नोएडा में 13 अप्रैल को हुए मजदूरों के विरोध प्रदर्शन और उसके बाद हुई हिंसा व आगजनी मामले को लेकर जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. अब तक की कार्रवाई में सामने आया है कि हिंसा, आगजनी और पथराव में शामिल ज्यादातर आरोपी फैक्ट्री श्रमिक नहीं, बल्कि बाहरी तत्व हैं. पुलिस ने अब तक कुल 66 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 45 श्रमिक नहीं पाए गए हैं.
जांच के मुताबिक, मजदूरों को भड़काने, आगजनी और पथराव करने में संगठित प्रयास किया गया. आगजनी की घटनाओं में 17 लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से 11 को गिरफ्तार किया जा चुका है. इन 11 आरोपियों में 8 ऐसे हैं, जो श्रमिक नहीं हैं. इसी तरह, हिंसा फैलाने के लिए भड़काने के मामलों में 32 लोगों की पहचान हुई है, जिनमें से 19 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं. इसके अलावा, 4 लोगों को मजदूर-कंपनी विवाद में साजिश रचने (षड्यंत्र) के आरोप में अरेस्ट किया गया है.
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खुद को मजदूर बताकर प्रदर्शन में हुए शामिल
सूत्रों के अनुसार, अब तक हुई गिरफ्तारियों में कम से कम 34 ऐसे आरोपी शामिल हैं, जो स्वयं को श्रमिक बताकर हिंसा में शामिल हुए, लेकिन जांच में श्रमिक नहीं निकले. बताया जा रहा है कि गिरफ्तार आरोपियों में से कई के संबंध ‘मजदूर बिगुल' और अर्बन नक्सल नेटवर्क से भी जुड़े पाए गए हैं, जिसकी अलग से जांच चल रही है.
सीएम योगी ने देर रात ली समीक्षा बैठक
इस पूरे खुलासे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मामले की समीक्षा की. अधिकारियों ने सीएम को अब तक की जांच और गिरफ्तारियों की विस्तृत जानकारी दी. बैठक में मुख्यमंत्री ने अफवाह और दुष्प्रचार फैलाने वालों पर तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की सतत और कड़ी मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ सामग्री को तुरंत रोका जा सके.
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गैर-श्रमिक उपद्रवियों की पहचान सार्वजनिक करने के निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि जो लोग मजदूर नहीं हैं, लेकिन श्रमिकों की आड़ में हिंसा फैलाने में शामिल रहे, उनकी पहचान कर तस्वीरें सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित की जाएं, ताकि ऐसे उपद्रवी तत्वों को बेनकाब किया जा सके.
सीएम ने स्पष्ट कहा कि वास्तविक श्रमिकों और उनके अधिकारों को पूरा संरक्षण दिया जाए, लेकिन हिंसा फैलाने वाले बाहरी और साजिशकर्ता तत्वों के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए. फिलहाल नोएडा हिंसा मामले की जांच जारी है और पुलिस व प्रशासन की टीमें नेटवर्क, फंडिंग और संगठित भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही हैं.
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