यह कहानी सेना के एक पूर्व हवलदार की है लेकिन किसी बॉलीवुड फिल्म जैसी लगती है. सदर्न कमांड की मिलिट्री इंटेलिजेंस और तेलंगाना पुलिस के एक जॉइंट ऑपरेशन में पता चला है कि सेना से निकाले गए एक हवलदार ने एक एक्टिवा स्कूटी पर सवार होकर एक हाई-सिक्योरिटी छावनी में एंट्री की. आर्मरी का ताला तोड़ा और अंधेरे का फायदा उठाकर AK असॉल्ट राइफल सहित 12 हथियार लेकर भाग निकला. सूत्रों के मुताबिक, सिकंदराबाद के बोलारम में 20 मद्रास रेजिमेंट में पिछले महीने हथियारों की जो सनसनीखेज चोरी हुई थी, उसे ठीक इसी तरह अंजाम दिया गया था.
जांच अधिकारियों का कहना है कि उसने सबसे पहले आर्मरी का ताला तोड़ा, 12 हथियार और गोला-बारूद निकाला और उसी रेजिमेंट का सदस्य होने का दिखावा करते हुए उन्हें बाहर घनी झाड़ियों में छिपा दिया. हथियारों में AK और INSAS राइफलें शामिल थीं.
इसके बाद उसने चोरी किए गए हथियारों को अपनी एक्टिवा पर लादा और रफू चक्कर हो गया. अगली सुबह, अपने सुराग मिटाने के लिए, उसने हथियारों को अपनी ब्रेजा कार में भरा, हाईवे से बचते हुए नगरकुरनूल जिले के उदिलीला गांव के पास ले जाकर उन्हें जमीन में गाड़ दिया.
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ऐसे बनाई योजना...
आरोपी ने बहुत बारीकी से और सोच-समझकर पूरी योजना बनाई थी. उसने जान-बूझकर 29 और 30 अगस्त की रात (शनिवार और रविवार) को चुना, क्योंकि उसे पता था कि वीकेंड पर आर्मरी के स्टॉक की जांच नहीं होगी. उसे लगा कि 48 घंटे का यह वक्त उसे चोरी किए गए हथियारों को सुरक्षित जगह पर छिपाने के लिए काफी होगा, इससे पहले कि किसी को उनके गायब होने का पता चले.
चोरी का पता 31 अगस्त को सामान की गिनती के दौरान चला. 1 सितंबर को रात में घर में घुसकर सरकारी संपत्ति की चोरी करने के आरोप में FIR दर्ज की गई.
शुरुआत में टालमटोल करने के बाद, आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और बताया कि उसने बदले की भावना से ऐसा किया था. उसने जांच अधिकारियों को बताया कि वह अपने कमांडिंग ऑफिसर से नाराज था क्योंकि उसे तीन साल का सर्विस एक्सटेंशन नहीं दिया गया था.
लेकिन जांच अधिकारी अकेले शख्स द्वारा बदले की भावना से किए गए इस काम की कहानी पर यकीन नहीं कर रहे हैं.
छह से सात वर्किंग सेना अधिकारी अब जांच के दायरे में हैं और तीन लोग पहले से ही हिरासत में हैं. अधिकारियों को संदेह है कि अंदरूनी सूत्र की मिलीभगत अहम थी.
एक सीनियर रिसर्चर ने कहा, "अंदरूनी मदद के बिना, एक रिटायर्ड शख्स स्कूटी पर गोला-बारूद वाली जगह नहीं जा सकता है और 12 राइफलों के साथ बाहर नहीं निकल सकता है. ऐसा लगता है कि दूसरों को बचाने के लिए द्वेष की भावना पैदा की गई है."
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मामला जितना दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा गंभीर है. जांच अधिकारियों को अब शक है कि हथियारों का यह जखीरा किसी निजी रंजिश को निपटाने के लिए नहीं, बल्कि देश-विरोधी तत्वों को सौंपने के लिए था. यह एक बहुत बड़ी और खतरनाक साजिश की तरफ इशारा करता है.
चोरी हुए हथियार तो बरामद कर लिए गए हैं, लेकिन मिलिट्री इंटेलिजेंस और तेलंगाना पुलिस का कहना है कि इस बड़ी साज़िश की जांच अभी खत्म नहीं हुई है.
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