- कांग्रेस ने दिल्ली में CEC ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ गुपचुप रणनीति से जोरदार प्रदर्शन आयोजित किया.
- इंडिया गठबंधन के कई सांसद सागर रत्ना रेस्टोरेंट में कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के नेतृत्व में लंच में शामिल हुए.
- लंच के बाद सांसदों को बिना जानकारी बसों में बिठाकर जनपथ से विभिन्न स्थानों पर धरना प्रदर्शन के लिए ले जाया गया
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन का दौर जारी है. बीते दो दिन से दिल्ली में कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला. इस प्रदर्शन की रणनीति बेहद गुपचुप रही. अचानक धप्पा मारने वाली नीति के तहत कांग्रेस ने प्रदर्शन किया. बुधवार को कनॉट प्लेस के एक रेस्टोरेंट में इंडिया गठबंधन के सांसदों के लिए दिन के खाने पर एक बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में इंडिया गठबंधन के सैकड़ों सांसद शामिल हुए. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ये लंच आयोजित किया था. पहले योजना थी कि ब्रेकफ़ास्ट मीटिंग करेंगे मगर उसे लंच में बदल दिया गया. जितने भी सांसद दिल्ली में मौजूद थे वो वहां पहुंचे. करीब 150 सांसद वहां पहुंचे थे, मगर समाजवादी पार्टी का कोई भी सांसद वहां नहीं मौजूद नहीं था.
सागर रत्ना में लंच और फिर बसों से निकले सांसद
जब NDTV ने कांग्रेस के नेताओं से बात की तो उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम देर रात बना था और समाजवादी पार्टी के नेताओं को देर से जानकारी दी गई थी इसलिए वो इसमें शामिल नहीं हो सके. एनडीटीवी के रिपोर्टर होने के नाते मैं सबसे पहले वहां पहुंचा और उस रेस्टोरेंट सागर रत्ना के मैनेजर से बात की. उन्होंने बताया कि यहां कम से कम एक समय में दौ सौ लोग बैठ कर खाना खा सकते हैं.
खैर इन सब के बाद लंच भी हो गया. सबसे पहले कांग्रेस अध्यक्ष खरगे आए फिर राहुल और प्रियंका गांधी. लंच के बाद किसी को मालूम नहीं था कि क्या होने वाला है? खाने के बाद सांसदों को कहा गया कि आप लोग बसों में बैठ जाएं. बसें एसी वाली थीं इसलिए किसी को दिक्कत नहीं हुई.

सागररत्ना रेस्टोरेंट से लंच के बाद बस में सवार होकर निकलतीं प्रियंका गांधी, अगली सीट पर राहुल और खरगे.
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बस में बैठे सांसदों को भी नहीं पता था आगे क्या होना है?
NDTV ने बस में बैठे कुछ सांसद से फोन पर बातचीत की कि आपलोग कहां जा रहे हैं तो उन्होंने कहा कि हमें मालूम नहीं. हमें केवल बस में बैठने के लिए कहा गया है. चूंकि मीडिया को बस में नहीं जाने दिया जा रहा था इसलिए हमने इन सांसदों से फोन पर ही बातचीत की.
ली मेरेडियन के पास पहुंचीं तीनों बसें और वहीं शुरू हुआ धरना
इसके बाद तीन बसों का काफिला जनपथ से निकला. एक बस ऐसी थी, जिसमें सबसे पहली सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बैठे थे और उनकी बगल में राहुल गांधी और उसके पीछे प्रियंका गांधी. ये तीनों बसें जनपथ से निकलती हैं, आगे बढ़ती रहती हैं. पुलिस भी इन्हें जाने देती है. लेकिन जैसी ही ये बसें विंडसर पैलेस या कहें नेशनल मीडिया सेंटर या कहें ली मेरेडियन के पास या कहें महिला प्रेस क्लब के गोलंबर पर पहुंचती हैं, पुलिस ने बैरिकेड लगा रखा होता था.
फिर बस से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ कांग्रेस के सांसद नीचे उतरते हैं. वहीं पर धरना शुरू हो जाता है. होता ये है कि यूथ कांग्रेस, NSUI के कार्यकर्ताओं के अलावा महिला कांग्रेस का भी एक जत्था साथ-साथ चल रहा होता है और साथ में होते हैं सैंकड़ों पत्रकार भी. सैकड़ों इसलिए कह रहा हूं कि आजकल मेनस्टीम मीडिया के अलावा बहुत संख्या में यूट्यूबर भी होते हैं.

