NDTV World Summit 2026 में आयोजित 'A Region in Flux: Who Will Shape The Middle East's Future?' सत्र में ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत में प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि भारत मध्य पूर्व और फारस की खाड़ी क्षेत्र में शांति स्थापित करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
डॉ. इलाही ने कहा कि भारत के वैश्विक स्तर पर सम्मान, संतुलित कूटनीति और कई देशों के साथ मजबूत संबंध हैं. उन्होंने कहा, 'भारत दुनिया में शांति, सुरक्षा और न्याय स्थापित करने में बहुत अच्छी भूमिका निभा सकता है, खासकर मध्य पूर्व और फारस की खाड़ी में. भारत बहुत, बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है.'
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उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि भारत BRICS जैसे मंचों में प्रमुख भूमिका निभा रहा है और उसने कई वैश्विक नेताओं की मेजबानी की है. भारत के पास क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर गहरी समझ है, जिसके आधार पर वह शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकता है.
'भारत और ईरान एक ही किताब के दो पन्ने'
भारत-ईरान संबंधों का जिक्र करते हुए डॉ. इलाही ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों की मित्रता हजारों साल पुरानी है.
उन्होंने कहा, 'ईरान और भारत के संबंधों का इतिहास करीब 5,000 साल पुराना है. मैं कह सकता हूं कि ईरान और भारत एक ही किताब के एक ही पन्ने के दो चेहरे हैं. ईरान और भारत में कोई अंतर नहीं है.'
ईरानी नेतृत्व को लेकर भी दिया जवाब
सत्र के दौरान ईरानी नेतृत्व और क्षेत्रीय हालात पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए डॉ. इलाही ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता पूरी तरह स्वस्थ हैं और राज्य के मामलों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं. उन्होंने बताया कि हाल ही में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उनसे विस्तृत चर्चा की है.
मानवीय संकट पर जताई चिंता
डॉ. इलाही ने क्षेत्रीय संघर्षों के मानवीय प्रभावों का भी जिक्र किया. उन्होंने मिनाब में एक स्कूल पर कथित बमबारी का जिक्र करते हुए कहा कि कई परिवार अब भी अपने बच्चों की मौत के दर्द से उबर नहीं पाए हैं. उन्होंने इस मुद्दे पर अमेरिका की आलोचना भी की और कहा कि निर्दोष लोगों की जान जाने वाली ऐसी घटनाओं पर जवाबदेही तय होनी चाहिए.
संवाद और विश्वास जरूरी
ईरानी प्रतिनिधि ने कहा कि मध्य पूर्व में स्थिरता और शांति का रास्ता केवल संवाद से निकल सकता है, लेकिन किसी भी बातचीत की बुनियाद पारस्परिक सम्मान और विश्वास पर आधारित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि संतुलित विदेश नीति, खाड़ी देशों से मजबूत रिश्तों और बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा के कारण भारत क्षेत्र में शांति की एक प्रभावशाली आवाज बन सकता है.
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