Explainer: कांग्रेस या बीजेपी... हिमाचल प्रदेश नंबर गेम में किसका पलड़ा भारी?

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में 68 सीटें हैं. बहुमत का आंकड़ा 35 है. 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 40 सीटें हासिल की थीं, जिससे उसे एकतरफा जीत मिली. तीन स्वतंत्र विधायकों के समर्थन से सरकार को और मजबूती मिली.

नई दिल्‍ली :

कांग्रेस ने दो साल पहले ही अपनी चिर-प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी से हिमाचल प्रदेश की सत्‍ता हासिल की थी, लेकिन अब वह इस पहाड़ी राज्‍य को खोने की कगार पर है. हिमाचल प्रदेश उन 'कुछ' राज्‍यों में से एक है, जिनमें कांग्रेस शासित सरकार है. मंगलवार के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद ऐसा लगता है कि राज्य विधानसभा में वो बहुमत के आंकड़े 35 से एक सीट पीछे रह गई है. ऐसे में पूरी संभावना है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को इस सप्ताह शक्ति परीक्षण के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिसमें उनके हारने की पूरी आशंका है.

विधायकों की संख्या को लेकर हंगामा

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में 68 सीटें हैं. बहुमत का आंकड़ा 35 है. 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 40 सीटें हासिल की थीं, जिससे उसे एकतरफा जीत मिली. तीन स्वतंत्र विधायकों के समर्थन से सरकार को और मजबूती मिली. चुनाव में 44 सीटें जीतने का दावा करने वाली बीजेपी महज 25 सीटों पर सिमट गई थी. ऐसे में राज्यसभा चुनाव से पहले इसमें कोई संदेह नहीं था कि कांग्रेस के हाथ में ही जीत आएगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. 

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बदला बहुमत का आंकड़ा 

अब, अराजकता और भ्रम की स्थिति है, खासकर विधानसभा अध्यक्ष द्वारा आज सुबह नारेबाजी और कथित कदाचार के लिए 15 भाजपा विधायकों को निष्कासित करने के बाद. एक प्रमुख तकनीकी बिंदु पर भ्रम की स्थिति है- क्या भाजपा विधायकों को निष्कासित या निलंबित कर दिया गया था? 15 विधायकों के निष्‍कासित होने के बाद सदन की संख्‍या 53 रह गई है और बहुमत का आंकड़ा 27 रह गया है. ऐसे में कांग्रेस को विश्वास मत को आसानी से पारित कर लेना चाहिए, क्योंकि उसके पास अभी भी 34 विधायक(क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों को छोड़कर)  हैं. निःसंदेह, सवाल यह है कि क्या शक्ति परीक्षण के समय सभी 34 सदस्य तब भी वहां मौजूद रहेंगे.
हालांकि, यदि भाजपा विधायकों को निलंबित कर दिया गया है, तो सदन की ताकत 68 पर बनी रहेगी, और बहुमत का आंकड़ा 35 रहेगा. इसका मतलब है कि परीक्षण के दौरान कांग्रेस सरकार गिर जाएगी. 

राज्यसभा चुनाव में अराजकता

कांग्रेस कल के चुनाव में आने वाले उथल-पुथल भरे घटनाक्रम की स्पष्ट जानकारी के बिना ही उतरी, हालांकि हिमाचल और कर्नाटक में क्रॉस-वोटिंग की काफी अफवाहें थीं. जैसे-जैसे दिन ढलता गया, वे अफवाहें हकीकत में बदल गईं. राज्यसभा सांसदों का चुनाव विधायकों द्वारा किया जाता है, जिनके पास एक सीट सुरक्षित करने के लिए आवश्यक 35 वोट होते हैं. याद रखें, कांग्रेस के पास 40+3 था, और उसे यह चुनाव जीतने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए थी. 
लेकिन तब छह कांग्रेस विधायकों ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी के बजाय भाजपा के हर्ष महाजन (एक पूर्व कांग्रेसी) के लिए क्रॉस वोटिंग की.

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ऐसे पलट गया खेल 

कांग्रेस को समर्थन देने का दावा करने के बावजूद, निर्दलियों ने भी महाजन को वोट दिया, जिससे पार्टी के पास स्पष्ट रूप से केवल 34 विधायक बचे. ऐसे में खेल अचानक पलट गया और सत्ता पक्ष के पैरों के नीचे जमीन खिसक गई, जब महाजन और सिंघवी के बीच 34-34 वोट बराबर होने के कारण मामला ड्रॉ पर पहुंच गया. ऐसे में कांग्रेस को किस्‍मत का भी साथ नहीं मिला और उसके हिस्‍से में हार आई. 

फ्लोर टेस्ट की मांग

हिमाचल में नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि मंगलवार को राज्यसभा चुनाव के नतीजों से यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस सरकार अल्पमत में है और उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से इस्तीफा देने की मांग की. राज्य विधानसभा की 68 सीटों में से कांग्रेस के पास 40 और भाजपा के पास 25 सीटें हैं. बाकी तीन सीट पर निर्दलीयों का कब्जा है. 

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कांग्रेस की ढहती सरकार

इस बीच विक्रमादित्य सिंह के इस्तीफे ने पार्टी में दरार को सामने ला दिया है. सिंह छह बार के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे और शिमला ग्रामीण सीट से विधायक हैं. वह कल क्रॉस वोटिंग करने वालों में से नहीं थे, लेकिन आज उन्होंने अपनी भावनाएं स्पष्ट कर दीं और सत्तारूढ़ पार्टी पर उनके नाम पर वोट मांगने के बाद उनके दिवंगत पिता की स्मृति का अनादर करने का आरोप लगाया. 

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