IIT बॉम्बे में हुई छात्र की मौत के बाद अब कई तरह के नियम बनाए जा रहे हैं. इसमें परीक्षा के दौरान नकल करते हुए पकड़े जाने पर दूसरा मौका दिए जाने और काउंसलिंग को और ज्यादा बढ़ाने जैसे फैसले शामिल हैं. इसी बीच अब कैंपस में एक नया नियम भी लागू किया जा रहा है, जिसमें किसी भी छात्र से उसकी जाति पूछने की मनाही होगी. इसके अलावा छात्र से उसकी रैंक के बारे में भी नहीं पूछा जा सकता है. IIT की एंटी-डिस्क्रिमिनेशन गाइडलाइन्स में इसे शामिल किया गया है. पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव और ऐसे आरोपों के बाद इस तरह के नियम जोड़े गए हैं.
एडमिशन को लेकर भी नहीं पूछ सकते सवाल
आईआईटी बॉम्बे में किसी भी छात्र को उसके एडमिशन की कैटेगरी को लेकर भी सवाल पूछने से मना किया गया है. आमतौर पर ऐसे आरोप लगाए जाते हैं कि एससी-एसटी या ओबीसी वर्ग से आने वाले छात्रों को उनकी कैटेगरी और एडमिशन प्रोसेस को लेकर ट्रोल किया जाता है. ऐसे में इस पर सख्ती बरती जा रही है. इसके अलावा JEE में रैंक का हौव्वा भी खत्म करने की तैयारी है. डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स की तरफ से इसे लेकर एक मेल किया गया है.
ई-मेल में कहा गया है कि इस तरह के सवाल अक्सर भेदभाव जैसी भावना को पैदा करते हैं और इसका कुछ छात्रों पर काफी बुरा असर पड़ता है. फिर चाहे वो सवाल अनजाने में पूछा गया हो. जिस छात्र से ऐसे सवाल पूछे जाते हैं, उसे ये लग सकता है कि उसकी जाति या फिर उसे नीचा दिखाने की कोशिश हो रही है. इसके साथ ही संस्थान की तरफ से छात्रों को आपस में रिश्ते मजबूत करने की सलाह भी दी गई है.
सोशल मीडिया पर भी नजर
आईआईटी बॉम्बे की तरफ से सोशल मीडिया पर भी ऐसा कंटेंट शेयर करने को लेकर चेतावनी दी गई है. किसी भी तरह के नफरत फैलाने वाले, लैंगिक भेदभाव या फिर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने पर भी रोक है. इस तरह की चीजों को बढ़ावा देने वाले कंटेंट पर नजर रखी जा रही है और कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
19 साल के छात्र की हुई थी मौत
आईआईटी बॉम्बे में कुछ हफ्ते पहले एक 19 साल के छात्र ने खुदकुशी कर ली थी. इस छात्र को एग्जाम में मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था, जिसके बाद उसने अपने हॉस्टल रूम में जाकर खुदकुशी कर ली. इस मामले में परिवार ने जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं.
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