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दुश्मन के बख्तरबंद टैंकों को चुटकियों में कर देगा तबाह, भारतीय सेना को मिला 'नागास्त्र-2', इसे देख कांपेंगे दुश्मन!

भारतीय सेना को स्वदेशी एंटी-टैंक लोइटर म्यूनिशन 'नागास्त्र-2' की पहली खेप मिल गई है. 4 किलो के टैंडम वारहेड से लैस यह कामिकेज ड्रोन 650 मिमी तक के बख्तरबंद कवच को भेदने में सक्षम है.

दुश्मन के बख्तरबंद टैंकों को चुटकियों में कर देगा तबाह, भारतीय सेना को मिला 'नागास्त्र-2', इसे देख कांपेंगे दुश्मन!
'नागास्त्र-2' की एंट्री से कांपेगा दुश्मन, सेना को मिला घातक कामिकेज ड्रोन
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  • भारतीय सेना को स्वदेशी नागास्त्र-2 एंटी-टैंक कामिकेज ड्रोन की पहली खेप मिल चुकी है
  • नागास्त्र-2 में चार किलोग्राम का टैंडम शेप्ड-चार्ज वॉरहेड लगा है जो 650 मिमी तक के बख्तरबंद टारगेट भेद सकता है
  • यह ड्रोन 60 मिनट तक लगातार काम करता है और 25 से 50 किलोमीटर की ऑपरेशनल रेंज प्रदान करता है

भारतीय सेना की ताकत में एक ऐसा 'ब्रह्मास्त्र' शामिल हो गया है, जो पलक झपकते ही दुश्मन के बख्तरबंद टैंकों को लोहे के ढेर में बदल देगा. भारतीय सेना को अब स्वदेशी 'नागास्त्र-2' एंटी-टैंक लोइटर म्यूनिशन यानी कामिकेज ड्रोन की पहली खेप मिल गई है. इसे आसमान में उड़ने वाला एक ऐसा 'सुसाइड ड्रोन' माना जा रहा है, जिससे दुश्मन कांपेगा. इस अचूक और 'साइलेंट किलर' ड्रोन को नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने सेना को सौंपा है. अगस्त 2026 में राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) में इसके सभी कड़े तकनीकी परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद इसकी डिलीवरी शुरू की गई है.

टैंकों का कवच भी नहीं बचा पाएगा

'नागास्त्र-2' में 4 किलोग्राम का टैंडम शेप्ड-चार्ज वॉरहेड लगाया गया है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह 650 मिमी तक के रोल्ड होमोजेनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित टैंकों और बख्तरबंद लक्ष्यों को भी भेद सकता है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी सटीकता और घातक क्षमता है. दुश्मन के आधुनिक टैंक भी इसके हमले से सुरक्षित नहीं माने जा रहे हैं.

60 मिनट तक लगातार काम कर रहा है ड्रोन 

यह सिस्टम 'रिकवर और रीयूज' यानी वापस लाकर दोबारा इस्तेमाल करने वाले मोड में 25 किमी और 'फायर-एंड-फॉरगेट' मोड में 50 किमी की ऑपरेशनल रेंज देता है. यह ड्रोन 60 मिनट तक लगातार काम कर सकता है. ये खूबियां बख्तरबंद टारगेट को सटीक रूप से निशाना बनाने के लिए इसे खास बनाती हैं.

दिन-रात रखेगा नजर

नागास्त्र-2 में दिन और रात दोनों समय काम करने वाले हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं. यह दुश्मन की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे निगरानी रख सकता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत हमला कर सकता है.

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जैमिंग और GPS ब्लॉकिंग भी बेअसर

आधुनिक युद्ध में इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर एक बड़ी चुनौती होती है. इसे ध्यान में रखते हुए नागास्त्र-2 में 'इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स' (ECCM) की खास टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. इसकी मदद से यह ड्रोन कम्युनिकेशन जैमिंग के बीच भी काम कर सकता है. इसके अलावा GPS जामिंग और स्पूफिंग का भी सामना कर सकता है. तमाम इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप के बावजूद यह ड्रोन टारगेट तक पहुंचकर तबाह करने में सक्षम है.

'मेक इन इंडिया' को मजबूती

'नागास्त्र-2' का विकास और इसकी आपूर्ति, भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है. इससे भारतीय सेना को एडवांस, तकनीक-आधारित 'लोइटर म्यूनिशन' सिस्टम से लैस करने में मदद मिलेगी.

पहले भी मिला था बड़ा ऑर्डर

साल 2025 में भारतीय सेना ने कंपनी को लगभग 450 'नागास्त्र-1R' लोइटर म्यूनिशन सिस्टम का ऑर्डर दिया था. नागास्त्र-1R का परीक्षण लद्दाख और झांसी के बबीना सहित कई क्षेत्रों में किया गया था. अब नागास्त्र-2 के शामिल होने से सेना की निगरानी, सटीक हमले और एंटी-टैंक क्षमता में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है.

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