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एकजुटता का संदेश, दोस्ताना अंदाज... BRICS समिट से आई ये तस्वीर काफी कुछ बोलती है!

पीएम मोदी हमेशा आंखों में आंखें डालकर किसी से बात करते हैं. ब्रिक्स सम्मेलन की इस तस्वीर में भी वैसा ही देखने को मिल रहा है. चाहे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हों या शी जिनपिंग, दोनों ही नेताओं से बात करते समय पीएम मोदी पूरे आत्मविश्वास में दिखाई दे रहे हैं.

एकजुटता का संदेश, दोस्ताना अंदाज... BRICS समिट से आई ये तस्वीर काफी कुछ बोलती है!
ब्रिक्स की सबसे ताकतवर तस्वीर
NDTV

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक तस्वीर सामने आई है. इस तस्वीर में तीनों नेताओं के चेहरे पर मुस्कान है. आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा है और केमिस्ट्री तो पूरी दुनिया देख रही है.

तीनों नेताओं के बीच किस बात को लेकर चर्चा हो रही है, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन बॉडी लैंग्वेज ऐसी है कि सभी देखते रह गए. इससे पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी विश्व के किसी नेता से मिलते हैं, तो उनका मिलने का अंदाज एकदम अनोखा रहता है. फिर चाहे हाथ मिलाना हो, गले मिलना हो या मुस्कान के साथ बातचीत करना हो.

पीएम मोदी हमेशा आंखों में आंखें डालकर किसी से बात करते हैं. ब्रिक्स सम्मेलन की इस तस्वीर में भी वैसा ही देखने को मिल रहा है. चाहे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हों या शी जिनपिंग, दोनों ही नेताओं से बात करते समय पीएम मोदी पूरे आत्मविश्वास में दिखाई दे रहे हैं. इस तस्वीर के जरिए एकजुटता का संदेश भी देने की कोशिश हो रही है.

इससे पहले शुक्रवार को जब पीएम मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक हुई थी, तब भी उनकी बॉडी लैंग्वेज देखने लायक थी. शनिवार को जब ब्रिक्स सम्मेलन का आगाज हुआ, तो पीएम मोदी की बॉडी लैंग्वेज फिर चर्चा का विषय बन गई. इसके अलावा, अपने 11 मिनट 30 सेकंड के संबोधन के दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर चर्चा की.

उन्होंने कहा कि 20 साल के एजेंडे पर सभी को साथ मिलकर काम करना है. पीएम ने कहा कि हमें अगले 20 सालों के लिए एक नए और बड़े लक्ष्य वाले एजेंडे पर काम करने की जरूरत है. हमें इस प्रक्रिया की शुरुआत अपनी अंदरूनी कार्य-प्रणालियों से करनी चाहिए. भले ही BRICS की अध्यक्षता हर साल बदलती रहती है, लेकिन इससे हमारे संस्थागत कामकाज की गति पर असर नहीं पड़ना चाहिए. मेरा प्रस्ताव है कि BRICS के कामों में निरंतरता बनाए रखने और उन्हें लागू करने के लिए एक व्यवस्था (मैकेनिज्म) बनाई जाए. इससे ट्रोइका व्यवस्था के ज़रिए सभी पहलों और नतीजों पर आगे की कार्रवाई करना संभव हो सकेगा. हम हर फैसले से जुड़े नोडल पॉइंट, समय-सीमा और उसे लागू करने की स्थिति का रिकॉर्ड रखने के लिए एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉज़िटरी भी बना सकते हैं.

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