दक्षिण कश्मीर का पुलवामा, जो कभी आतंकवाद से जूझा करता था, वहां आज भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने अपना पहला ऑफिस खोला है. BMS, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा है. यह घाटी में RSS से जुड़े किसी संगठन का पहला ऑफिस है.
BMS के कश्मीर प्रभारी समीर कुचाय के मुताबिक, दफ्तर खोलने से पहले ही संघ ने घाटी में जमीन तैयार कर ली थी. उनके अनुसार घाटी में 20 मजदूर यूनियनों से जुड़े लगभग 30,000 मजदूर BMS से जुड़ चुके हैं और संगठन का विस्तार लगातार हो रहा है.
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कुचाय ने बताया कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद ही हालात में यह बदलाव संभव हो पाया है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों से वे कश्मीर में बिना किसी डर के काम कर रहे हैं.
हालांकि, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) सहित RSS से जुड़े कई अन्य संगठन पहले से ही घाटी में चुपचाप काम कर रहे थे, लेकिन अब एक पब्लिक ऑफिस का खुलना यह दिखाता है कि संघ कश्मीर में अपनी संगठनात्मक उपस्थिति को खुलकर दिखाने में ज्यादा सहज महसूस कर रहा है.
RSS मुस्लिम विरोधी संगठन नहीं हैः समीर
पुलवामा मुस्लिम बहुल इलाका है. यहां BMS के समीर लोगों को बता रहे हैं कि RSS कोई मुस्लिम-विरोधी संगठन नहीं है और इसके बारे में बनी धारणाएं गलत हैं.
समीर ने कहा, 'मैं खुद एक मुस्लिम हूं और मैं आपको बता सकता हूं कि मुस्लिम समुदाय से होने के कारण मुझे कभी भी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा. मुझसे हमेशा यही पूछा जाता था कि इंसानियत की सेवा कैसे की जाए और राष्ट्र निर्माण के लिए कैसे काम किया जाए. RSS को समझने के लिए आपको खुद इसमें काम करना होगा.'
समीर का कहना है कि कश्मीर में एक 'वैचारिक बदलाव' आया है और उनके संगठन से लगातार अधिक लोग जुड़ रहे हैं.
समीर कुचाय ने कहा, 'कश्मीर में वैचारिक बदलाव आया है. 2019 से पहले यहां हालात बहुत मुश्किल थे. अब लोगों को समझ आ गया है कि हमारे बच्चों के हाथों में पत्थर और बंदूकें नहीं, बल्कि कलम होनी चाहिए.'
समीर बताते हैं कि वे सोशल मीडिया के जरिए RSS से जुड़े और सरसंघचालक मोहन भागवत से प्रेरित हुए.

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कश्मीर में मौजूदगी बढ़ा रहा RSS
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद, RSS और उससे जुड़े संगठनों ने कश्मीर में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है. 'मुस्लिम राष्ट्रीय मंच' ने स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर श्रीनगर के लाल चौक पर कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं.
बुधवार को, RSS ने 'जम्मू-कश्मीर डेवलपमेंट फाउंडेशन' और 'अल रहीम ट्रस्ट' के साथ मिलकर श्रीनगर में 'असलुक आलाव' (एक नेक पहल) के बैनर तले एक सम्मेलन आयोजित किया.
BJP ने बताया कि इस कार्यक्रम का मकसद व्यापारियों, युवा नेताओं, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और प्रमुख हस्तियों को एक मंच पर लाना था, ताकि बातचीत को बढ़ावा दिया जा सके और सामाजिक सद्भाव कायम हो सके.
कार्यक्रम में बोलते हुए, RSS नेता राम लाल ने कहा कि कश्मीर में एक साथ मिल-जुलकर रहने की ऐतिहासिक संस्कृति रही है, जहां सनातनी और सूफी संत एक-दूसरे के साथ रहते आए हैं. उन्होंने लोगों से बाहरी दुनिया के प्रभाव में न आने की अपील की और कहा कि हिंसा से कभी लोगों को जोड़ा नहीं जा सकता.
राम लाल ने कहा, 'मैं देख रहा हूं कि हम कितनी आसानी से बातचीत कर रहे हैं. मैं RSS से जुड़ा हूं, और मैंने देखा कि यह कार्यक्रम कितने सुचारू रूप से संपन्न हुआ. हमने यहां सबकी बातें सुनीं. लोग कश्मीर के बारे में अपनी अलग धारणा बना लेते हैं, और ठीक वैसे ही वे RSS के बारे में भी बिना उसे जाने-समझे बातें करते हैं.'
उन्होंने आगे कहा, 'कश्मीर ने आतंकवाद और हिंसा का एक कठिन दौर देखा है, लेकिन अब लोग समझ गए हैं कि आतंकवाद और हिंसा से शांति या समृद्धि नहीं आ सकती.'
उन्होंने कहा कि कश्मीरी लोग यह बात समझ गए हैं, और यह बहुत खुशी की बात है. मैं कश्मीर के लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं, और उन्हें बाहरी लोगों के बहकावे में नहीं आना चाहिए.
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