- देश के पहले गांव जादुंग में सरकार बनवा रही है मकान
- यहां पर्यटक के घूमने की भी होगी व्यवस्था, होमस्टे चलाने की भी सुविधा
- चीन से सटे इस गांव में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत बन रहे हैं घर
1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद उत्तराखंड के सीमा पर पड़े वीरान गांव को दुबारा से आबाद करने की योजना वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को भारत सरकार ने बनाया है जिसके तहत उत्तराखंड के 91 गांव को दोबारा से बसाने , आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जाएगा. वही उत्तरकाशी जिले का सीमांत गांव जादुंग में तेजी से घर बनाये जा रहे है उत्तरकाशी के जादुंग गांव किस तरह से पर्वतीय शैली में घर बनाए जा रहे हैं आम लोगों के साथ पर्यटन भी वापस लौटे जादुंग गांव से एनडीटीवी की ग्राउंड रिपोर्ट.
पीएम मोदी ने कहा था प्रथम गांव
उत्तरकाशी का जादुंग गांव भारत तिब्बत चीन सीमा पर बस आखिरी गांव है. जादुंग गांव लगभग 3800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जादुंग गांव भारत तिब्बत चीन सीमा के पास नेलांग घाटी में है उत्तरकाशी से लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर जादुंग गांव है. 1962 में भारत चीन युद्ध के बाद यह गांव पूरी तरह से वीरान हो गया था. इस गांव को दोबारा से बसाने के लिए मोदी सरकार ने वाइब्रेट विलेज प्रोग्राम शुरू किया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की सीमा के गांव को अंतिम गांव की जगह भारत के प्रथम गांव की संज्ञा दी. भारत सरकार के वाइब्रेट विलेज प्रोग्राम के तहत इन गांव में दोबारा से केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से वहां के लोगों के लिए घर बनाए जा रहे हैं ताकि वह दोबारा से यहां आकर रहें. हालांकि, यह काफी ऊंचाई पर स्थित है और यहां पर साल भर रहना बेहद मुश्किल है लेकिन वहां पर न सिर्फ घर बनाए जा रहे हैं बल्कि उन घरों को ऐसा बनाया जा रहा है ताकि लोग वहां पर होमस्टे भी चला सके ताकि पर्यटक भी इन गांव में जा सके.
पहाड़ी शैली में बन रहे हैं जादुंग के घर

गांव में जाने के लिए परमिट की जरूरत
जादुंग गांव को जाने के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत पड़ती है क्योंकि यह भारत तिब्बत चीन सीमा पर स्थित है. गांव जाने के लिए नेलांग घाटी के लिए इनर लाइन परमिट चाहिए होता है जो एसडीएम भटवाड़ी के द्वारा इशू किया जाता है. नेलांग घाटी जाने के लिए सड़क मार्ग के जरिए जादुंग जाया जा सकता है. इस सड़क को बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की तरफ से बनाया गया है, भारत सरकार ने वाइब्रेट विलेज प्रोग्राम चलाया है जिसमें उत्तराखंड के 91 गांव को शामिल किया गया है पहले फेस में भारत तिब्बत चीन सीमा पर बसे 51 गांव को चुना गया है जो भारत चीन सीमा पर स्थित है.
उत्तराखंड के दो जिले के 24 गांव
जिसमें उत्तरकाशी के 10 , चमोली के 14 , पिथौरागढ़ जिले के 27 गांव शामिल है. इसके अलावा भारत नेपाल सीमा पर बसे 40 गांव को भी शामिल किया गया है. 2015 में नेलांग घाटी पर्यटकों के लिए खोली गई थी तब भी इस पूरे क्षेत्र में पर्यटकों के रहने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी. हालांकि आज भी रहने के लिए व्यवस्था नहीं है लेकिन सड़कें बेहतरीन बनाई गई हैं जिससे पर्यटक भैरव घाटी यानी गंगोत्री नेशनल हाइवे से नेलांग घाटी और जादुंग गांव मैं घूम कर आ जा सकें.

पत्थरों और देवदार की लकड़ियों से बन रहे हैं ये घर
NDTV की टीम जादुंग पहुंची
NDTV टीम ने जादुंग गांव में जाकर वहां की स्थिति वहां बनने वाले घर का जायजा लिया. सबसे पहले हमें नेलांग घाटी से होते हुए जादुंग गांव पहुंचा गया. नेलांग घाटी को उत्तराखंड का लद्दाख भी कहा जाता है जिस तरह लद्दाख में भौगोलिक स्थितियां हैं, वैसी ही स्थिति यहां भी है.हमने जादुंग गांव पहुंचकर देखा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत घर बनाए जा रहे हैं. जिसमे 6 घर बना दिए गए है जबकि 1 घर का निर्माण चल रहा है. जादुंग गांव में स्थानीय लोगों के 23 घर बनाने है इस घरों को उत्तराखंड पर्यटन विभाग बना रहा है इसमें पर्यटन विभाग के गढ़वाल मंडल विकास निगम इस पूरे घर बनाने का काम देख रहा है.
गढ़वाल मंडल विकास बना रहा है घर
गढ़वाल मंडल विकास निगम के कर्मचारी राहुल पवार जो जादुंग गांव में बनने वाले घरों का पूरा काम देख रहे है उन्होंने एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि जादुंग गांव में पहले फेज में सात घर बनाए जा रहे हैं. इसके साथ ही दूसरे फेज में 16 घर बनाए जाएंगे. राहुल पंवार ने बताया कि अभी 6 घर बन चुके है और 1 का निर्माण अभी चल रहा है. राहुल पंवार ने बताया कि ये सभी घर न सिर्फ पहाड़ी शैली में बनाये जा रहे है बल्कि इन घरों में लगने वाला पत्थर और लकड़ी भी यहीं पहाड़ लाई गई है. इन घरों को बनाने के लिए देवदार की लकड़ी का उपयोग किया जा रहा है. घरों में जिन लकड़ियों पर नक्काशी की जा रही है वह भी पहाड़ी शैली में ही की जा रही है. जैसे 1962 के युद्ध से पहले के समय में जादुंग गांव के घर होते थे.
काम में लगे हैं मजदूर
वही जादुंग गांव में बनने वाले घरों के निर्माण में लगे मजदूरों में बताया कि उनको यहां पर 4 महीने हो गए हैं. उन्होंने बताया कि ये जगह काफी ऊंचाई पर है और यहां ठंड भी काफी है. मजदूरों ने बताया कि उनको पहाड़ी शैली में घर बनाने का काम दिया गया है. इसके लिए उन्हें डिजाइन भी दिया गया है.
अबतक उत्तरकाशी जिले का प्रथम गांव जादुंग जो वीरान पड़ा था, वहां अब खामोशी टूटने लगी है. सरकार ने इस गांव को पर्यटन गांव के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है. जादुंग गांव में उत्सव मैदान बनाया जाएगा. गांव में प्रवेश द्वार और चेक पोस्ट निर्माण का काम अप्रैल माह से शुरू किया जाएगा. भैंरोंघाटी जादुंग मोटर मार्ग पर गर्तांग गली के सामने स्थित हवा बैंड में व्यू प्वाइंट और श्रीकांठा में व्यू प्वाइंट के लिए भी पैसे मंजूर किए गए हैं.
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