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जोड़ी है तो जीत है? पंजाब में साथ आ सकते हैं बीजेपी-अकाली दल, हिट दिख रहा ये फॉर्मूला

बीजेपी अमूमन शहरी और अकाली दल ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव लड़ता आया है. इस बार अकाली दल सेमी अर्बन सीटों पर भी चुनाव लड़ने की योजना बना रहा है, जहां बीजेपी मजबूत मानी जाती है.

जोड़ी है तो जीत है? पंजाब में साथ आ सकते हैं बीजेपी-अकाली दल, हिट दिख रहा ये फॉर्मूला
  • पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल गठबंधन कर सकते हैं.
  • बीजेपी और अकाली दल का मानना है कि अलग-अलग चुनाव लड़ने से दोनों को नुकसान हुआ है इसलिए फिर से साथ आ सकते हैं
  • दोनों दलों के पिछले चुनावी आंकड़ों के अनुसार मिलकर लड़ने पर वे सरकार बनाने के लिए बहुमत ला सकते हैं.
चंडीगढ़:

पंजाब में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर सहमति करीब-करीब बन चुकी है. सूत्रों के अनुसार सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा अंतिम दौर में है और इस बारे में जल्दी ही घोषणा हो सकती है. बीजेपी राज्य की 117 में से 35-45 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. बाक़ी सीटों पर अकाली दल और कुछ अन्य छोटे दल चुनाव लड़ेंगे.  अकाली दल के सूत्रों के अनुसार दोनों पार्टियों ने अलग चुनाव लड़कर देख लिया है. ये तय हो चुका है कि अलग-अलग लड़ने में दोनों का ही नुकसान है. इसलिए एक बार फिर से दोनों दल साथ आ सकते हैं.

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस समझौते की घोषणा में अधिक देरी नहीं होनी चाहिए. उनके अनुसार इसमें जितनी देरी होगी, गठबंधन को जमीन पर उतारने में उतनी ही अधिक चुनौती होगी. अकाली दल नेता ये भी कहते हैं कि बीजेपी को उन्हीं सीटों पर प्राथमिकता दी जाएगी, जहां वह मजबूत स्थिति में है. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 45 सीटों पर अकाली दल से आगे रही थी.

सूत्रों के अनुसार यह तय है कि गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में अकाली दल ही रहेगा. गठबंधन के जीतने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद पर भी अकाली दल का ही मजबूत दावा होगा. अकाली दल अपने से बिखरे धड़ों को साथ लाने में भी जुटा है. उन पुराने नेताओं को वापस लाने पर चर्चा की जा रही है, जो मनमुटाव के कारण पार्टी छोड़ चुके हैं.

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हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने ये कह कर गठबंधन की संभावना बढ़ा दी है कि पंजाब में एनडीए की सरकार बनेगी. अभी तक बीजेपी नेता दावा करते आ रहे थे कि राज्य में बीजेपी की सरकार बनेगी. बीजेपी का अपना आकलन है कि अगर दोनों दल एक साथ आते हैं तो राज्य में सरकार बना सकते हैं. सूत्रों के अनुसार बीजेपी के आंतरिक सर्वे में यह बात सामने आई है कि बीजेपी और अकाली दल अगर मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो राज्य की 117 में से 80 से अधिक सीटें जीत सकते हैं.

बीजेपी नेता कहते हैं कि पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव के परिणाम इस बात की गवाही देते हैं कि बीजेपी और अकाली दल अपने-अपने इलाकों में मजबूत हैं और अगर वे साथ आते हैं तो पहले की तरह फिर सरकार बना सकते हैं.

गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में अकाली दल को करीब 18 लाख यानी 13.42 प्रतिशत वोट मिले. वहीं बीजेपी को 25 लाख यानी 18.56 प्रतिशत वोट मिले. अगर दोनों पार्टियों के वोटों को मिला दिया जाए तो यह आंकड़ा 43 लाख तक पहुंचता है. वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो तब अकाली दल को 28.61 लाख यानी 18.38 प्रतिशत वोट मिले थे. इसमें बीएसपी के वोट नहीं जोड़े गए, जिसके साथ अकाली दल ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था, जबकि बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को 12 लाख यानी 8 प्रतिशत वोट मिले थे. यानी पिछले विधानसभा चुनाव में अकाली और बीजेपी को वोट मिला दें तब भी यह आंकड़ा करीब 41 लाख तक पहुंचता है.

बीजेपी नेताओं के अनुसार पिछला लोकसभा और विधानसभा चुनाव का परिणाम यह दिखाता है कि अकाली दल और बीजेपी की संयुक्त ताकत करीब चालीस लाख वोट की है. वहीं इसकी तुलना आम आदमी पार्टी और कांग्रेस से की जाए तो दिलचस्प तस्वीर बनती है. आप ने 2022 के विधानसभा चुनाव में 65.38 लाख वोट यानी 42 प्रतिशत के साथ 92 सीटें जीती थीं. वहीं कांग्रेस को 35.76 लाख यानी 22.98 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि 2024 लोकसभा चुनाव में आप के वोट घटकर 35.43 लाख यानी 26.30 प्रतिशत रह गए. वहीं कांग्रेस के वोट 35.06 लाख यानी 26.02 प्रतिशत थे. बीजेपी नेताओं के अनुसार ये आंकड़ें बताते हैं कि त्रिकोणीय मुकाबले में बीजेपी और अकाली गठबंधन का पलड़ा भारी रहेगा.

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बीजेपी अकाली दल के साथ गठबंधन में 117 में से केवल 23 सीटों पर ही लड़ती आई है. पिछले लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर बीजेपी इस बार अधिक सीटों का दावा कर रही है. 2024 के लोक सभा चुनाव में बीजेपी को 18.56 प्रतिशत वोट मिले थे. बीजेपी को 23 विधानसभा सीटों पर बढ़त थी. छह सीटों पर वह दूसरे और 16 सीटों पर तीसरे नंबर पर आई थी. इस तरह 45 विधानसभा सीटों पर वह अकाली दल से आगे रही.

वहीं अकाली दल को 13.42 प्रतिशत वोट मिले थे और उसे एक सीट पर जीत मिली थी. अकाली दल नौ विधानसभा सीटों पर पहले नंबर पर, पांच पर दूसरे और पांच पर ही तीसरे नंबर पर रहा था. इस तरह दोनों दलों के मिलाकर करीब 32 प्रतिशत वोट मिले और 64 सीटों पर उपस्थिति दर्ज कराई. बीजेपी का आकलन है कि अगर दोनों दल साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़े होते तो यह गठबंधन 57 विधानसभा सीटों पर बढ़त ले सकता था, जो बहुमत के आंकड़े से केवल दो कम है.

यानी दोनों दलों के साथ आने पर उन्हें फ़्लोटिंग वोट भी मिल सकता है. इसी आधार पर कुछ अतिरिक्त वोट जुड़ने पर यह गठबंधन सत्तारूढ आम आदमी पार्टी को कड़ी टक्कर दे सकता है जो बीजेपी नेताओं के अनुसार सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है.

गौरतलब है कि दोनों दलों के बीच 1996 से 2020 तक गठबंधन रहा. 1997 में इस गठबंधन को प्रचंड विजय मिली थी. तब अकाली दल ने 75 और बीजेपी ने 18 सीटें जीती थीं. 2007 में भी इस गठबंधन को जीत मिली थी. तब अकाली दल ने 49 और बीजेपी ने 19 सीटें जीती थीं. 2012 में लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर इतिहास रचा था. तब अकाली दल ने 56 और बीजेपी ने 12 सीटों पर जीत हासिल की थी. ऐसे में यह गठबंधन एक बार फिर कागज पर मजबूत दिखाई दे रहा है.

सूत्रों के अनुसार दोनों दलों में इसी ज़मीनी हकीकत को सामने रख साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर चर्चा हो रही है. दरअसल दोनों दल अकेले लड़कर देख चुके हैं कि वे चुनावी सफलता हासिल नहीं कर पा रहे.

एक पेंच यह भी है कि किस सीट पर किस दल का उम्मीदवार होगा. अमूमन बीजेपी शहरी और अकाली दल ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव लड़ता आया है. इस बार अकाली दल सेमी अर्बन सीटों पर भी चुनाव लड़ने की योजना बना रहा है, जहां बीजेपी मजबूत मानी जाती है. ऐसे में दोनों दलों को इन सीटों को लेकर भी सहमति बनानी होगी.

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