- कांग्रेस ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने का ऐलान किया है
- भाजपा ने भी एक नवंबर से पूरे महीने पदयात्राएं शुरू करने का फैसला किया है जिसमें बड़े नेता शामिल होंगे
- पदयात्राओं का मुख्य फोकस चुनावी राज्यों यूपी, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना है
कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष की एक नवंबर को रैली होने वाली है. इससे पहले SIR, पेपर लीक समेत कई मसलों पर कांग्रेस लगातार सड़कों पर उतर रही है. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कई सीनियर नेता कई बार हिरासत में भी लिए गए हैं. इसके अलावा कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले भी प्रदर्शन बीच-बीच में हुए हैं. इस बीच भाजपा भी शायद तय कर चुकी है कि वह बैकफुट पर नहीं जाएगी. यही वजह है कि भाजपा भी एक नवंबर से ही पदयात्राओं की शुरुआत कर रही है. विपक्ष की रैली और उसके बाद प्रदर्शनों के प्लान के काउंटर के तौर पर भाजपा की यह तैयारी है.
सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने 1 नवंबर से विपक्ष के काउंटर में पदयात्राएं शुरू करने का फैसला लिया है. ऐसी यात्राएं पूरे महीने चलेंगी. इन पदयात्राओं में होम मिनिस्टर अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री और राज्यों के सीएम शामिल होंगे. भाजपा की तैयारी को इससे समझा जा सकता है कि पूरे महीने ही उसकी पदयात्राएं होंगी. खासतौर पर यूपी, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा जैसे चुनावी राज्यों में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में भी भाजपा को इससे मदद मिलेगी. 2 नवंबर को गृह मंत्री अमित शाह हैदराबाद में होने वाली पदयात्रा में शामिल होंगे. इसके अलावा 5 नवंबर को हरियाणा के आयोजन में भी वह रहेंगे.
विपक्षी INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली का ऐलान किया है. वहीं भाजपा ने भी इसी दिन से पदयात्राओं का फैसला लिया है. पहले दिन भाजपा सिखों को भी साथ लेकर प्रदर्शन करेगी. खासतौर पर पंजाब में उसकी रैली होगी. दरअसल भाजपा ने पहले ही कांग्रेस पर 1 नवंबर की तारीख को लेकर हमला बोला था. उसका कहना था कि इसी दिन सिखों का नरसंहार हुआ था और उसी दिन कांग्रेस रैली करने जा रही है. यह सिखों का अपमान है.
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सिख फैक्टर को ध्यान में रखकर पंजाब से शुरुआत?
ऐसे में भाजपा की पदयात्राओं की उसी दिन से शुरुआत होना सिखों को लुभाने के तौर पर देखा जा रहा है. सूत्रों का कहना है कि यूपी, उत्तराखंड और पंजाब में भाजपा फोकस अधिक रहेगा. इन राज्यों में वरिष्ठ मंत्री, संगठन के नेता और अन्य लोगों को तैनात किया जाएगा. इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को जुटाकर यह संदेश भी देने की कोशिश होगी कि भाजपा सरकार पर अब भी लोगों का भरोसा कायम है.
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