- जेडीयू ने विधायक अनंत सिंह को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है.
- अनंत सिंह का निलंबन पत्र JDU प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने जारी किया था.
- अब उनके निलंबन पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष के पास यह अधिकार नहीं रहता.
बिहार की मोकामा सीट से बाहुबली विधायक अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड (JDU) से निकाल दिया गया है. उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में रहने के आरोप में 6 साल के लिए निष्कासित किया गया है. इतना ही नहीं उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को भी पत्र लिखा गया है. अनंत सिंह के साथ उनकी पत्नी पूर्व विधायक नीलम देवी को भी निष्कासित किया गया. जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने शनिवार को जदयू कार्यालय से अनंत सिंह को निष्कासित करने का आदेश जारी किया था. लेकिन पार्टी के इस फैसले की संवैधानिकता पर सवाल उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि यह फैसला पार्टी संविधान के खिलाफ लिया गया है. जिससे मामला दिलचस्प हो गया है.
क्या कहता है जदयू का संविधान
जनता दिल्ली यूनाइटेड (JDU) के संविधान में पार्टी नेताओं को निलंबित करने की प्रक्रिया दर्ज है. पार्टी संविधान के मुताबिक जनता दल यूनाइटेड का राष्ट्रीय परिषद किसी भी सदस्य को निलंबित कर सकता है, अगर उसके खिलाफ अनुशासन भंग किए जाने के प्रारंभिक सबूत हैं. पार्टी के राज्य शाखा का अध्यक्ष राज्य शाखा के अधीन आने वाले किसी सदस्य को निलंबित कर सकता है. लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के पास यह पॉवर नहीं होता है कि वह पार्टी के किसी विधायक, सांसद और राष्ट्रीय परिषद के सदस्य को निलंबित कर दे. यह पार्टी के संविधान में दर्ज है. चूंकि अनंत सिंह पार्टी के विधायक हैं, उनके निष्कासन का पत्र राज्य अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने जारी किया है. इसलिए इसकी वैधानिकता पर सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि अनंत सिंह विधायक हैं. दिलचस्प यह है कि संविधान में निष्कासन से जुड़ा कोई प्रावधान नहीं है. कार्रवाई के लिए निलंबन शब्द का इस्तेमाल हुआ है जबकि कार्यालय आदेश में निष्कासन शब्द का इस्तेमाल हुआ है.
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अनुशासन भंग कब होता है? क्या कहता है जदयू का संविधान
जदयू के संविधान की धारा-19 में अनुशासन भंग करने की स्थिति की व्याख्या की गई है. इसके तहत जदयू के निर्णय के विरुद्ध काम करना, सक्षम अधिकारी के निर्देश का उल्लंघन करना या किसी नियम की अवहेलना करना, पार्टी के सदस्य के खिलाफ सार्वजनिक रूप से गंभीर लांछन लगाना, पार्टी इकाइयों या पदाधिकारियों के खिलाफ प्रचार करना एवं अन्य प्रावधान हैं.
इस हिसाब से अनंत सिंह ने कई प्रावधानों का उल्लंघन किया है. उन्होंने पार्टी के फैसले के विरुद्ध दूसरे दल के उम्मीदवार का समर्थन किया, नीरज कुमार के खिलाफ बयानबाजी की थी, उनके खिलाफ प्रचार भी किया था. साथ ही केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के आदेश की अवहेलना की थी. जिसमें उन्होंने सार्वजनिक बयानबाजी से परहेज के लिए कहा था. इसलिए उन पर अनुशासन भंग करने का मामला बनता है.
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राजद ने उठाए थे सवाल
अनंत सिंह के निष्कासन को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि यह निर्णय संविधान सम्मत नहीं है. जनता दल यूनाइटेड ने हताशा में यह फैसला किया है. उन्होंने कहा कि इस पत्र पर कहीं भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्णयानुसार नहीं लिखा है. इसलिए यह संविधान के खिलाफ है.
अनंत सिंह के मामले में अब आगे क्या
इसलिए अब यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या अनंत सिंह का निलंबन मान्य होगा या नहीं? पार्टी सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने राज्य ईकाई को अधिकृत किया था, इसलिए यह फैसला संविधान सम्मत है. पिछले दिनों मीडिया से बात करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा था कि राज्य की इकाई इस पूरे मामले को देख रही है, वह फैसला करेगी.
इस बीच अनंत सिंह ने भी रविवार को अपने निष्कासन पर बयान दिया है. उनका कहना है कि पार्टी के निकाले जाने से उन्हें फर्क नहीं पड़ता है. वह अपनी पार्टी बना लेंगे. अनंत सिंह का कहना है कि नीतीश कुमार अब बीमार रहते हैं, ऐसे में जदयू का कोई भविष्य नहीं बचा है. हालांकि उन्होंने नीतीश कुमार के खिलाफ भी कुछ भी बोलने मना कर दिया. अनंत सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक गर्मा गया है.
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