
दुनिया में भारत (India) की सबसे जहरीली हवा (Toxic Air) को साफ करने की कोशिश में लाखों पुरानी प्रदूषणकारी कारों को सड़कों से हटाने की भारत की योजना को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. हालिया नये सर्वेक्षण (Survey) में दावा किया गया है कि ज्यादातर वाहन मालिक अपने वाहन की उम्र पूरी होने पर उसे स्क्रैप करने में दिलचस्पी नहीं रखते हैं, जिसकी वजह से प्रदूषण जारी रहता है.
ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक लोकल सर्किल ने 10,543 वाहन मालिकों का सर्वेक्षण किया, जिसमें से करीब 57% वाहन मालिकों का कहना है कि कार को सड़क पर चलने से हटाया जाना चाहिए या नहीं, यह वाहन की उम्र के बजाय ओडोमीटर पर दर्ज किलोमीटर से तय होना चाहिए. मतलब कि कार कितनी चली है. बताते चलें कि सरकार ने पिछले साल तय किया था कि 20 साल से अधिक पुराने निजी वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने वाणिज्यिक वाहनों को सड़क चलाने के लिए फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा.
इसके अलावा, सर्वेक्षण में शामिल आधे से ज्यादा उपभोक्ताओं ने कहा कि वे अपनी कारों की संख्या को कम करने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि भारत की कैश-फॉर-क्लंकर नीति पुराने वाहन को रखना ज्यादा महंगा बना देगी. अधिकारियों ने अप्रैल से ऑटो फिटनेस टेस्ट को और ज्यादा महंगा बना दिया है, 15 साल से अधिक पुरानी कारों के मालिकों को अब अपने रजिस्ट्रेशन को रिन्यू करने के लिए आठ गुना ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है.
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प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों से छुटकारा पाने में जनता की दिलचस्पी की कमी 2070 तक शुद्ध कार्बन शून्य करने की भारत की महत्वाकांक्षाओं के लिए एक संभावित झटका है. भारत के लिए पुरानी कारों का रीसाइक्लिंग उत्सर्जन में कटौती करने के लिए बहुत अहम है, क्योंकि बिजली के वाहनों को ले जाना चार्जिंग नेटवर्क की कमी और महंगे इलेक्ट्रिक वाहनों के कारण पिछड़ रहा है. देश के विज्ञान और पर्यावरण केंद्र ने भविष्यवाणी की है कि 2025 तक, भारत में ऐसे करीब 20 मिलियन (2 करोड़) पुराने वाहन होंगे जिनकी उम्र पूरी हो चुकी होगी और इससे पर्यावरण को भारी नुकसान होगा.
पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार ने कहा है कि वह उम्मीद करती है कि उनके कार्यक्रम 100 अरब रुपये (1.3 अरब डॉलर) से ज्यादा के नए निवेश को आकर्षित करेगे और धातुओं के लिए अन्य देशों पर भारत की निर्भरता को कम करेंगे. मोदी ने कहा है कि भारत में पुराने वाहनों को स्क्रैप करना इस समय उत्पादक नहीं है क्योंकि कीमती धातुओं की रीसाइक्लिंग नहीं की जाती है, जिससे ऊर्जा की रिकवरी भी नहीं होती है.
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