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This Article is From Apr 05, 2025

अमेरिकी कंपनियों ने मांगने शुरू कर दिए 20 पर्सेंट डिस्काउंट, भारतीय व्‍यापारियों पर बड़ा दवाब

अमेरिका को होने वाले सालाना भारतीय फार्मा निर्यात की वैल्यू करीब 9 अरब डॉलर है. टैरिफ में कोई भी तेज वृद्धि न केवल भारतीय निर्यातकों को प्रभावित कर सकती है, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है.

अमेरिकी कंपनियों ने मांगने शुरू कर दिए 20 पर्सेंट डिस्काउंट, भारतीय व्‍यापारियों पर बड़ा दवाब
नए यूएस टैरिफ जोखिमों के बीच दुविधा में भारतीय व्‍यापारी...
नई दिल्‍ली:

Trump Tariff: डोनाल्‍ड ट्रंप के टैरिफ अटैक के बाद कंपनियों ने नफा-नुकसान का हिसाब लगाना शुरू कर दिया है. कंपनियों ने कैलकुलेटर निकाल लिए हैं. भारत में कई ऐसी कंपनियां और एक्सपोर्टस है, जिनको अमेरिका में सामान बेचना महंगा हो गया है. ट्रंप के टैरिफ से जुड़कर अमेरिका में सामान महंगा हो जाएगा. अमेरिकी कंपनियां दाम बढ़ाने के बजाय इसकी वसूली भारतीय कंपनियों से ही करना चाहती हैं. इसके लिए ऑर्डर पर डिस्काउंट मांगने का सिलसिला शुरू हो चुका है. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 15 से 20 पर्सेंट तक का डिस्काउंट मांगा जा रहा है. अमेरिका की कुछ कंपनी ने अपने प्री-ऑर्डर भी रोक लिए हैं. 

ऐसे में भारतीय कंपनियां और एक्सपोर्टस बड़ी दुविधा में फंस गए हैं. कई ऐसे शिपमेंट भी होंगे, जो निकल चुके हैं और उनपर भी डिकाउंट मांगा जा रहा है. अब कंपनियां और एक्सपोर्टस के पास कोई विकल्‍प नहीं है, सिवाय वह अमेरिकी खरीदारों की मांग स्‍वीकार कर लें. अमेरिकी खरीदारों की ओर से बड़े ऑर्डरों और शिपमेंट में आने वाले ऑर्डरों के लिए उन्हें जो अतिरिक्त लागत उठानी पड़ेगी, उसे झेलने या बांटने का दबाव है. हाई टैरिफ अमेरिकी खरीदारों, विशेष रूप से छोटे खरीदारों पर नकदी का दबाव भी डाल सकते हैं, क्योंकि उन्हें अचानक अधिक भुगतान करना होगा. 

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अमेरिका से संभावित नए टैरिफ जोखिमों के बीच वाणिज्य मंत्रालय देश के फार्मा निर्यातकों से बातचीत कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रेसिप्रोकल टैरिफ के पहले चरण में फार्मा सेक्टर को बाहर रखा गया है. फार्मा सेक्टर और सरकार के बीच बातचीत ऐसे समय पर शुरू हुई है, जब हाल ही में (अमेरिकी समय के अनुसार गुरुवार को) ट्रंप ने अमेरिका में फार्मास्यूटिकल आयात पर टैरिफ लगाने का संकेत दिया है.

हालांकि, टैरिफ में मामूली बढ़ोतरी से कोई खास असर नहीं होगा, लेकिन टैरिफ में बड़ी बढ़ोतरी से भारतीय दवा निर्माताओं के लाभ मार्जिन को नुकसान पहुंच सकता है. अमेरिका भारत के फार्मास्यूटिकल निर्यात के लिए एक प्रमुख बाजार है. अमेरिका में उपयोग होने वाली सभी जेनेरिक दवाओं की लगभग 40 प्रतिशत आपूर्ति भारतीय कंपनियों द्वारा की जाती है.

एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को होने वाले सालाना भारतीय फार्मा निर्यात की वैल्यू करीब 9 अरब डॉलर है. टैरिफ में कोई भी तेज वृद्धि न केवल भारतीय निर्यातकों को प्रभावित कर सकती है, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हाल ही में कई सेक्टरों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया गया है. इसमें सभी आयातित कारों और हल्के ट्रकों पर 25 प्रतिशत टैरिफ और अन्य आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत न्यूनतम टैरिफ शामिल है. अमेरिका ने भारत पर 27 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया है.

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