- पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में आधिकारिक मंजूरी प्रदान की है.
- 58 विधायकों ने तृणमूल कांग्रेस से बगावत कर नई विपक्षी टीम गठित की है जिसमें ऋतब्रत बनर्जी नेता हैं.
- बागी विधायकों ने विधानसभा में विपक्ष के लिए पांच सीटों के लिए नामों का अनुमोदन कर प्रस्ताव स्पीकर को सौंपा.
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर सियासी संकट गहरा गया है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है. विधानसभा स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मान्यता दे दी है. इससे पहले ममता बनर्जी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को इस पद के लिए नामित किया था. लेकिन पार्टी के भीतर विरोध सामने आ गया. करीब 80 में से 60 विधायकों ने शोभनदेब को नेता प्रतिपक्ष मानने से इंकार कर दिया. इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायकों ने स्पीकर से मुलाकात कर खुद को असली गुट बताया और उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग की.
ममता बनर्जी हमारी मुख्य सलाहकार बनें: ऋतब्रत बनर्जी
TMC से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस का यह दो-तिहाई मज़बूत विधायी दल 'मैं' में विश्वास नहीं रखता, यह 'हम' में विश्वास रखता है. जो भी नियम बनाए गए हैं, हमने हर नियम का पालन किया है, और इसीलिए हमें 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर स्वीकार किया गया है. हम चाहते हैं कि ममता बनर्जी हमारी मुख्य सलाहकार बनें, और हमें ऐसी सलाह दें जिससे हमें विपक्ष के तौर पर अपनी स्थिति मज़बूत करने में मदद मिले. 80 सदस्य तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुने गए थे. उनमें से दो-तिहाई से ज़्यादा सदस्यों ने अपना दावा पेश किया है, और उस दावे को स्वीकार कर लिया गया है.
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#WATCH | कोलकाता, पश्चिम बंगाल | TMC से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, "18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस का यह दो-तिहाई मज़बूत विधायी दल 'मैं' में विश्वास नहीं रखता, यह 'हम' में विश्वास रखता है। जो भी नियम बनाए गए हैं, हमने हर नियम का पालन किया है, और… pic.twitter.com/BcexvZjCXH
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 3, 2026
हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के एक महीने बाद तृणमूल कांग्रेस में विभाजन की खबर अब आधिकारिक हो गई है. विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने पार्टी से निष्कासित विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा के नेतृत्व में बगावत कर दी है.
नए प्रस्ताव पर 58 विधायकों के हस्ताक्षर
बुधवार को विधानसभा में एक नया प्रस्ताव पेश किया गया, जिस पर इन 58 विधायकों के हस्ताक्षर थे. इसमें दावा किया गया कि वे ही तृणमूल कांग्रेस के असली प्रतिनिधि हैं. इस प्रस्ताव में हावड़ा जिले की उलुबेरिया (पूर्व) विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) नामित किया गया है. इसी प्रस्ताव में तृणमूल कांग्रेस के विधायकों को विपक्ष का उप नेता नामित किया गया है. इनमें उत्तरी कोलकाता की एंटाली विधानसभा सीट से संदीपान साहा, पश्चिम मेदिनीपुर जिले के केशपुर से शिउली साहा और दक्षिण 24 परगना जिले के कस्बा से जावेद अहमद खान शामिल हैं.
जिन 58 विधायकों के हस्ताक्षर इस प्रस्ताव पर थे, वे सभी सुबह से एक-एक करके विधानसभा परिसर में पहुंचने लगे. इसके बाद बागी विधायकों की एक आपात बैठक हुई, जिसमें विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित पांच सीटों के लिए पांच नामों का अनुमोदन किया गया. इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायक स्पीकर के कक्ष में गए और प्रस्ताव प्रस्तुत किया. स्पीकर ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया.
पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर के कार्यालय को एक पत्र भेजा था. इसमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष (एलओपी), नैना बंदोपाध्याय और असीमा पात्रा को विपक्ष की दो उप नेता और फिरहाद हकीम को विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के विधायी दल का मुख्य सचेतक नामित किया गया था.
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