- दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल थान सिंह खाली समय में सड़क किनारे रहने वाले बच्चों को पढ़ाने का कार्य करते हैं
- थान सिंह की पाठशाला आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करने का केंद्र बनी है
- थान सिंह को NDTV-डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया टीचर्स अवॉर्ड्स में सम्मानित किया गया
दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल थान सिंह पुलिस के साथ-साथ अपनी सामाजिक ड्यूटी भी करते हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वर्दी पहनकर केवल कानून-व्यवस्था संभालना ही सेवा नहीं है, बल्कि समाज को नई दिशा देना भी उतना ही जरूरी है. थान सिंह वर्दी पहनकर पुलिस की ड्यूटी निभाते हैं, वहीं खाली समय में सड़क किनारे रहने वाले बच्चों को पढ़ाते हैं. शिक्षा और सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में इस शानदार काम के लिए उन्हें NDTV-डेटॉल 'बनेगा स्वस्थ इंडिया टीचर्स अवॉर्ड्स 2026' में 'स्पेशल रिकग्निशन अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया है.
थान सिंह की पाठशाला के जरिए बच्चों को पढ़ाते हैं
थान सिंह अपनी अनोखी पहल 'थान सिंह की पाठशाला' के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा से जोड़ रहे हैं. उनकी यह पाठशाला कई बच्चों के लिए उम्मीद, अवसर और बेहतर भविष्य का माध्यम बन चुकी है.
पुलिस की नौकरी के साथ-साथ शिक्षा के प्रति उनका समर्पण उन्हें दूसरों से अलग बनाता है. उनका मानना है कि शिक्षा ही वह साधन है, जो किसी भी बच्चे की जिंदगी बदल सकती है. इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी पाठशाला को केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास का केंद्र बना दिया है.
A cop by duty. A teacher by passion. A changemaker by purpose. 👮♂️📚✨
— Delhi Police (@DelhiPolice) October 2, 2026
Head Constable Than Singh has been honoured with the Special Recognition Award at the NDTV-Dettol Banega Swasth India Teachers' Awards 2026 for his inspiring contribution to education and social change.… pic.twitter.com/2h9BavWxjO
दिल्ली पुलिस ने भी जताया गर्व
दिल्ली पुलिस ने भी उनकी इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि थान सिंह की पहल यह दिखाती है कि सच्ची सेवा ड्यूटी की सीमाओं से कहीं आगे तक जाती है. जब संवेदनशीलता और समर्पण साथ आते हैं, तो बदलाव की मजबूत नींव तैयार होती है. 'थान सिंह की पाठशाला' आज इस बात का उदाहरण है कि एक व्यक्ति का जुनून और प्रतिबद्धता कई जिंदगियों को नई दिशा दे सकती है. यह पहल बताती है कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है.
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