आईआईटी बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने एक कम लागत वाली ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसकी मदद से खून की सिर्फ एक बूंद के जरिए एनीमिया और सिकल सेल रोग की पहचान की जा सकेगी. संस्थान ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी.
आईआईटी बॉम्बे के रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग की शोध टीम ने प्रोफेसर महेश तिरुमकुडुलु के नेतृत्व में यह नई जांच पद्धति विकसित की है. इस तकनीक में खून की एक बूंद को कांच की स्लाइड पर फैलाया जाता है और फिर यह देखा जाता है कि वह कितनी दूरी तक फैलती है. इसी आधार पर एनीमिया की पहचान की जा सकती है.
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शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह तकनीक सिकल सेल रोग की पहचान करने के साथ-साथ उसके उपचार की निगरानी में भी मददगार साबित हो सकती है. जांच प्रक्रिया को एक समान और सटीक बनाए रखने के लिए टीम ने खून का स्मीयर तैयार करने वाला एक स्वचालित उपकरण भी विकसित किया है.
अध्ययन के दौरान नियंत्रित परिस्थितियों में पाया गया कि अलग-अलग लोगों के खून से बनने वाले स्मीयर की लंबाई अलग-अलग होती है और यही अंतर महत्वपूर्ण चिकित्सीय जानकारी प्रदान करता है.
प्रोफेसर महेश तिरुमकुडुलु ने बताया कि अधिक गाढ़ा खून आसानी से नहीं फैलता. इसलिए समान परिस्थितियों में ऐसे खून की परत अपेक्षाकृत छोटी और मोटी बनती है. इसी आधार पर रोगों की पहचान की जा सकती है.
शोध टीम का कहना है कि इस पेटेंट प्राप्त स्वचालित स्मीयर उपकरण का निर्माण कम लागत में किया जा सकता है. जांच के लिए केवल एक पिपेट, कांच की स्लाइड, एक सस्ता रसायन, सिकलिंग उपचार के लिए शीशियां और खून की परत की लंबाई मापने के लिए एक पैमाना या इमेजिंग उपकरण की जरूरत होती है.
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