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LAC पर ड्रोन वॉर की तैयारी: लद्दाख में परखा Warmate, 100 KM दूर तक खोज और हमले में सक्षम

यूक्रेन युद्ध ने यह साबित किया है कि ड्रोन अब केवल निगरानी के साधन नहीं रह गए हैं. वे युद्धक्षेत्र में दुश्मन की पहचान करने, उसकी गतिविधियों पर नजर रखने और सटीक हमले करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

LAC पर ड्रोन वॉर की तैयारी: लद्दाख में परखा Warmate,  100 KM दूर तक खोज और हमले में सक्षम
फाइल फोटो
NDTV

यूक्रेन की जंग ने दुनिया को दिखा दिया कि भविष्य के युद्ध टैंकों और लड़ाकू विमानों से नहीं, बल्कि ड्रोन और स्मार्ट हथियारों से तय होंगे. अब भारतीय सेना भी इसी सबक को हिमालय की ऊंचाइयों पर लागू करने की तैयारी में है. चीन के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सेना ऐसे ड्रोन सिस्टम तैनात करना चाहती है जो दुश्मन को दूर से खोजें, उसकी गतिविधियों पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर कुछ ही मिनटों में सटीक हमला भी कर सकें. इसी रणनीति के तहत लद्दाख में पोलैंड के Warmate लोइटरिंग म्यूनिशन का हाई-एल्टीट्यूड ट्रायल किया गया है.

नई दिल्ली में पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के रक्षा सहयोग पर भी खास नजर रही. यूक्रेन युद्ध के कारण पोलैंड उन देशों में शामिल है जिन्होंने ड्रोन तकनीक और आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों को बेहद करीब से देखा और समझा है. यही तजुर्बा अब भारत के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है.

यूक्रेन युद्ध ने यह साबित किया है कि ड्रोन अब केवल निगरानी के साधन नहीं रह गए हैं. वे युद्धक्षेत्र में दुश्मन की पहचान करने, उसकी गतिविधियों पर नजर रखने और सटीक हमले करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. कम लागत वाले और बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए जा सकने वाले ड्रोन आज कई मामलों में पारंपरिक हथियारों का विकल्प बनते जा रहे हैं.

क्या है भारतीय सेना की सबसे बड़ी चुनौती?

भारतीय सेना के सामने सबसे बड़ी चुनौती LAC का कठिन भूगोल है. हिमालयी इलाकों में कम ऑक्सीजन, बेहद कम तापमान और ऊंचाई पर संचार व्यवस्था बनाए रखना किसी भी ड्रोन सिस्टम के लिए परीक्षा की तरह होता है. सेना इसलिए ऐसे लोइटरिंग म्यूनिशन चाहती है जो मुश्किल मौसम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकें.

इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए पोलैंड की रक्षा कंपनी WB Group के Warmate सिस्टम पर ध्यान दिया जा रहा है. भारतीय सेना पहले ही आपात खरीद प्रक्रिया के तहत Warmate को शामिल कर चुकी है. इस प्रणाली का लद्दाख में हाई-एल्टीट्यूड ट्रायल भी किया जा चुका है, जहां इसके प्रदर्शन का आकलन किया गया.

Warmate एक प्रकार का लोइटरिंग म्यूनिशन है, जिसे आम भाषा में “कामिकाजे ड्रोन” भी कहा जाता है. यह लक्ष्य की तलाश में हवा में मंडराता है और लक्ष्य मिलने पर सीधे उस पर हमला कर सकता है. जमीन से नियंत्रित किए जाने पर इसकी परिचालन क्षमता लगभग 30 किलोमीटर तक बताई जाती है.

हालांकि इसकी असली ताकत तब सामने आती है जब इसे FlyEye टोही ड्रोन के साथ इस्तेमाल किया जाए. FlyEye दुश्मन की गतिविधियों की निगरानी करता है, लक्ष्य की पहचान करता है और संचार रिले की भूमिका भी निभाता है. दोनों सिस्टम एक साथ काम करें तो लक्ष्य की पहचान और हमले की दूरी करीब 100 किलोमीटर तक पहुंच सकती है. आधुनिक युद्ध में इसे "सेंसर-टू-शूटर" मॉडल कहा जाता है, जिसमें लक्ष्य दिखते ही उस पर तेज और सटीक कार्रवाई की जा सकती है.

कंपनी की क्या कहना है?

WB Group का कहना है कि उसकी TOPAZ बैटलफील्ड मैनेजमेंट प्रणाली निगरानी और हमले से जुड़े विभिन्न प्लेटफॉर्म को एक नेटवर्क में जोड़ सकती है. इसका उद्देश्य युद्धक्षेत्र में सूचना और कार्रवाई के बीच लगने वाले समय को कम करना है. कंपनी ऐसे सिस्टम पर भी काम कर रही है जिससे एक ऑपरेटर कई ड्रोन या प्लेटफॉर्म को नियंत्रित कर सके.

भारत में इस तकनीक के स्थानीय उत्पादन पर भी काम चल रहा है. उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में एक प्रोडक्शन लाइन विकसित की जा रही है. संयुक्त उपक्रम में भारतीय भागीदार की हिस्सेदारी बहुमत में है. कंपनी का दावा है कि जहां भी संभव होगा, भारतीय कंपोनेंट्स का उपयोग किया जाएगा ताकि सिस्टम भारतीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप तैयार हो सके.

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्धों में केवल ड्रोन खरीदना पर्याप्त नहीं होगा. सेना को ऐसे नेटवर्क तैयार करने होंगे जहां सैनिक ड्रोन का उपयोग उतनी ही सहजता से कर सकें जितना वे अन्य हथियारों का करते हैं. बड़ी संख्या में छोटे ड्रोन, सटीक हमलावर हथियार और मजबूत नेटवर्किंग क्षमता किसी भी आधुनिक सेना की ताकत तय करेगी.

भारत के लिए सबसे अहम बात यह है कि ऐसे सिस्टम का परीक्षण और तैनाती उन्हीं कठिन परिस्थितियों में हो जहां उनका इस्तेमाल होना है. लद्दाख में Warmate का परीक्षण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. LAC पर बढ़ती चुनौतियों के बीच भारतीय सेना अब ड्रोन आधारित युद्ध क्षमता को तेजी से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

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