैं. यह बढ़ता ही जा रहा है. हम चीन से 118 अरब डॉलर का आयात करते हैं और उसको हमारा निर्यात 12 अरब डॉलर के करीब ही है. यह हमारे लिए चिंता की बात है. अहम बात यह है कि हमारा कारोबार ऐसे देश के साथ ज्यादा बढ़ रहा है, जो कभी हमारे हित में नहीं रहा है.
शशि थरूर ने वर्ल्ड ऑर्डर पर भी बात की, बोले- रूस और चीन ने दिखाई ताकत
विदेश राज्य मंत्री रहे शशि थरूर ने अपनी स्पीच में वर्ल्ड ऑर्डर को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में जो चीजें थीं, अब वे काम नहीं आ रही हैं. देश और दुनिया तेजी से बदल रहे हैं. हमें अब देखना होगा कि विकल्प क्या हो सकते हैं. अमेरिका की ताकत को चुनौती मिली है. रूस मजबूती से उभरा है और यूरोप को चैलेंज दे रहा है. इसके अलावा चीन भी दुनिया में एक अहम धुरी बना है. इस तरह वर्ल्ड ऑर्डर में तेजी से बदलाव आ रहे हैं.
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