हाथों में संविधान की कॉपी लिए सड़क पर लेटीं प्रियंका गांधी.
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संविधान की कॉपी लिए सड़क पर धरने पर बैठीं प्रियंका
मैं भी उसी भीड़ का हिस्सा था. जब पुलिस ने चौराहे पर बसों को आगे नहीं जाने दिया तब राहुल और प्रियंका गांधी बस से उतरते हैं और वहीं पर धरना देने लगते हैं. आनन-फानन में प्रियंका गांधी को किसी ने लाल रंग के संविधान की कॉपी पकड़ा दी और वो वहीं धरने पर बैठ गई. राहुल गांधी वहीं उसी के सामने तब तक खड़े रहे जब तक प्रियंका को पुलिस ने हिरासत में नहीं ले लिया और उसके बाद राहुल को भी हिरासत में लिया गया.
पुलिस के साथ-साथ ITBP, BSF के अलावा CRPF के जवान भी तैनात
जब ये सब हो रहा था, तब वहां पर दिल्ली पुलिस के अलावा ITBP, BSF के अलावा CRPF और रेपिड एक्शन फोर्स के जवान भी मौजूद थे. प्रियंका गांधी जमीन पर लेट जाती हैं और उनके हाथ में संविधान की कॉपी होती है फिर पुलिस का एक्शन शुरू होता है. सबके ऊपर बल प्रयोग होता है. पत्रकार भी अछूते नहीं रहते. मगर हम जानते हैं कि ये हमारे काम का हिस्सा है इसलिए हम उससे बचते हैं और अपना काम भी करते हैं. पुलिस राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लेती है और अलग-अलग जगह ले जाती है.
आंदोलन लीड करती दिखीं प्रियंका
पिछले दो दिनों के धरना-प्रदर्शन चाहे वो आकाशवाणी भवन हो या अशोक रोड का गोलंबर... एक तरह से प्रियंका गांधी ही आंदोलन को लीड कर रही थीं. वो जमीन पर लेटीं थी और राहुल गांधी उनकी सुरक्षा में खड़े थे. जितने भी फोटो वहां से आए सबमें यही देखने को यही मिला. प्रियंका गांधी बुधवार को हुए आंदोलन को लीड कर रही थीं. शायद राहुल गांधी को भी अंदाजा नहीं था कि वो सड़क पर संविधान की कॉपी लेकर लेट जाएगीं.
कहने का मतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में प्रियंका सबसे आगे हैं. यही वजह है कि उनको देखकर बाकी महिला सांसद भी जोश में थीं. सारी महिला सांसद आज के प्रदर्शन में स्पोर्ट्स शूज पहन कर आईं थीं. उन्हें अंदाजा था कि पुलिस एक्शन होगा.

आकाशवाणी भवन के धरने में भी थी प्रियंका
प्रियंका गांधी भले ही पहली बार की सांसद हो वो मगर राहुल गांधी के साथ हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर कर चलती हैं. चाहे वो आकाशवाणी भवन का धरना हो वहां भी वो बस में बैठ गई थी. मगर जैसे ही उन्हें मालूम चला कि राहुल गांधी आकाशवाणी भवन के अंदर चले गए हैं वो फौरन वहां आ गईं और तब तब बैठी रही जब तक पुलिस ने दोनों को हटा नहीं दिया. बुधवार को भी यही हुआ. पुलिस राहुल और प्रियंका को हिरासत में लेकर अलग-अलग जगह ले कर जाती है. मगर अगली सुबह वो इकट्ठे होकर फिर प्रर्दशन करने आ जाते हैं.
यूपी, पंजाब चुनाव में भी प्रियंका की दिखेगी भूमिका
आने वाले दिनों में उत्तरप्रदेश के चुनाव में भी आपको यही भूमिका देखने को मिलेगी. जब अखिलेश यादव से सीटों के बंटवारे की बातचीत होगी. तब प्रियंका गांधी की भूमिका काफी अहम होगी. यही नहीं पंजाब में भी यही देखने को मिलेगा, क्योंकि कांग्रेस में प्रियंका की एक स्वीकारिता है जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता हैं.
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