किसी भी महिला के लिए प्रेग्नेंसी का फेज काफी मुश्किल भरा होता है. इस दौरान शारीरिक बदलाव तो होते ही हैं, लेकिन इसके साथ वर्क लाइफ बैलेंस भी पूरी तरह से बिगड़ने लगता है. कई महिलाओं को मजबूरी में अपना काम छोड़ना पड़ता है और वो काफी पीछे रह जाती हैं. हालांकि IIT बॉम्बे में रिसर्च स्कॉलर हेन्ना के. सेठी की कहानी कुछ अलग है. उन्होंने प्रेग्नेंसी के दौर में अपने करियर को भी संभाला और इस पूरे सफर में उनके पति ने उनका पूरा साथ दिया. हालांकि उन्हें कई बार मां होने का गिल्ट भी होता है.
चार महीने के बच्चे के साथ पहुंचीं IIT बॉम्बे
करीब 29 साल की उम्र में हेन्ना ने IIT बॉम्बे में PhD के लिए आवेदन किया था, इस दौरान वो प्रेग्नेंट थीं. उनके पति ने उनसे कहा कि उन्हें अपने सपनों को नहीं छोड़ना चाहिए, इससे हेन्ना को हिम्मत मिली और उन्होंने अपने सफर को आगे बढ़ाने का फैसला किया. इसके बाद अपने चार महीने के बच्चे के साथ हेन्ना ने IIT बॉम्बे में बतौर रिसर्च स्कॉलर ज्वाइन किया. वो ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंस डिपार्टमेंट में रिसर्च स्कॉलर हैं.
-
'भारत के लिए खतरा बिल्कुल रियल': NDTV वर्ल्ड समिट में माइक्रोसॉफ्ट के AI विशेषज्ञ निकोलस बट्स -
हाथ से निकल रही है AI की ताकत! Google DeepMind के पूर्व रिसर्चर ने भारत में दी सबसे बड़ी चेतावनी -
Shashi Tharoor EXCLUSIVE: NDTV World Summit 2026 में बदलते वर्ल्ड ऑर्डर पर शशि थरूर क्या बोले? -
'चीन से व्यापार भी, सतर्कता भी' : NDTV World Summit में शशि थरूर ने बताया क्यों जरूरी है मल्टी-अलाइनमेंट -
AI एक्ट्रेस टिली नॉरवुड को पसंद हैं शाहरुख खान, बोलीं- ‘ओम शांति ओम’ के रीमेक में करना चाहती हूं काम -
रिजीम चेंज नहीं... शशि थरूर ने दी नई परिभाषा, चुनाव आयोग और सरकार को भी दी नसीहत -
NDTV World Summit 2026 : शशि थरूर ने बताया- कांग्रेस को लेफ्ट की जरूरत क्यों -
NDTV World Summit में शशि थरूर ने समझाया कूटनीति का असली मतलब -
चीन पर इतनी निर्भरता भारत के लिए ठीक नहीं- NDTV World Summit में बोले शशि थरूर -
NDTV World Summit 2026 | AI से एडवांस्ड टेक्नोलॉजी तक, भारत की रिसर्च को कैसे मिलेगी नई उड़ान?
पति की केरल में नौकरी
हेन्ना के पति केरल में एक मनोवैज्ञानिक के तौर पर नौकरी करते हैं और मुंबई नहीं रह सकते, ऐसे में हेन्ना मुंबई में अकेले ही बच्चे की देखभाल करती हैं. उन्हें अपने बच्चे को नैनी के पास छोड़ना पड़ता है और जब भी नैनी नहीं आती है तो वो अपने बच्चे को अपने साथ लैब ले जाती हैं. लैब के एक कोने में उन्होंने एक छोटा सा बिस्तर, कटोरा और कंबल रखा हुआ है, जहां ओमी खेलता और सोता है. इसी कैंपस में उनके बेटे ने चलना भी सीख लिया और इस दौरान प्रोफेसर्स से लेकर बाकी तमाम लोगों ने उनका पूरा साथ दिया.
क्यों होता है मां होने का गिल्ट?
हेन्ना को कुछ शुरुआती महीनों में मानसिक तनाव से भी गुजरना पड़ा. इस दौरान उन्होंने कैंपस के ही वेलनेस सेंटर में थेरेपी भी ली थी. उनका कहना है कि जब भी वो काम पर आती हैं तो उन्हें एक मां होने का गिल्ट महसूस होता है, वहीं जब बच्चे को समय देती हैं तो उन्हें लगता है कि वो अपनी रिसर्च के साथ इंसाफ नहीं कर पा रही हैं. कई बार वो इसे लेकर परेशान भी हो जाती हैं. फिलहाल हेन्ना अपने बेटे के बड़े होने का इंतजार कर रही हैं, जिससे उनके लिए चीजें थोड़ी और आसान हो जाएं.
यह भी पढ़ें | 50 लाख से लेकर 1 करोड़ तक की फीस, डीम्ड यूनिवर्सिटी से MBBS करना कितना महंगा?
यह भी पढ़ें | यूपी में डॉक्टर बनने का सपना होगा सस्ता, इस कॉलेज में बढ़ेंगी 50 सीटें; फीस सुनकर हो जाएंगे खुश
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं